कर्ण गेट का अनुज: मेरी बगिया से हर पौधे का रिश्ता है खास

कर्ण गेट का अनुज: मेरी बगिया से हर पौधे का रिश्ता है खास
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📰कर्ण गेट का अनुज: मेरी बगिया से हर पौधे का रिश्ता है खास
✍🏻 संपादकीय प्रस्तुति: संजय शर्मा (वरिष्ठ संपादक, 20 वर्ष का अनुभव)

“मेरी बगिया”—बस एक नाम नहीं, बल्कि जीवन का सजीव एहसास है, ऐसा कहना है कर्ण गेट निवासी अनुज का, जिन्होंने अपने छोटे से आंगन में हरियाली की ऐसी दुनिया रच दी है, जो केवल आंखों को सुकून नहीं देती, बल्कि आत्मा को भी भीतर तक शांति का अहसास कराती है।

अनुज कहते हैं, “मेरा हर पौधे से एक विशेष रिश्ता है। मिट्टी में हाथ डालना, बीज बोना और फिर अंकुरण की प्रक्रिया को देखना मेरे लिए किसी ध्यान साधना से🌱 घरेलू इलाज के लिए पौधों का उपयोग
उनकी बगिया में पत्थरचट का पौधा भी है। अनुज बताते हैं, “सुना है कि ये पथरी में लाभदायक होता है। हां, इसका वैज्ञानिक प्रमाण तो डॉक्टर ही देंगे, लेकिन दादी-नानी हमेशा इस पौधे को अमृत जैसा बताती थीं।”

तुलसी का स्थान बगिया में सर्वोच्च है। “हल्की सर्दी, जुकाम या गले में खराश हो तो सबसे पहले तुलसी की चाय ही बनती है। तुलसी केवल औषधि ही नहीं, हमारे घर की आराध्य भी है।”

पौधों से मानसिक शांति

अनुज बताते हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब भी मानसिक थकावट महसूस होती है, वह अपनी बगिया की ओर चले जाते हैं। “पौधों को निहारना, उन्हें पानी देना, सूखे पत्ते हटाना, छोटे-छोटे बदलाव देखना—यह सब मेरे लिए थेरेपी जैसा है। किसी मनोवैज्ञानिक की जरूरत ही नहीं पड़ती।”

पौधों की देखभाल एक जिम्मेदारी

अनुज की बगिया की खास बात यह है कि वे इसे सिर्फ शौक नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझते हैं। “जब भी घर से बाहर जाता हूं, तो घर का कोई एक सदस्य जरूर रुकता है ताकि पौधों को समय पर पानी मिले। क्योंकि ये सिर्फ पौधे नहीं, हमारे परिवार के सदस्य हैं।”

बगिया में आने वाले पक्षियों का स्वागत

उनकी बगिया में आने वाली गौरैया, तोते और भौरें अब नियमित मेहमान बन चुके हैं। “पौधों में लगे फूलों पर मंडराते भौंरे और चहचहाती गौरैया मेरे दिन की शुरुआत को खास बना देते हैं।”

बगिया में बच्चों का जुड़ाव

अनुज के अनुसार, उनका यह प्रयास बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बना रहा है। “बच्चे जब खुद गमलों में मिट्टी डालते हैं, बीज बोते हैं और फिर उससे पौधा निकलता देखते हैं तो उन्हें जीवन की प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव होता है।”

सोशल मीडिया पर ‘मेरी बगिया’

अनुज ने अपने इंस्टाग्राम पेज ‘मेरी बगिया’ पर भी अपने पौधों की झलकियाँ साझा करनी शुरू कर दी हैं। कई लोग उनसे पौधों की देखभाल के टिप्स भी मांगते हैं। “कुछ लोग कमेंट करते हैं कि आपकी बगिया देखकर हमने भी छत पर गमले लगाना शुरू कर दिया।”

पौधों से आध्यात्मिक जुड़ाव

“हर पौधा कुछ कहता है,” अनुज कहते हैं। “गुलाब प्रेम की, तुलसी श्रद्धा की, नीम तपस्या की और गिलोय जीवन शक्ति की प्रतीक है। जब आप इनसे भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तो ये भी आपको ऊर्जा देते हैं।”

भविष्य की योजना

अनुज का सपना है कि वह आगे चलकर एक “बगिया क्लब” शुरू करें, जिसमें कॉलोनी के लोग जुड़ें, पौधों का आदान-प्रदान करें और एक सामूहिक हरियाली अभियान चलाएं। “हम अगर हर घर में एक पौधा भी लगाएं और उसकी जिम्मेदारी लें, तो करनाल को हरा-भरा बना सकते हैं।”

संपादकीय निष्कर्ष

अनुज की यह पहल सिर्फ बगिया तक सीमित नहीं, यह एक सोच है—प्रकृति से जुड़ने की, जीवन की रफ्तार को कुछ पल थामने की, और आत्मा को भीतर से स्वस्थ करने की। “मेरी बगिया” उनके लिए एक निजी स्वर्ग है, एक ऐसा स्थान जहां वह स्वयं को फिर से खोजते हैं।

❝ पौधे केवल जीवन का हिस्सा नहीं होते, वे स्वयं जीवन होते हैं। ❞
— अनुज, करनाल

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