क्या ईरान पर जंग छेड़ने की तैयारी में है अमेरिका? इजरायल के साथ मिलकर परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजना
“ईरान पर अमेरिकी हमला अब केवल कयास नहीं बल्कि एक रणनीतिक वास्तविकता बनता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में सुरक्षा सलाहकारों के साथ हुई गुप्त बैठक और उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने एक नई जंग की आहट को स्पष्ट कर दिया है।”
वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान पर अमेरिकी हमला अब केवल कयास नहीं बल्कि एक रणनीतिक वास्तविकता बनता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में सुरक्षा सलाहकारों के साथ हुई गुप्त बैठक और उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने एक नई जंग की आहट को स्पष्ट कर दिया है। इजरायल पहले ही ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले कर रहा है, और अब खबरें आ रही हैं कि अमेरिका भी इस सैन्य अभियान में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
जंग के मुहाने पर दुनिया? ट्रंप की बैठक से उपजे संकेत
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक घंटे 20 मिनट लंबी अहम बैठक की। इस बैठक में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर गहन चर्चा हुई। दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों (एक खुफिया अधिकारी और एक रक्षा विभाग के अधिकारी) ने CBS न्यूज़ को बताया कि ट्रंप अब इजरायल के साथ मिलकर ईरान की परमाणु सुविधाओं को मटियामेट करने पर विचार कर रहे हैं।
इजरायल का ट्रंप पर बढ़ता भरोसा
समाचार एजेंसी Axios के अनुसार, इजरायल के दो शीर्ष अधिकारियों ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली सैन्य प्रतिष्ठान को पूर्ण विश्वास है कि ट्रंप आने वाले दिनों में ईरान के फ़ोर्डो जैसे भूमिगत परमाणु ठिकानों पर बमबारी के लिए युद्ध में उतर सकते हैं।
जी7 सम्मेलन से अचानक रवाना हुए ट्रंप, सोशल मीडिया पर चेतावनियों की बौछार
ट्रंप के G7 सम्मेलन से अचानक लौटने और उनके तीखे सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने हाल ही में ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की थी, जिससे ये अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका अब केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहता।
ईरान की जवाबी तैयारी: अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका इजरायल के युद्ध में शामिल होता है, तो ईरान पहले से ही तैयार बैठा है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों और ड्रोन स्ट्राइक्स की पूरी योजना बना ली है।
ईरान समर्थित हाउती विद्रोही लाल सागर में अमेरिकी और मित्र देशों के जहाजों पर हमले फिर से शुरू कर सकते हैं। इराक और सीरिया में ईरानी समर्थक मिलिशिया भी अमेरिकी बेस को निशाना बना सकते हैं।
अमेरिका की सैन्य तैयारियाँ तेज़: यूरोप भेजे गए तीन दर्जन टैंकर विमान
अमेरिका ने यूरोप में करीब 36 ईंधन भरने वाले टैंकर विमान भेजे हैं, जिनका उद्देश्य अमेरिकी लड़ाकू विमानों को समर्थन देना है। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका खुद को हर स्थिति के लिए तैयार कर रहा है।
ट्रंप की बयानबाज़ी: खामेनेई को बताया ‘आसान टारगेट’
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को “आसान निशाना” बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरान की एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी, अमेरिकी सैन्य प्रणाली के सामने टिक नहीं सकती।
“हमारा कंट्रोल ईरान के एयरस्पेस पर है। उनकी रक्षा प्रणाली अमेरिकी निर्मित हथियारों के सामने बेकार हैं,” ट्रंप ने लिखा।
सैन्य विश्लेषकों की राय: यह सीमित हमला नहीं रहेगा
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अमेरिका ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले में शामिल होता है, तो यह महज़ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ नहीं रहेगी, बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। इज़राइल की ओर से पहले से ही कई परमाणु शोध केंद्रों को निशाना बनाया जा चुका है।
चीन और रूस की चिंताएं, वैश्विक युद्ध का खतरा?
ईरान पर अमेरिकी हमला यदि होता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। चीन और रूस जैसे देश भी इस मुद्दे पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपना सकते हैं। रूस पहले ही ईरान को मिसाइल डिफेंस सिस्टम प्रदान कर चुका है।
पुनरावृत्ति की आशंका: क्या दोहराया जाएगा इराक युद्ध का इतिहास?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक युद्ध से मिलती-जुलती हो सकती है, जहां ‘Weapons of Mass Destruction’ (WMD) के नाम पर युद्ध छेड़ा गया था। इस बार भी ‘परमाणु ठिकानों’ को आधार बनाकर अमेरिका एक बार फिर पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस में दो राय
जहां एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध की योजना बना रहे हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्य इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ का मानना है कि 2024 के चुनावों को देखते हुए ट्रंप एक बड़ी सैन्य कार्यवाही करके राष्ट्रीय भावना को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।
मीडिया और जनभावनाएं
अमेरिकी मीडिया में इस मुद्दे पर भारी बहस छिड़ चुकी है। CNN और MSNBC जैसे चैनलों पर विशेषज्ञ लगातार इस सैन्य हस्तक्षेप के मानवीय और राजनीतिक परिणामों पर चर्चा कर रहे हैं।
निष्कर्ष: आने वाले दिन निर्णायक
ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। क्या अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जड़ से खत्म करेंगे या यह केवल कूटनीतिक दबाव की रणनीति है – इस सवाल का जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिल जाएगा।
