कालाबाजारी गैस सिलेंडर: 921 रुपये का घरेलू सिलेंडर ब्लैक में 4000 तक, छोटे ढाबे और फास्ट फूड कारोबार पर संकट

कालाबाजारी गैस सिलेंडर: 921 रुपये का घरेलू सिलेंडर ब्लैक में 4000 तक, छोटे ढाबे और फास्ट फूड कारोबार पर संकट
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921 रुपये का घरेलू गैस सिलेंडर अगर आपको 4000 रुपये में खरीदना पड़े तो क्या होगा? शहर में यही हकीकत बनती जा रही है, जहां गैस सिलेंडर कालाबाजारी ने आम लोगों और छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है।

कालाबाजारी : चार हजार तक में बिक रहा 921 रुपये वाला घरेलू सिलेंडर

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के असर अब भारत के शहरों की रसोई तक दिखाई देने लगे हैं। शहर में गैस सिलेंडर कालाबाजारी का ऐसा खेल सामने आया है जिसने आम लोगों से लेकर छोटे होटल, ढाबा संचालकों और फास्ट फूड विक्रेताओं तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि 921 रुपये में मिलने वाला घरेलू गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में दो हजार से लेकर चार हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है।

प्रशासन का दावा है कि जिले में गैस की आपूर्ति सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। शहर के कई इलाकों में गैस सिलेंडर की उपलब्धता कम होने के कारण कालाबाजारी तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर छोटे व्यवसायी और फास्ट फूड विक्रेता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

युद्ध का असर शहर की रसोई तक

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में गैस वितरण व्यवस्था पर भी पड़ा है। शहर के होटल, ढाबा, रेहड़ी और फास्ट फूड संचालक बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की उपलब्धता कम हो गई है।

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई लगभग बंद होने के कारण छोटे व्यापारी मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर खरीदने लगे हैं। लेकिन घरेलू सिलेंडर भी अब आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग गैस सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे हैं।

छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे फास्ट फूड कारोबारियों और ढाबा संचालकों पर पड़ा है। ये लोग रोजाना गैस सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। अगर गैस उपलब्ध नहीं होती तो उनका काम पूरी तरह बंद हो जाता है।

ऐसे में कई दुकानदारों को मजबूरी में ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इससे उनका खर्च बढ़ गया है और मुनाफा लगभग खत्म हो गया है।

रविवार को खुली कालाबाजारी की पोल

रविवार को शहर के सेक्टर-12, नेहरू पैलेस और कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के बाहर लगे ढाबा, फास्ट फूड और रेहड़ी संचालकों से बातचीत की गई। इस दौरान कई कारोबारियों ने खुलकर बताया कि शहर में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है।

उनका कहना है कि पहले 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस भरवाई जाती थी, लेकिन अब यही गैस 300 रुपये प्रति किलो तक में भरी जा रही है।

चार हजार रुपये में खरीदे सिलेंडर

नेहरू पैलेस में पिज्जा की दुकान चलाने वाले पवन ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले मजबूरी में दो गैस सिलेंडर ब्लैक में खरीदने पड़े।

उन्होंने बताया:

“एक सिलेंडर के लिए चार हजार रुपये देने पड़े। दो सिलेंडर के लिए करीब आठ हजार रुपये खर्च हो गए। हमारी दुकान पर हर सप्ताह लगभग एक सिलेंडर की खपत हो जाती है।”

पवन का कहना है कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर भी ब्लैक में बिक रहे हैं और उनकी कीमत भी काफी ज्यादा है।

कुल्चे के दाम 30 से बढ़कर 50 रुपये

गैस सिलेंडर की कमी का असर अब खाने-पीने की चीजों के दाम पर भी दिखाई देने लगा है।

अवतार कॉलोनी निवासी दीपक, जो छोले-कुल्चे का फास्ट फूड चलाते हैं, बताते हैं कि गैस की किल्लत के कारण उन्हें अपने खाने के दाम बढ़ाने पड़े।

पहले जहां एक प्लेट कुल्चा 30 रुपये में मिलता था, अब उसे 40 से 50 रुपये में बेचना पड़ रहा है।

दीपक का कहना है:

“कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई सिर्फ 20 प्रतिशत शुरू हुई है, लेकिन इससे हमें कोई खास राहत नहीं मिली।”

गैस भरवाने के रेट भी तीन गुना

कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के बाहर फास्ट फूड की दुकान चलाने वाले संतोष कुमार बताते हैं कि गैस की समस्या के कारण उन्हें घर और दुकान दोनों जगह परेशानी हो रही है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक छोटा सिलेंडर भरवाया।

पहले यह सिलेंडर 300 रुपये में भर जाता था, लेकिन इस बार इसके लिए तीन से चार गुना ज्यादा पैसे देने पड़े।

उन्होंने कहा:

“बड़ा सिलेंडर भरवाने के लिए हमें करीब 2400 रुपये देने पड़े। पहले इतना खर्च नहीं होता था।”

कई दुकानदार वैकल्पिक काम की तलाश में

गैस सिलेंडर की कमी और महंगे दामों के कारण कई छोटे दुकानदार अब वैकल्पिक काम तलाशने लगे हैं।

कुछ दुकानदारों का कहना है कि अगर यही स्थिति कुछ दिनों तक जारी रही तो उन्हें अपना फास्ट फूड या ढाबा बंद करना पड़ सकता है।

प्रशासन का दावा: कहीं नहीं हो रही कालाबाजारी

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के नियंत्रक मुकेश कुमार का कहना है कि जिले में गैस की किसी तरह की कमी नहीं है।

उन्होंने कहा:

“जिले में कहीं भी गैस की कालाबाजारी होने की सूचना नहीं है। अगर कोई व्यक्ति ब्लैक में गैस बेचता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और निर्धारित समय पर गैस बुकिंग कराएं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। हालांकि भारत में गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है।

लेकिन स्थानीय स्तर पर वितरण में गड़बड़ी या कृत्रिम कमी पैदा करने के कारण कालाबाजारी की स्थिति बन सकती है।

क्या है समाधान

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कदम जरूरी हैं:

  • गैस वितरण की निगरानी बढ़ाना
  • ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई
  • कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति बढ़ाना
  • छोटे कारोबारियों को अस्थायी राहत देना

निष्कर्ष

गैस सिलेंडर कालाबाजारी का यह मामला सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर छोटे कारोबार से लेकर आम परिवारों की रसोई तक और ज्यादा गंभीर हो सकता है।

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