जनगणना दूसरा चरण 2027: जाति के साथ डिजिटल साक्षरता पर भी होंगे सवाल, हरियाणा के 2 जिलों में प्री-टेस्ट शुरू

जनगणना दूसरा चरण 2027: जाति के साथ डिजिटल साक्षरता पर भी होंगे सवाल, हरियाणा के 2 जिलों में प्री-टेस्ट शुरू
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क्या आपको कंप्यूटर चलाना आता है? क्या आप ई-मेल लिख सकते हैं? अगली जनगणना में सिर्फ परिवार और जाति ही नहीं, आपकी डिजिटल क्षमता भी रिकॉर्ड होगी। इस बार जनगणना कई बड़े बदलाव लेकर आ रही है।

चंडीगढ़ / हरियाणा। जनगणना के दूसरे चरण 2027 को लेकर तैयारियां अब तेज हो चुकी हैं। इस बार की जनगणना पहले की तुलना में काफी अलग और ज्यादा व्यापक होने जा रही है। सरकार केवल जनसंख्या, परिवार और मकानों की जानकारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहली बार लोगों की जाति के साथ उनकी डिजिटल साक्षरता को भी रिकॉर्ड किया जाएगा। यानी अब यह भी पूछा जाएगा कि क्या आप कंप्यूटर चला सकते हैं, ई-मेल लिख सकते हैं और स्मार्टफोन का प्रभावी इस्तेमाल करना जानते हैं या नहीं।

यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत तेजी से डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में देश की वास्तविक डिजिटल क्षमता को समझना सरकार की नीतियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

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हरियाणा में तेज हुई तैयारी, पंचकूला और फरीदाबाद चुने गए

हरियाणा में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मकानों की गणना पूरी होने के बाद अब लोगों की गिनती और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने का काम शुरू किया जाएगा। इसकी शुरुआत सोमवार से प्री-टेस्ट के जरिए होगी।

इस प्री-टेस्ट के लिए हरियाणा के दो जिलों—पंचकूला और फरीदाबाद—का चयन किया गया है। इन जिलों में चयनित क्षेत्रों में जनगणना प्रक्रिया को टेस्ट किया जाएगा, ताकि मुख्य जनगणना शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सके।

जनगणना विभाग ने इस कार्य के लिए 42 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। इन सभी शिक्षकों को प्री-टेस्ट के लिए ड्यूटी पर लगाया गया है और मेहनताना के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

1931 के बाद पहली बार जाति पर होगी विस्तृत गणना

इस बार की जनगणना का सबसे बड़ा और चर्चित पहलू जातिगत आंकड़ों का संग्रह है। साल 1931 के बाद पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर जाति संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि जातिगत डेटा आने वाले वर्षों में सरकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय, आरक्षण नीति और संसाधनों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जाति आधारित डेटा की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अब इस प्रक्रिया के शामिल होने से सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर इसके बड़े प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

डिजिटल साक्षरता भी बनेगी बड़ा पैमाना

इस बार एक और बड़ा बदलाव डिजिटल साक्षरता से जुड़े सवालों को शामिल करना है। जनगणनाकर्मी लोगों से यह जानेंगे कि—

  • क्या व्यक्ति कंप्यूटर चला सकता है?
  • क्या उसे ई-मेल लिखना आता है?
  • क्या वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है?
  • क्या उसे इंटरनेट के बेसिक उपयोग की जानकारी है?

डिजिटल साक्षरता से जुड़े ये आंकड़े सरकार को यह समझने में मदद करेंगे कि किन क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और प्रशिक्षण की सबसे अधिक जरूरत है।

विशेषकर ग्रामीण भारत और शहरी भारत के बीच डिजिटल गैप को समझने में यह डेटा बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

प्री-टेस्ट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

प्री-टेस्ट केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसका मकसद पूरी जनगणना की रणनीति तय करना है।

अधिकारियों के अनुसार, इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि—

  • एक व्यक्ति की जानकारी दर्ज करने में कितना समय लगता है
  • एक परिवार का पूरा डेटा लेने में कितनी देर लगती है
  • कर्मचारियों की कितनी संख्या जरूरी होगी
  • किन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है

प्री-टेस्ट से मिलने वाले अनुभव के आधार पर अंतिम जनगणना की पूरी योजना तैयार की जाएगी।

अगले साल फरवरी या मार्च में शुरू हो सकता है मुख्य चरण

विभागीय सूत्रों के अनुसार जनगणना का दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी या मार्च में शुरू हो सकता है।

हालांकि अंतिम तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारी लगभग पूरी रफ्तार से चल रही है।

अधिकारियों का मानना है कि इस बार डेटा संग्रह का दायरा बड़ा होने के कारण जनगणना पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत होगी।

इस बार पूछे जाएंगे कुल 40 सवाल

दूसरे चरण में नागरिकों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे।

इन सवालों में शामिल होंगे—

  • परिवार की संरचना
  • शिक्षा स्तर
  • मातृभाषा
  • धर्म
  • जाति
  • वैवाहिक स्थिति
  • बच्चों की संख्या
  • बच्चों की मृत्यु से संबंधित जानकारी
  • पढ़ने-लिखने की क्षमता
  • डिजिटल साक्षरता

लोगों से यह भी पूछा जाएगा कि वे कितनी भाषाएं बोल, पढ़ और लिख सकते हैं।

यह जानकारी देश की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति को समझने में अहम भूमिका निभाएगी।

मकान विहीन लोगों की भी होगी गिनती

इस बार जनगणना में समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जिन लोगों के पास स्थायी आवास नहीं है, उनकी भी गिनती की जाएगी।

इसमें शामिल हैं—

  • पाइपों में रहने वाले लोग
  • फुटपाथ पर रहने वाले लोग
  • बस अड्डों पर रात बिताने वाले
  • रेलवे स्टेशन पर रहने वाले
  • सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले लोग

जनगणना के अंतिम दिन विशेष टीमें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट पर तैनात रहेंगी।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए।

अन्य राज्यों में भी होगा प्री-टेस्ट

हरियाणा के अलावा देश के कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी जनगणना के दूसरे चरण का प्री-टेस्ट किया जाएगा।

इनमें शामिल हैं—

  • चंडीगढ़
  • दिल्ली
  • आंध्र प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू-कश्मीर
  • मिजोरम
  • मेघालय
  • सिक्किम
  • लक्षद्वीप
  • अंडमान और निकोबार

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि देश के अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक क्षेत्रों में जनगणना प्रक्रिया सुचारु रूप से लागू हो सके।

पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्यों की ली जाएगी मदद

राज्य के प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. ललित जैन ने बताया कि कई बार लोग जनगणनाकर्मियों को जानकारी देने में सहयोग नहीं करते।

ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्यों की मदद ली जाएगी।

स्थानीय प्रतिनिधियों की मदद से लोगों तक पहुंचना आसान होगा और सही जानकारी जुटाने में सुविधा मिलेगी।

गलत जानकारी देना हो सकता है अपराध

डॉ. ललित जैन ने स्पष्ट किया कि जनगणना कानून के तहत सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है या जानकारी देने से इनकार करता है, तो यह कानूनन अपराध माना जा सकता है।

इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे जनगणना टीम का पूरा सहयोग करें।

सही और विश्वसनीय आंकड़े ही सरकार को बेहतर नीतियां बनाने में मदद करते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?

यह जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है।

यही आंकड़े तय करते हैं—

  • भविष्य की सरकारी योजनाएं
  • संसाधनों का वितरण
  • शिक्षा और स्वास्थ्य नीति
  • रोजगार योजनाएं
  • डिजिटल इंडिया मिशन की रणनीति

इस बार जाति और डिजिटल साक्षरता को शामिल करने से यह प्रक्रिया और अधिक प्रभावशाली हो जाएगी।

भारत के सामाजिक ढांचे और डिजिटल भविष्य को समझने के लिए यह जनगणना एक महत्वपूर्ण आधार बनने जा रही है।

आने वाले समय में इस जनगणना के आंकड़े नीति निर्माण से लेकर सामाजिक बदलाव तक, हर क्षेत्र में बड़ा असर डाल सकते हैं।

जनता के सवाल, सीधे जवाब

Q1. जनगणना का दूसरा चरण कब शुरू होगा?

उत्तर: अगले साल फरवरी या मार्च में शुरू होने की संभावना है।

Q2. इस बार जनगणना में क्या नया है?

उत्तर: इस बार जाति और डिजिटल साक्षरता से जुड़े सवाल पहली बार बड़े स्तर पर शामिल किए गए हैं।

Q3. डिजिटल साक्षरता में क्या पूछा जाएगा?

उत्तर: कंप्यूटर, ई-मेल और स्मार्टफोन के उपयोग से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

Q4. क्या बेघर लोगों की भी गिनती होगी?

उत्तर: हाँ, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर रहने वालों की भी गिनती होगी।

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