ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का सपना बना धोखे का जाल : करनाल के छात्र से ठगे 10 लाख रुपये

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का सपना बना धोखे का जाल: करनाल के छात्र से ठगे 10 लाख रुपये
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रिपोर्टर : संजय शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार (20 वर्षों का अनुभव)

करनाल, हरियाणा : वैश्विक शिक्षा का सपना लेकर हजारों छात्र हर साल विदेशों का रुख करते हैं। बेहतर भविष्य, उच्च स्तरीय शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय जीवनशैली की चाहत युवाओं को आकर्षित करती है। लेकिन इस सपने को छलावा बनाकर कुछ धोखेबाज़ एजेंट मासूम अभिभावकों और छात्रों से लाखों की ठगी कर रहे हैं। ताजा मामला करनाल के गांव गोंदर से सामने आया है, जहां एक परिवार से ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर दस लाख रुपये ठग लिए गए।

शुरुआत एक भरोसे से हुई

गांव गोंदर निवासी प्रदीप कुमार ने अपने बेटे प्रशांत को उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया भेजने का सपना देखा। प्रशांत बीए फाइनल ईयर का छात्र है और अपने करियर को लेकर गंभीर था। नवंबर 2022 में प्रदीप कुमार की मुलाकात चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी ‘इमिग्रेशन सॉल्यूशन’ में विकास शर्मा और वान्या सिंह नामक व्यक्तियों से हुई। उन्होंने खुद को विदेशी शिक्षा विशेषज्ञ बताते हुए भरोसा दिलाया कि वीजा न लगने की स्थिति में पूरी फीस वापस की जाएगी।

फर्जी ऑफर लेटर और झूठे वादों का जाल

प्रदीप कुमार ने अपने बेटे के दस्तावेज उक्त कंसल्टेंसी को सौंप दिए और 15 हजार रुपये एंट्री फीस के तौर पर ट्रांसफर किए। कुछ ही दिनों में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के एक कॉलेज का ऑफर लेटर दिखाया गया। यह दस्तावेज बाद में फर्जी निकला। इसके बाद उनसे सात लाख रुपये और मांगे गए, जो उन्होंने दिसंबर 2022 में ट्रांसफर कर दिए।

कंसल्टेंसी की तरफ से लगातार मेडिकल, जीटीई क्लियरेंस और एंबेसी फीस जैसे बहानों के जरिए और रकम मांगी गई। कुल मिलाकर यह रकम लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच गई। चार महीने तक कोई प्रगति नहीं हुई और जब परिवार ने जवाब मांगा, तो उन्हें बताया गया कि वीजा रिजेक्ट हो गया है। हालांकि जांच में पता चला कि वीजा पहले ही रिजेक्ट हो चुका था और परिवार को जानबूझकर गुमराह किया गया।

वापसी के वादे और बाउंस हुए चेक

ठगी का एहसास होने के बाद जब प्रदीप कुमार ने पैसे वापसी की मांग की, तो आरोपियों ने दो चेक दिए जो बाद में बाउंस हो गए। कुछ समय बाद 4.12 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से वापस किए गए। जब बाकी बची राशि लेने के लिए प्रदीप कुमार चंडीगढ़ पहुंचे, तो एजेंट वहां से फरार थे और उनका कोई अता-पता नहीं चला।

पुलिस में शिकायत, धोखाधड़ी का मामला दर्ज

ठगे जाने के बाद प्रदीप कुमार ने थाना निसिंग में लिखित शिकायत दी। पुलिस ने जांच के बाद विकास शर्मा और वान्या सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन दोनों के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, एजेंट लोगों को झूठे वादों और नकली दस्तावेजों के जरिए ठगते थे और जब तक लोग कानूनी कार्रवाई का सहारा लेते, तब तक वे फरार हो जाते थे या ऑफिस बंद कर देते थे।

विदेशी शिक्षा के नाम पर फैलता धोखा : एक गंभीर समस्या

यह मामला न केवल करनाल बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। हर साल हजारों छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए आवेदन करते हैं और बड़ी संख्या में फर्जी एजेंट्स इसका फायदा उठाते हैं। बिना उचित जांच और सत्यापन के एजेंट पर भरोसा करना भारी नुकसान दे सकता है।

विदेश भेजने वाली कंसल्टेंसी को केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और रजिस्टर्ड एजेंसियों के माध्यम से ही संपर्क करना चाहिए। हरियाणा पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने भी हाल ही में कई ऐसे मामलों में एजेंट्स को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने बेरोजगारी और विदेश जाने की चाह को आधार बनाकर लाखों की ठगी की।

कानून की नजर में क्या है सजा ?

भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात), 468 (जालसाजी) और 471 (नकली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आरोपियों पर मामला दर्ज हुआ है। दोष सिद्ध होने पर इन्हें 7 से 10 साल की सजा तक हो सकती है। साथ ही पीड़ित को आर्थिक नुकसान की भरपाई का अधिकार भी प्राप्त है।

क्या कहती है पुलिस और प्रशासन ?

थाना निसिंग के जांच अधिकारी ने बताया कि मामला गंभीर है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जा रही है। पीड़ित परिवार से जरूरी दस्तावेज लिए जा चुके हैं। साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों को भी आगे आने के लिए कहा गया है।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी एजेंट से विदेशी शिक्षा या वीजा संबंधित डील करते समय रजिस्टर्ड संस्था से ही संपर्क करें और हर भुगतान की रसीद लेना न भूलें।

निष्कर्ष :

प्रदीप कुमार और उनके बेटे का सपना कुछ लालचियों की वजह से एक बुरे अनुभव में बदल गया। लेकिन यह मामला एक सबक भी है — कि सही जानकारी, सतर्कता और कानूनी जागरूकता से हम खुद को और अपने परिवार को ऐसे फ्रॉड से बचा सकते हैं।

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