हरियाणा के नूंह में पुलिस पर हमला : गिरफ्तारी के दौरान हिंसा, SI समेत चार जवान घायल, 21 आरोपी गिरफ्तार

हरियाणा के नूंह में पुलिस पर हमला : गिरफ्तारी के दौरान हिंसा, SI समेत चार जवान घायल, 21 आरोपी गिरफ्तार
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लेखक : संजय शर्मा
प्रकाशन तिथि : 20-4-2025

हरियाणा के नूंह जिले के जमालगढ़ गांव में बीते शुक्रवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई। पुलिस जब एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार करने गई, तो उस पर न केवल हमला किया गया, बल्कि आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश भी की गई। इस हिंसक घटना में पुलिस टीम के चार सदस्य घायल हो गए, जिनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। अब तक इस मामले में पुलिस ने 21 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें 20 पुरुष और एक महिला शामिल हैं।

पुलिस की कार्यवाही और हमला : घटना का क्रमवार विवरण

यह घटना शुक्रवार को तब घटी जब हरियाणा के फरीदाबाद जिले से पुलिस टीम वाहन चोरी के मामले में आरोपी सलीम उर्फ सल्ली को पकड़ने के लिए नूंह जिले के जमालगढ़ गांव पहुंची थी। आरोपी की तलाश लंबे समय से चल रही थी और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज था।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सलीम अपने गांव लौटा है और वहां छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें सब-इंस्पेक्टर सुंदर, एएसआई समसुद्दीन, हेड कांस्टेबल यूनिस खान, कांस्टेबल विक्रांत और नितिन शामिल थे। टीम एक निजी वाहन में गांव पहुंची और वहां से आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।

हमले की शुरुआत : गांव में घात लगाकर हमला

पुलिस टीम जैसे ही आरोपी को लेकर गांव से बाहर निकली, रास्ते में एक पिकअप जीप उनका पीछा करने लगी। यह देखकर पुलिस को संदेह हुआ, लेकिन उन्होंने रास्ता जारी रखा। दोपहर करीब 2:00 बजे जब पुलिस टीम आदराव चौक, जमालगढ़ पहुंची, तो सड़क के किनारे करीब 20 पुरुष और एक महिला पहले से ही घात लगाकर खड़े थे।

इन लोगों ने अचानक पुलिस वाहन पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने जैसे-तैसे गाड़ी को पुन्हाना कस्बे की ओर मोड़ा, लेकिन अफरातफरी में वाहन पलट गया। यह हादसा पुलिस के लिए दोहरी मुसीबत बन गया।

जीप से कुचलने की कोशिश : जानलेवा हमला

वाहन के पलटने के बाद टीम के सदस्य घायल अवस्था में बाहर निकले और सड़क किनारे खड़े हुए। इसी दौरान पीछा कर रही जीप ने टीम को कुचलने की कोशिश की। यह एक सुनियोजित हमला प्रतीत हो रहा था, जिसमें पुलिसकर्मियों की जान लेने का प्रयास किया गया।

इस हमले में सब-इंस्पेक्टर सुंदर, हेड कांस्टेबल यूनिस खान, कांस्टेबल विक्रांत और नितिन गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और आरोपी के परिवारजनों ने सलीम को छुड़ाने के लिए पुलिस टीम से हाथापाई भी की और हालात बेकाबू हो गए।

मौके पर पहुंची अतिरिक्त पुलिस बल

घटना की सूचना मिलते ही फरीदाबाद और नूंह से अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर भेजा गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया और घायलों को तुरंत गुरुग्राम और फरीदाबाद के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 186, 332, 353, 307 और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

अब तक इस मामले में पुलिस ने 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने न केवल सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई, बल्कि पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया। आरोपी सलीम को भी एक बार फिर से हिरासत में ले लिया गया है और उसे कड़ी सुरक्षा में रखा गया है।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि अब गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए बल तैनात है। साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।

पुलिस पर हमला : कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती

यह घटना सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह कानून व्यवस्था पर सीधा हमला था। जिस प्रकार से पहले से तैयारी कर हमलावरों ने पुलिस वाहन को निशाना बनाया, उससे यह साबित होता है कि आरोपी के परिजन और उनके सहयोगी किसी भी हद तक जाने को तैयार थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई, तो कानून-व्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

पुलिस प्रशासन की अपील

पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अपराधियों को संरक्षण न दें। यदि कोई व्यक्ति पुलिस कार्रवाई में बाधा डालता है या अपराधियों को बचाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानून सबके लिए बराबर है और उसकी अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष : सिस्टम को ठेस, न्याय को चुनौती

नूंह की यह घटना यह स्पष्ट करती है कि पुलिस की कार्यवाही में अड़चन डालने वालों की मानसिकता समाज के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है। यह न केवल पुलिस बल का मनोबल गिराती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी बाधित करती है।

अब देखना होगा कि पुलिस किस प्रकार से इस मामले को अंजाम तक पहुंचाती है और आरोपी तथा हमलावरों को सजा दिलाने में कितना सफल होती है।

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