हरियाणा के किसान खेत में छह रुपये प्रति किलो की लागत से आलू उगाते हैं, लेकिन बाजार में वही आलू एक से दो रुपये प्रति किलो बिक रहा है। लगातार तीसरे साल नुकसान झेल रहे किसान अब समझ नहीं पा रहे कि आलू बेचें, कोल्ड स्टोर में रखें या खेत में ही छोड़ दें।
करनाल। आलू किसान संकट इस समय हरियाणा के हजारों किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। खेतों में मेहनत, पानी, खाद और मजदूरी पर पांच से छह रुपये प्रति किलो तक लागत लगाने के बाद जब किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचते हैं तो उन्हें एक से दो रुपये प्रति किलो का ही दाम मिल रहा है। इससे किसान आर्थिक संकट में घिरते जा रहे हैं।
डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा होने के कारण आलू के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं। बाजार में थोक भाव तीन से चार रुपये प्रति किलो तक ही पहुंच पा रहा है। यह स्थिति केवल एक साल की नहीं है, बल्कि पिछले तीन साल से आलू उत्पादक किसान इसी तरह के संकट से गुजर रहे हैं।
हरियाणा में इस बार 33427 हेक्टेयर जमीन पर करीब 9 लाख 13 हजार 380 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है। उत्पादन अच्छा होने के बावजूद किसान खुश नहीं हैं, क्योंकि बाजार में कीमतें इतनी कम हैं कि लागत भी नहीं निकल पा रही।
आलू किसान संकट – लागत और बाजार भाव में भारी अंतर
किसानों का कहना है कि आलू की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर पांच से छह रुपये प्रति किलो तक लागत आती है। कई जगह यह लागत इससे भी अधिक पहुंच जाती है।
लेकिन मंडियों में जो रेट मिल रहा है वह केवल एक से दो रुपये प्रति किलो है। यानी किसान को प्रति किलो तीन से चार रुपये का नुकसान हो रहा है।
किसानों के अनुसार यह नुकसान इतना बड़ा है कि कई किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। कुछ किसान तो आलू को खेत से निकालकर मंडी तक लाने का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
मंडी में क्या है स्थिति
करनाल की नई सब्जी मंडी में आढ़ती कश्मीरी लाल बताते हैं कि इस समय आलू का भाव 130 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति कट्टा तक चल रहा है।
एक कट्टे में करीब 50 किलो आलू होते हैं। इस हिसाब से प्रति किलो कीमत तीन से चार रुपये के बीच बनती है।
कुछ दिन पहले स्थिति इससे भी खराब थी। बबैन और पिपली मंडी में आलू का भाव 30 रुपये प्रति कट्टा तक गिर गया था। यानी किसान को प्रति किलो एक रुपये से भी कम कीमत मिल रही थी।
इस गिरावट ने किसानों के साथ-साथ आढ़तियों को भी संकट में डाल दिया है।
कोल्ड स्टोर बना नई चिंता
आलू की कीमतें कम होने पर किसान आमतौर पर फसल को कोल्ड स्टोर में रख देते हैं ताकि बाद में जब कीमतें बढ़ें तो बेहतर दाम मिल सके।
लेकिन इस बार कोल्ड स्टोर का खर्च भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।
आढ़ती बताते हैं कि कोल्ड स्टोर में आलू रखने का किराया लगभग 170 रुपये प्रति कट्टा है। इसके अलावा 20 से 30 रुपये प्रति कट्टा ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग से लगता है।
इस तरह एक कट्टे पर लगभग 200 रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाता है।
अगर बाद में भी आलू के भाव नहीं बढ़े तो किसान और आढ़ती दोनों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। इसी डर से कई किसान कोल्ड स्टोर में आलू रखने से भी हिचकिचा रहे हैं।
तीन साल से लगातार आलू किसान संकट
हरियाणा में आलू किसानों के लिए यह स्थिति नई नहीं है। पिछले तीन साल से किसानों को इसी तरह की मंदी का सामना करना पड़ रहा है।
कभी उत्पादन ज्यादा होने से कीमतें गिर जाती हैं तो कभी बाजार में मांग कम होने से दाम नीचे आ जाते हैं।
इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है। उत्पादन अच्छा हुआ लेकिन मांग अपेक्षाकृत कम रही।
इसके कारण बाजार में आलू की सप्लाई ज्यादा हो गई और कीमतें गिरती चली गईं।
कंपनियों ने दिया किसानों को भरोसा
आलू उत्पादक किसानों के लिए एक राहत की खबर यह भी है कि कुछ कंपनियों ने किसानों से किए गए खरीद करार को निभाने का फैसला किया है।
पहले कंपनियों ने कहा था कि वे किसानों से केवल 40 क्विंटल आलू प्रति एकड़ ही खरीदेंगी।
लेकिन किसानों की हालत को देखते हुए अब कंपनियों ने अपने फैसले में बदलाव किया है।
अब कंपनियां किसानों से 80 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से आलू खरीदेंगी।
गुड रिच कंपनी के मैनेजर गुरनाम सिंह का कहना है कि आलू की मांग कम होने के कारण पहले खरीद कम करने पर विचार किया गया था, लेकिन किसानों की स्थिति को देखते हुए कंपनी ने पूरा करार निभाने का फैसला किया है।
उनके अनुसार यह फैसला पूरे हरियाणा के आलू उत्पादक किसानों के हित में लिया गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह के अनुसार इस समय बाजार में आलू की सप्लाई ज्यादा है और मांग कम है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही आलू कोल्ड स्टोर में जाना शुरू होगा, बाजार में सप्लाई कम हो जाएगी और कीमतें बढ़ने लगेंगी।
उनका मानना है कि अगले कुछ महीनों में आलू के दाम सुधर सकते हैं।
किन जिलों में कितना उत्पादन
हरियाणा में आलू की खेती कई जिलों में बड़े पैमाने पर की जाती है।
प्रदेश में कुल 33427 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हो रही है और इससे 913380 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है।
सबसे ज्यादा उत्पादन कुरुक्षेत्र जिले में है, जहां 13772 हेक्टेयर में 365690 मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है।
इसके बाद यमुनानगर दूसरे स्थान पर है, जहां 6010 हेक्टेयर में 162500 मीट्रिक टन आलू उत्पादन हुआ है।
करनाल तीसरे स्थान पर है, जहां 3500 हेक्टेयर में 144300 मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है।
अंबाला जिले में 3236 हेक्टेयर में 72436 मीट्रिक टन उत्पादन है।
पानीपत में 1400 हेक्टेयर में 30040 मीट्रिक टन और जींद में 1198 हेक्टेयर में 29328 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है।
मेवात ऐसा जिला है जहां आलू का उत्पादन शून्य है। बाकी जिलों में 61 से लेकर 871 हेक्टेयर तक ही आलू की खेती की जा रही है।
किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कई किसान आलू की खेती छोड़ सकते हैं।
किसानों का कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन बाजार में कीमतें नहीं बढ़ रही।
अगर सरकार और बाजार दोनों स्तरों पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई तो आलू की खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
समाधान क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आलू किसानों की समस्या का समाधान कई स्तरों पर किया जा सकता है।
सबसे पहले किसानों को बेहतर स्टोरेज सुविधा मिलनी चाहिए ताकि वे तुरंत कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न हों।
इसके अलावा आलू आधारित प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि बाजार में मांग बढ़े।
अगर आलू से चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा तो किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं।
बाजार और नीति की जरूरत
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कई बार उत्पादन ज्यादा होने पर कीमतें गिर जाती हैं।
इस समस्या को हल करने के लिए सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुरक्षा मिल सके।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर साल किसी न किसी फसल के किसान इसी तरह संकट में फंसते रहेंगे।
