करनाल में अब नशे का नहीं, कानून का चलेगा राज… छात्र हों या सप्लायर, कोई नहीं बचेगा!
नशामुक्त करनाल की ओर निर्णायक कदम: नशेड़ियों और विद्यार्थियों की होगी पहचान, नहर किनारों से उखाड़े जाएंगे भांग के पौधे
करनाल।
नशामुक्त करनाल अभियान के तहत जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त और बहुस्तरीय रणनीति लागू करने का फैसला लिया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे की सप्लाई रोकना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं और विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें समय रहते सही दिशा में लौटाना है। प्रशासन ने साफ किया है कि नहर किनारों और खुले इलाकों में उग रहे भांग के पौधों को जड़ से उखाड़ा जाएगा, नशे से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और एनडीपीएस एक्ट के तहत लंबित मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए मजबूत पैरवी होगी।
यह फैसला शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित जिला स्तरीय एनकॉर्ड (NCORD) बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता नगराधीश मोनिका ने की। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, औषधि नियंत्रण, उच्चतर शिक्षा और अभियोजन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नशे के खिलाफ अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों जरूरी हुआ यह अभियान
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा सहित देश के कई हिस्सों में नशे का दायरा तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर युवा वर्ग और विद्यार्थी इसकी चपेट में आ रहे हैं। करनाल भी इस सामाजिक बुराई से अछूता नहीं रहा। नहर किनारों पर उगने वाली भांग, अवैध नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता और नशे के नेटवर्क ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया।
नगराधीश मोनिका ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि यह परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर सीधा असर डालता है। इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता अब पहचान, रोकथाम, इलाज और सजा—इन चार स्तंभों पर आधारित होगी।
नशेड़ी लोगों और विद्यार्थियों की पहचान होगी
अभियान का सबसे अहम पहलू नशे के आदी लोगों और विद्यार्थियों की पहचान है। पुलिस प्रशासन अब तक नशे में संलिप्त 75 लोगों की पहचान कर चुका है। इनका पूरा डाटा तैयार किया गया है, जिसमें उनके संपर्क, गतिविधियां और नशे से जुड़ी जानकारी शामिल है।
शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यदि किसी छात्र के पास नशीला पदार्थ पाया जाता है, तो उसे अपराधी की तरह नहीं बल्कि सुधार की जरूरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाएगा। उसकी जानकारी माता-पिता को दी जाएगी और उसे काउंसलिंग के लिए भेजा जाएगा।
स्कूल-कॉलेज बनेंगे नशा विरोधी अभियान का केंद्र
जिला शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा को निर्देश दिए गए हैं कि जिले के सभी स्कूलों में नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों में केवल भाषण ही नहीं, बल्कि वास्तविक उदाहरणों, डॉक्यूमेंट्री और संवाद सत्रों के जरिए बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव बताए जाएंगे।
उच्चतर शिक्षा विभाग की अधिकारी डॉ. अनिता जून को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करें, जो नशे की ओर झुकाव दिखा रहे हैं या पहले से इसकी गिरफ्त में हैं। ऐसे विद्यार्थियों को गोपनीय तरीके से काउंसलिंग और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
नहर किनारों से उखाड़े जाएंगे भांग के पौधे
प्रशासन ने माना कि नशे की जड़ें केवल शहरों में नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों और नहर किनारों तक फैली हुई हैं। कई जगहों पर भांग के पौधे प्राकृतिक रूप से उग आते हैं, जिनका बाद में गलत इस्तेमाल होता है। अब पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीमें नहर किनारों और खाली जमीनों का सर्वे कर इन पौधों को जड़ से उखाड़ेंगी।
यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि भांग की आसान उपलब्धता युवाओं को नशे की ओर पहला कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
दुकानों, क्लबों और अहातों पर सख्त नजर
पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास स्थित दुकानों, क्लबों और अहातों की नियमित जांच की जाए। यदि किसी भी स्थान पर नशा या नशीले पदार्थ की बिक्री या सेवन पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
औषधि नियंत्रण अधिकारी रितु मेहला को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं कि जिले की सभी केमिस्ट दुकानों का समय-समय पर निरीक्षण हो। बिना पर्ची नशीली दवाएं बेचने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
नशा मुक्ति केंद्रों की संयुक्त जांच
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जिले में संचालित सभी नशा मुक्ति केंद्रों की संयुक्त जांच की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये केंद्र वास्तव में मरीजों के इलाज और पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं, न कि केवल औपचारिकता निभा रहे हैं।
एनडीपीएस एक्ट: सजा सुनिश्चित करने पर जोर
एडीए मनमोहन जगत ने जानकारी दी कि पिछले माह एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में से 13 केसों का निपटारा हुआ है। इनमें सात लोगों को दोषमुक्त किया गया, जबकि दो मामलों में अपील की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में 898 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, जो विभिन्न चरणों में हैं।
प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि हर दोषी को सजा मिले, इसके लिए केस की मजबूत पैरवी की जाए। एएसपी कांची सिंघल ने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
समाज की भूमिका भी अहम
यह अभियान केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की है कि वे इस मुहिम में भागीदार बनें। यदि किसी इलाके में नशे की गतिविधि दिखे, तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
निष्कर्ष
करनाल को नशामुक्त बनाने की यह पहल अगर ईमानदारी से लागू होती है, तो यह न केवल जिले बल्कि पूरे हरियाणा के लिए एक मॉडल बन सकती है। नशे के खिलाफ लड़ाई लंबी है, लेकिन सही नीति, सख्त कार्रवाई और सामाजिक सहयोग से इसे जीता जा सकता है।
