मोबाइल महंगे: युद्ध का असर, 25% तक बढ़े स्मार्टफोन के दाम, पेनड्राइव-मेमोरी कार्ड भी गायब

मोबाइल महंगे: युद्ध का असर, 25% तक बढ़े स्मार्टफोन के दाम, पेनड्राइव-मेमोरी कार्ड भी गायब
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पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। करनाल की मोबाइल मार्केट में स्मार्टफोन, पेनड्राइव और मेमोरी कार्ड के दाम अचानक बढ़ गए हैं। कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान बाजार से गायब होने लगे हैं, जिससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों की परेशानी बढ़ गई है।

युद्ध का असर… करनाल में मोबाइल महंगे, 25% तक बढ़े दाम, पेनड्राइव-मेमोरी कार्ड भी हुए 20% महंगे

करनाल। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों तक पहुंचने लगा है। करनाल की इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मार्केट में मोबाइल महंगे होने लगे हैं और कई डिजिटल स्टोरेज उपकरणों की कीमतों में भी अचानक उछाल आया है। व्यापारियों के अनुसार चिपसेट और मोबाइल पार्ट्स के आयात में बाधा आने के कारण कंपनियों ने स्मार्टफोन के दाम 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। यही नहीं, पेनड्राइव और मेमोरी कार्ड जैसे छोटे लेकिन जरूरी उपकरणों की कीमतों में भी लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

बाजार में स्थिति यह है कि कई उत्पादों का नया स्टॉक नहीं पहुंच रहा है और जो सामान उपलब्ध है वह पहले से काफी महंगा हो चुका है। मोबाइल दुकानदारों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।

दिवाली के बाद अचानक बढ़े दाम

मोबाइल बाजार के व्यापारियों के अनुसार पिछले साल दिवाली के समय जो स्मार्टफोन करीब 15,000 रुपये में आसानी से मिल जाता था, वही अब लगभग 19,000 रुपये में बिक रहा है। कंपनियों ने न केवल कीमतें बढ़ाई हैं बल्कि बाजार में आने वाले स्टॉक को भी सीमित कर दिया है।

मोबाइल एक्सेसरीज की स्थिति और भी गंभीर है। बाजार में पेनड्राइव और मेमोरी कार्ड का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। जो पेनड्राइव पहले 350 से 400 रुपये में मिल जाती थी, अब उसका रेट 600 से 650 रुपये तक पहुंच गया है और कई दुकानों पर यह उपलब्ध भी नहीं है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले महीनों में मोबाइल फोन और एक्सेसरीज की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

चिपसेट की कमी बना सबसे बड़ा कारण

मोबाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण चिपसेट की कमी है। मोबाइल फोन का चिपसेट मुख्य प्रोसेसर होता है जो फोन के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है। फोन के चालू होने से लेकर बंद होने तक हर प्रक्रिया इसी पर निर्भर करती है।

चिपसेट डिवाइस की प्रोसेसिंग, मेमोरी मैनेजमेंट, नेटवर्क कनेक्टिविटी और एप्लिकेशन संचालन जैसे सभी कार्यों को नियंत्रित करता है। यदि चिपसेट उपलब्ध नहीं होता तो किसी भी स्मार्टफोन का निर्माण संभव नहीं है।

मोबाइल कंपनियों को यह चिपसेट मुख्य रूप से चीन और ताइवान से आयात करना पड़ता है। पश्चिम एशिया के युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण इन पार्ट्स की आपूर्ति प्रभावित हो गई है, जिसका सीधा असर मोबाइल निर्माण और कीमतों पर पड़ा है।

करनाल में 600 से अधिक मोबाइल शोरूम

करनाल जिला प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यहां शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 600 से अधिक मोबाइल शोरूम संचालित होते हैं। इन दुकानों पर रोजाना औसतन छह से आठ हजार मोबाइल फोन और संबंधित उपकरणों की बिक्री होती है।

लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से बाजार में मोबाइल की उपलब्धता कम होने लगी है। दुकानदारों का कहना है कि पहले कंपनियां नियमित रूप से स्टॉक भेजती थीं, लेकिन अब सीमित मात्रा में ही मोबाइल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इसका परिणाम यह हुआ कि मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होने के कारण कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।

50 हजार से महंगे मोबाइल पर ऑफर बंद

मुगल कैनाल मार्केट के व्यापारियों का कहना है कि मोबाइल कंपनियों ने कई प्रमोशनल ऑफर भी बंद कर दिए हैं।

दुकानदारों के अनुसार

  • 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले मोबाइल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
  • 20 हजार से ज्यादा कीमत वाले मोबाइल फोन के दाम लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

पहले जहां महंगे स्मार्टफोन पर कंपनियां 10 प्रतिशत तक की छूट और मोबाइल एक्सेसरीज मुफ्त देती थीं, अब यह ऑफर लगभग खत्म हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल नुकसान से बचने के लिए ऑफर कम कर रही हैं।

4जी और 5जी फोन के दाम में भारी उछाल

बाजार में एंट्री लेवल स्मार्टफोन की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है।

  • 4जी फोन की शुरुआती कीमत जो दिवाली के समय 6000 से 7000 रुपये के बीच थी, अब लगभग 10,500 रुपये तक पहुंच गई है।
  • 5जी फोन की शुरुआती कीमत पहले 9000 रुपये के आसपास थी, जो अब बढ़कर लगभग 13,500 रुपये हो गई है।

यह बढ़ोतरी खास तौर पर उन ग्राहकों को प्रभावित कर रही है जो बजट स्मार्टफोन खरीदते हैं।

ऑनलाइन और ऑफलाइन रेट में अंतर

मोबाइल शोरूम संचालक दर्शन के अनुसार ग्राहकों में अब ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों की तुलना करने का चलन बढ़ गया है। कई ग्राहक शोरूम में आकर पहले मोबाइल देखते हैं और फिर ऑनलाइन कीमत चेक करते हैं।

दर्शन बताते हैं कि कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मोबाइल की कीमत कम दिखाई देती है लेकिन वास्तव में वह स्टॉक में उपलब्ध नहीं होता। दूसरी ओर ऑफलाइन बाजार में मोबाइल उपलब्ध है लेकिन कीमत अधिक है।

इस स्थिति से ग्राहकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और दुकानदारों को भी समझाने में कठिनाई होती है।

हर बार महंगे रेट पर आ रहा नया स्टॉक

दुकानदार सुमित का कहना है कि पिछले कुछ समय से पेनड्राइव, चिपसेट और मोबाइल बोर्ड की सप्लाई लगभग रुक गई थी। अब जब नया स्टॉक आने लगा है तो वह पहले से काफी महंगे दामों पर मिल रहा है।

उनके अनुसार कंपनियों के प्रतिनिधि ऑर्डर देने के बावजूद पूरी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कई बार दुकानदारों को आंशिक स्टॉक ही मिल रहा है।

सुमित बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से लगभग हर नई खेप पहले से ज्यादा कीमत पर ही आ रही है।

ग्राहकों की जेब पर बढ़ता बोझ

मोबाइल फोन आज के समय में केवल एक गैजेट नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुंच के लिए स्मार्टफोन जरूरी हो गया है।

ऐसे में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। खास तौर पर छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए नया फोन खरीदना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।

आगे और बढ़ सकते हैं दाम

मोबाइल बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले महीनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

हालांकि कुछ कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई चैनल तलाशने की कोशिश कर रही हैं ताकि बाजार में स्टॉक बनाए रखा जा सके।

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