नया सत्र शुरू होने में सिर्फ 8 दिन बाकी… लेकिन हजारों बच्चों का स्कूल में दाखिला अब भी अटका! आखिर कौन जिम्मेदार—स्कूल या सिस्टम?
करनाल। आरटीई दाखिले करनाल में इस बार बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसके चलते जिले के करीब 10 हजार बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों को निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं, लेकिन इस बार 58 निजी स्कूलों ने अब तक अपनी सीटों का डाटा पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया है। नतीजा यह हुआ कि नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुरू होने में महज आठ दिन शेष हैं और हजारों बच्चों के दाखिले अटक गए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने इन स्कूलों का एमआईएस (MIS) पोर्टल बंद कर दिया है और पांच हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है। साफ कहा गया है कि जब तक स्कूल जुर्माना नहीं भरेंगे, तब तक उनका पोर्टल दोबारा नहीं खोला जाएगा।
58 स्कूलों की लापरवाही, हजारों बच्चों पर असर
जिले में कुल 160 निजी सीबीएसई स्कूल संचालित हैं, जिनमें करीब 1.60 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन इन स्कूलों में से 58 स्कूलों ने आरटीई के तहत एंट्री लेवल कक्षाओं की सीटों का डाटा सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर अपलोड नहीं किया।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को 20 मार्च की रात 12 बजे तक का समय दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों ने इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया। विभाग द्वारा कई बार पत्र जारी किए गए, समय सीमा भी बढ़ाई गई, फिर भी स्कूलों की लापरवाही सामने आई।
इसका सीधा असर उन गरीब परिवारों के बच्चों पर पड़ा है, जो आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
10 हजार सीटों की स्थिति अस्पष्ट
अगर औसतन देखा जाए तो हर स्कूल में लगभग 1000 छात्र होते हैं। आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं, यानी हर स्कूल में करीब 250 सीटें। ऐसे में 58 स्कूलों की बात करें तो लगभग 10 हजार सीटों की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं है, बल्कि हजारों बच्चों के सपनों और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है।
हर ब्लॉक में सामने आई समस्या
जिन स्कूलों ने डाटा अपलोड नहीं किया है, वे केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे जिले में फैले हुए हैं।
- करनाल ब्लॉक – 36 स्कूल
- नीलोखेड़ी – 8 स्कूल
- असंध – 6 स्कूल
- निसिंग – 5 स्कूल
- घरौंडा – 2 स्कूल
- इंद्री – 1 स्कूल
इससे स्पष्ट होता है कि यह समस्या पूरे जिले में फैली हुई है।
सबसे ज्यादा सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल
इन 58 स्कूलों में सबसे अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार:
- 17 सीनियर सेकेंडरी स्कूल
- 22 हाई स्कूल
- 12 मिडिल स्कूल
- 7 प्राइमरी स्कूल
इससे यह भी पता चलता है कि बड़ी संस्थाएं भी नियमों का पालन करने में पीछे रह गई हैं।
शिक्षा विभाग की सख्ती
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने अब सख्त कदम उठाए हैं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडू ने स्पष्ट कहा है कि जो स्कूल समय पर डाटा अपलोड नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि:
- सभी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद कर दिया गया है
- पांच हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है
- जुर्माना भरने के बाद ही पोर्टल दोबारा खोला जाएगा
जिला शिक्षा अधिकारी रोहतास वर्मा ने भी कहा कि जिन 58 स्कूलों ने नियमों का पालन नहीं किया है, उन पर कार्रवाई तय है।
बच्चों और अभिभावकों की बढ़ती चिंता
इस पूरे मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई परिवार ऐसे हैं जो अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण ऐसा नहीं कर पाते। आरटीई उनके लिए एकमात्र उम्मीद होती है।
अब जब दाखिले ही अटक गए हैं, तो इन परिवारों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है।
एक अभिभावक ने बताया, “हमने आरटीई के तहत आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्कूलों की सीटों की जानकारी ही नहीं आई। समझ नहीं आ रहा कि बच्चों का एडमिशन होगा या नहीं।”
क्या है आरटीई अधिनियम?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसके तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके, लेकिन इस तरह की लापरवाही इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है।
सिस्टम बनाम स्कूल—कौन जिम्मेदार?
यह सवाल अब उठने लगा है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या केवल स्कूलों की लापरवाही है या सिस्टम की निगरानी में भी कमी रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- स्कूलों की जवाबदेही तय होनी चाहिए
- समय पर निगरानी और कार्रवाई होनी चाहिए
- अभिभावकों को समय पर सही जानकारी मिलनी चाहिए
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग आगे क्या कदम उठाता है। क्या स्कूल जल्द जुर्माना भरकर पोर्टल चालू कराएंगे? क्या बच्चों के दाखिले समय पर हो पाएंगे?
अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो हजारों बच्चों का एक साल बर्बाद हो सकता है।
