डेढ़ महीने तक गंदे पानी से जूझते रहे लोग, बच्चे तक हुए बीमार… आखिर कैसे बदली तस्वीर और किसकी लापरवाही आई सामने? पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
करनाल/घरौंडा। घरौंडा गुरुद्वारा वाली गली पानी सप्लाई आखिरकार करीब डेढ़ माह बाद पटरी पर लौट आई है। वार्ड नंबर-14 स्थित गुरुद्वारा वाली गली और हलवाई मोहल्ला के लोगों को अब साफ व पीने योग्य पानी मिलने लगा है। लंबे समय से गंदे पानी की समस्या झेल रहे करीब 55 घरों के निवासियों ने राहत की सांस ली है। जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्षों पुरानी पाइपलाइन की सफाई, दवाई का उपयोग और नए सैंपल पास होने के बाद सप्लाई बहाल की गई है।
यह समस्या केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्वास्थ्य संकट में भी बदल गई थी। जनवरी माह में लगातार तीन सप्ताह तक गंदा पानी आने से बच्चों और बुजुर्गों में उल्टी-दस्त समेत कई बीमारियां फैल गई थीं। कई लोगों को अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह समस्या अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से बढ़ रही थी, लेकिन समय रहते समाधान नहीं हुआ।
डेढ़ माह तक परेशानी का दौर
गुरुद्वारा वाली गली और आसपास के हलवाई मोहल्ला में रहने वाले लोगों के लिए जनवरी का महीना मुश्किल भरा रहा। नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आने लगा था। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन धीरे-धीरे पानी का रंग और गंध इतनी खराब हो गई कि पीना तो दूर, घर के कामों में इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार विभाग को शिकायत दी गई, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी दौरान बच्चों में पेट से जुड़ी बीमारियां बढ़ने लगीं। डॉक्टरों ने साफ पानी पीने की सलाह दी, जिससे लोगों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ा।
55 घरों के लोग और बच्चे हुए बीमार
गंदे पानी की वजह से वार्ड के करीब 55 घरों के लोग प्रभावित हुए। उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याएं सामने आईं। कुछ परिवारों ने बताया कि छोटे बच्चों की हालत ज्यादा खराब हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने क्षेत्र का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। डॉक्टरों का कहना था कि दूषित पानी पीने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए समस्या का स्थायी समाधान जरूरी था। इसी दबाव के बाद प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुए।
मीडिया में मुद्दा उठने के बाद हरकत में आया प्रशासन
स्थानीय लोगों के अनुसार जब यह मुद्दा प्रमुखता से मीडिया में उठा, तब जाकर विभागीय अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शिकायतों की संख्या बढ़ने और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट आने के बाद पाइपलाइन की जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पाया गया कि गली में बिछी पाइपलाइन वर्षों पुरानी हो चुकी है और अंदर काफी गंदगी जमा थी। पाइपलाइन के अंतिम छोर पर खोदाई कर कैप खोलकर सफाई का काम शुरू किया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद पाइप से बड़ी मात्रा में कचरा और गंदगी निकाली गई।
पाइपलाइन की सफाई और दवाई डालने के बाद बदली स्थिति
जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाइपलाइन की सफाई के साथ-साथ जलघर से दवाई भी डाली। इसके बाद पानी के नए सैंपल जांच के लिए भेजे गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सैंपल की रिपोर्ट पास होने के बाद ही नियमित सप्लाई शुरू की गई।
कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि गुरुद्वारा वाली गली की सप्लाई की कैप खोलकर पूरी तरह से फ्लशिंग की गई है। पाइपलाइन में जमा गंदगी हटाने के बाद अब पानी साफ आने लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से ऐसी समस्या न आए, इसके लिए नियमित निरीक्षण किया जाएगा।
लोगों ने लगाए लापरवाही के आरोप
वार्ड के लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण समस्या इतनी बढ़ी। पूर्व पार्षद ओंकार दत्त शर्मा, वार्डवासी सुभाष मित्तल और बिजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइन की सफाई कर दी जाती तो लोग बीमार नहीं पड़ते।
निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान में देरी हुई। लोगों ने मांग की है कि पुराने इलाकों में पाइपलाइन का नियमित रखरखाव और समय-समय पर जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
स्थानीय लोगों को मिली राहत, लेकिन डर अभी भी बरकरार
हालांकि अब पानी साफ आने लगा है, लेकिन लोगों के मन में डर अभी भी बना हुआ है। कई परिवार फिलहाल पानी उबालकर पी रहे हैं या फिल्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन तक स्थिति पर नजर रखी जाएगी, उसके बाद ही पूरी तरह भरोसा होगा।
महिलाओं ने बताया कि डेढ़ महीने तक पानी की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित रही। कपड़े धोने से लेकर खाना बनाने तक हर काम में परेशानी हुई।
विशेषज्ञों की राय: नियमित निगरानी जरूरी
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराने शहरों और गलियों में पाइपलाइन की उम्र ज्यादा होने के कारण ऐसी समस्याएं आम हैं। समय-समय पर फ्लशिंग, सैंपलिंग और क्लोरीनेशन जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पाइपलाइन की मेंटेनेंस प्लानिंग पहले से हो, तो बीमारी फैलने जैसी नौबत नहीं आती। साथ ही लोगों को भी शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ पानी को उबालकर पीने जैसी सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
प्रशासन के लिए सबक
यह मामला प्रशासन के लिए भी एक सीख बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों और मीडिया के दबाव के बाद ही समस्या का समाधान हुआ। अब जरूरत है कि विभाग पहले से निगरानी सिस्टम मजबूत करे ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि क्षेत्र की पाइपलाइन की समय-समय पर जांच की जाएगी और पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी।
निष्कर्ष
घरौंडा के गुरुद्वारा वाली गली में डेढ़ माह बाद साफ पानी की आपूर्ति शुरू होना निश्चित रूप से राहत की खबर है, लेकिन यह घटना यह भी दिखाती है कि बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही लोगों की सेहत पर कितना बड़ा असर डाल सकती है। लोगों की जागरूकता, मीडिया की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही समस्या का समाधान संभव हुआ। अब जरूरत है कि इस राहत को स्थायी बनाया जाए और भविष्य में ऐसी परेशानी दोबारा न आए।
