क्या आपके घर भी प्रगणक पहुंचे हैं? प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर कार्रवाई तेज की, अब एक सप्ताह में पूरा होगा सर्वे।
डीसी का प्रगणकों को लक्ष्य… एक सप्ताह में पूरा करें जनगणना कार्य
करनाल। जिले में जनगणना कार्य को निर्धारित समय से पहले पूरा करने के लिए प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने जिले के सभी प्रगणकों और चार्ज अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि मकान सूचीकरण और गणना से जुड़े सभी लंबित कार्यों को अगले एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। प्रशासन ने इसके लिए रोजाना मॉनिटरिंग शुरू कर दी है और हर तीसरे दिन प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
जिला सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने जनगणना से संबंधित नजरी नक्शों, मकान सूचीकरण ब्लॉक और पोर्टल अपलोडिंग कार्य की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकार द्वारा तय समयसीमा से पहले कार्य पूर्ण करना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि 25 मई तक सभी तहसीलों का काम हर हाल में पूरा होना चाहिए ताकि 30 मई तक पहले चरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से समाप्त की जा सके।
प्रशासन की इस सक्रियता के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों को व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सके। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल एप आधारित होने के कारण अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बैठक में कहा कि जिले की विभिन्न तहसीलों में कार्य की प्रगति अलग-अलग स्तर पर चल रही है। उन्होंने असंध तहसील की टीम की सराहना करते हुए कहा कि वहां सबसे बेहतर कार्य हुआ है, जबकि घरौंडा दूसरे स्थान पर है। अन्य तहसीलों के चार्ज अधिकारियों को भी इसी गति से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी प्रगणकों को फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति के अनुसार डेटा दर्ज करना होगा। प्रशासन चाहता है कि जिले की प्रत्येक जानकारी सटीक और अद्यतन रूप में पोर्टल पर अपलोड हो ताकि भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों में सही आंकड़ों का उपयोग किया जा सके।
पहली बार एप के माध्यम से दर्ज होगा पूरा रिकॉर्ड
इस बार की जनगणना प्रक्रिया कई मायनों में अलग और आधुनिक मानी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब सभी जानकारी मोबाइल एप और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे डेटा की पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी।
पहले जहां कई स्तरों पर कागजी प्रक्रिया होती थी, वहीं अब अधिकांश कार्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आधारित रहेगा। इससे समय की बचत होगी और डेटा संग्रहण में त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। हालांकि इसके लिए प्रगणकों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किसी प्रकार की परेशानी न आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से सरकार को भविष्य की योजनाओं में काफी मदद मिलेगी। आबादी, आवास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़े सीधे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है मकान सूचीकरण?
जनगणना के प्रथम चरण में मकानों का सूचीकरण और गणना की जाती है। इसके तहत हर घर, भवन और आवासीय इकाई की जानकारी जुटाई जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि मकान पक्का है या कच्चा, उसमें कितने लोग रहते हैं, पानी-बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
इसी आधार पर आगे चलकर सरकार विभिन्न योजनाओं का खाका तैयार करती है। ग्रामीण विकास, शहरी विस्तार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा संस्थानों और सड़क निर्माण जैसी योजनाओं में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र की सही जानकारी दर्ज नहीं होगी तो वहां की वास्तविक जरूरतें सरकार तक नहीं पहुंच पाएंगी। यही कारण है कि इस बार प्रशासन विशेष सावधानी बरत रहा है।
लोगों से सहयोग की अपील
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने आमजन से भी अपील की कि वे प्रगणकों का सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कई बार लोग जानकारी देने से बचते हैं या अधूरी सूचना देते हैं, जिससे रिकॉर्ड प्रभावित होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी। किसी भी व्यक्ति से आधार कार्ड नंबर, पैन कार्ड नंबर, बैंक खाते की जानकारी या ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
डीसी ने लोगों से यह भी कहा कि जानकारी देने से पहले संबंधित अधिकारी या प्रगणक का पहचान पत्र अवश्य जांच लें। इससे फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होंगी।
प्रशासन की बढ़ी जवाबदेही
जनगणना को केवल एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया नहीं माना जाता बल्कि यह देश की विकास नीतियों का आधार होती है। जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण हर गतिविधि की मॉनिटरिंग संभव हो रही है।
सूत्रों के अनुसार सरकार इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना चाहती है ताकि भविष्य में डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
करनाल प्रशासन की सक्रियता को इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते सभी आंकड़े व्यवस्थित हो गए तो आने वाले वर्षों में जिले को विकास योजनाओं का अधिक लाभ मिल सकेगा।
हर तीसरे दिन होगी समीक्षा
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि अब कार्य की समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी। प्रत्येक तीसरे दिन चार्ज अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। जिन क्षेत्रों में कार्य धीमा पाया जाएगा, वहां अतिरिक्त टीमें लगाई जा सकती हैं।
प्रशासन का फोकस केवल समयसीमा पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर भी रहेगा। गलत डेटा या अधूरी जानकारी मिलने पर संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक ढांचे को समझने का सबसे बड़ा माध्यम है। डिजिटल एप आधारित जनगणना भविष्य में नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी।
इस प्रक्रिया से यह भी स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितनी सुविधाओं की जरूरत है, कहां रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे और किन इलाकों में आधारभूत संरचना कमजोर है।
करनाल में प्रशासन द्वारा शुरू की गई तेज समीक्षा प्रक्रिया अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
जिला सचिवालय में आयोजित बैठक में एडीसी डॉ. राहुल रईया, जिले के सभी तहसीलदार, घरौंडा पालिका के सचिव रवि प्रकाश शर्मा सहित प्रवेश, मनजीत, कृष्ण, नवजोत, अजीत, शैलेंद्र और प्रदीप मौजूद रहे। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की जानकारी उपायुक्त को दी।
बैठक के अंत में उपायुक्त ने दोहराया कि जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी अधिकारी पूरी गंभीरता के साथ जिम्मेदारी निभाएं।
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