अब स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जानकारी नहीं होगी गायब! हर छात्र का रिकॉर्ड MIS Portal पर ऑनलाइन दर्ज होगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
अब MIS Portal पर दर्ज किया जाएगा ड्रॉपआउट छात्र का रिकॉर्ड
करनाल। जिले में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब MIS Portal Dropout Student Record प्रणाली के तहत स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सरकारी और निजी दोनों प्रकार के विद्यालयों को ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की जानकारी MIS Portal पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन बच्चों तक दोबारा पहुंच बनाना है जो किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि जिले में हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक या अन्य कारणों से स्कूल छोड़ देते हैं। इनमें से कई बच्चे दूसरे विद्यालयों में भी दाखिला नहीं लेते, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड अधूरा रह जाता है और भविष्य में उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ना मुश्किल हो जाता है। अब विभाग इस समस्या को तकनीक के जरिए नियंत्रित करने की तैयारी में है।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई छात्र विद्यालय छोड़ता है तो उसकी संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन MIS Portal पर दर्ज करनी होगी। इसमें विद्यार्थी का नाम, एसआरएन नंबर, स्कूल छोड़ने का कारण, वर्तमान स्थिति, वर्तमान लोकेशन, किसी अन्य विद्यालय में प्रवेश की जानकारी और उसकी आगे की शैक्षणिक स्थिति को नियमित रूप से अपडेट करना अनिवार्य रहेगा।
शिक्षा विभाग की नई पहल से ड्रॉपआउट विद्यार्थियों पर रहेगी सीधी नजर
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब तक स्कूल छोड़ने वाले कई बच्चों का डेटा व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध नहीं हो पाता था। कई बार विद्यार्थी दूसरे शहर या राज्य में चले जाते थे और उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड ट्रैक नहीं हो पाता था। इससे सरकार की शिक्षा योजनाओं का पूरा लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पाता था।
नई ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद हर छात्र का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि छात्र ने पढ़ाई क्यों छोड़ी, वर्तमान में वह क्या कर रहा है और क्या वह दोबारा किसी स्कूल से जुड़ा है या नहीं। विभाग का मानना है कि इससे ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
यू-डाइस और एसआरएन नंबर से जुड़ेगा पूरा डाटा
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की जानकारी यू-डाइस (UDISE) प्रणाली के अंतर्गत स्टूडेंट डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ी जाएगी। प्रत्येक विद्यार्थी के एसआरएन नंबर के आधार पर उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेगी।
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जो विद्यार्थी अगली कक्षा में पहुंच चुके हैं, उनके अंक और वर्तमान शैक्षणिक स्थिति भी MIS Portal पर अपडेट की जाए। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी आसान हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने से शिक्षा विभाग को वास्तविक आंकड़े मिल सकेंगे। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में सबसे अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं और किन कारणों से ऐसा हो रहा है।
क्यों छोड़ते हैं बच्चे स्कूल?
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कई विद्यार्थी आर्थिक तंगी, पारिवारिक समस्याओं, बाल मजदूरी, सामाजिक दबाव, परिवहन की कमी, पढ़ाई में रुचि कम होना और समय से मार्गदर्शन न मिलने जैसे कारणों से स्कूल छोड़ देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती है।
कई मामलों में बच्चियों की पढ़ाई घरेलू जिम्मेदारियों या सामाजिक कारणों की वजह से बीच में रुक जाती है। वहीं कुछ विद्यार्थी रोजगार की तलाश में पढ़ाई छोड़ देते हैं। विभाग का मानना है कि यदि ऐसे विद्यार्थियों की पहचान समय रहते हो जाए तो उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
अब नहीं छूटेगा किसी बच्चे का रिकॉर्ड
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्कूल की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। यदि कोई छात्र विद्यालय छोड़ता है तो संबंधित स्कूल प्रशासन को तुरंत उसकी जानकारी MIS Portal पर अपलोड करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा शिक्षा व्यवस्था से पूरी तरह बाहर न हो।
विभाग का कहना है कि पहले कई बार बच्चों के रिकॉर्ड अधूरे रह जाते थे, लेकिन अब ऑनलाइन डेटा उपलब्ध होने से अधिकारियों को हर विद्यार्थी की स्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
डिजिटल एजुकेशन सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले समय में इससे न केवल ड्रॉपआउट दर कम होगी बल्कि शिक्षा योजनाओं की मॉनिटरिंग भी बेहतर हो सकेगी।
ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध होने से सरकार को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किन इलाकों में शिक्षा से जुड़े अभियान चलाने की जरूरत है। इससे शिक्षा विभाग उन बच्चों तक सीधे पहुंच बना सकेगा जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं।
स्कूलों को दिए गए सख्त निर्देश
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि MIS Portal पर डेटा समय पर अपडेट किया जाए। यदि किसी विद्यालय की ओर से जानकारी अपडेट नहीं की जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
विभाग का मानना है कि जब तक प्रत्येक विद्यार्थी का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध नहीं होगा, तब तक ड्रॉपआउट दर को नियंत्रित करना मुश्किल रहेगा। इसलिए सभी स्कूलों को जिम्मेदारी के साथ इस प्रक्रिया को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
MIS Portal पर यह जानकारी करनी होगी अपलोड
- विद्यार्थी का नाम और एसआरएन नंबर
- स्कूल छोड़ने का कारण
- वर्तमान स्थिति और लोकेशन
- दूसरे विद्यालय में दाखिले की जानकारी
- अगली कक्षा में पहुंचे विद्यार्थियों के अंक
- यू-डाइस पोर्टल पर नियमित अपडेट अनिवार्य
शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया अहम कदम
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे हजारों बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ने में मदद मिल सकती है। कई बार बच्चे पढ़ाई छोड़ने के बाद शिक्षा व्यवस्था से पूरी तरह कट जाते हैं। लेकिन अब डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विभाग ऐसे विद्यार्थियों तक पहुंच बना सकेगा।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेटा आधारित शिक्षा प्रणाली भविष्य में नीति निर्माण के लिए भी उपयोगी साबित होगी। इससे सरकार को वास्तविक स्थिति समझने और बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
जिले में ड्रॉपआउट संख्या कम करना लक्ष्य
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की संख्या को न्यूनतम स्तर तक लाना है। विभाग का मानना है कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ना समाज और देश दोनों के भविष्य के लिए आवश्यक है।
यदि कोई बच्चा शिक्षा से दूर हो जाता है तो उसका सीधा असर उसके भविष्य और रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। ऐसे में विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी बच्चा केवल जानकारी के अभाव में शिक्षा से वंचित न रह जाए।
वर्जन
“विभाग का उद्देश्य जिले में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की संख्या को शून्य करना है। विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़कर ही उन्हें बेहतर भविष्य का अवसर दिया जा सकता है। इसलिए सभी विद्यालयों को तय समय पर बच्चों का डाटा MIS Portal पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।”
— रोहताश वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
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