फतेहाबाद में फिर सुर्खियों में आया फ्यूचर मेकर घोटाला, आरोपी की पेशी बनी चर्चा का विषय
फतेहाबाद में बहुचर्चित फ्यूचर मेकर चिटफंड घोटाले से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। वर्ष 2018 में दर्ज हुए इस मामले में मुख्य आरोपी राधेश्याम उर्फ परम गुरु की कोर्ट में पेशी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
आरोपी लगातार छह बार पेशी से नदारद रहा, जिससे कोर्ट की नाराजगी बढ़ती गई। शनिवार को जब वह फिर से पेश नहीं हुआ, तो कोर्ट ने दोपहर तक उपस्थित होने का सख्त निर्देश जारी किया। आखिरकार, कड़े रुख के चलते दोपहर बाद राधेश्याम भगवा वस्त्रों में कोर्ट में पेश हुआ और अपने बयान दर्ज कराए।
कोर्ट की अनदेखी भारी पड़ी, सख्त आदेश के बाद पेश हुआ आरोपी
2018 में फतेहाबाद पुलिस ने फ्यूचर मेकर चिटफंड घोटाले में राधेश्याम के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह केस पिछले कई वर्षों से लंबित था, लेकिन आरोपी लगातार पेशियों से बचता रहा।
शनिवार सुबह जब वह फिर से नहीं आया, तो कोर्ट ने अंतिम नोटिस जारी कर दोपहर तक पेश होने का सख्त आदेश दिया। इसके बाद, लंच के बाद राधेश्याम भगवा कपड़े पहनकर कोर्ट में पहुंचा और बयान दर्ज कराए।
कोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में पेशी से बचने का कोई भी प्रयास कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है।
मीडिया के सवालों से घिरा ‘परम गुरु’, बचाव में दिया यह जवाब
कोर्ट से बाहर निकलते ही मीडिया कर्मियों ने राधेश्याम को घेर लिया और उससे तीखे सवाल पूछे। जब उससे आश्रम और गोशाला बनाने को लेकर सवाल किया गया, तो उसने स्पष्ट जवाब दिया—
“मैं किसी भी प्रकार का आश्रम या गोशाला नहीं बना रहा हूँ, केवल भक्ति में लीन रहूंगा।”
इसके अलावा, जब निवेशकों के पैसे लौटाने को लेकर पूछा गया, तो उसने आश्वासन दिया—
“सभी के पैसे लौटाए जाएंगे, इस पर किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।”
क्या है फ्यूचर मेकर चिटफंड घोटाला?
फ्यूचर मेकर घोटाला हरियाणा समेत कई राज्यों में हजारों निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाने वाला बड़ा चिटफंड घोटाला था। इस कंपनी ने लोगों को तेजी से पैसा दोगुना करने और उच्च रिटर्न देने का झांसा देकर निवेश करवाया।
धीरे-धीरे, कंपनी की वित्तीय अनियमितताएं उजागर होने लगीं और यह भुगतान करने में असमर्थ हो गई। जब 2018 में यह घोटाला सामने आया, तो हजारों निवेशकों ने ठगी की शिकायत दर्ज करवाई।
फतेहाबाद समेत कई अन्य शहरों में राधेश्याम और उसकी कंपनी के खिलाफ केस दर्ज हुए, जिसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
कई निवेशकों ने जब अपनी पूंजी डूबती देखी, तो उन्होंने पुलिस और प्रशासन से शिकायत करना शुरू किया।
- 2018 में जब पहली बार कंपनी की वित्तीय गड़बड़ियों की खबरें सामने आईं, तब तक यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो चुका था।
- पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी के मालिक और उच्च पदाधिकारी निवेशकों के पैसे को अवैध तरीकों से इधर-उधर कर रहे थे।
- जब घोटाले की भनक सरकारी एजेंसियों को लगी, तो फ्यूचर मेकर चिटफंड के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
घोटाले में कितने लोगों की जमा पूंजी डूबी?
- शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हजारों निवेशकों ने अपनी जिंदगी की कमाई इस स्कीम में लगा दी थी।
- कई लोगों ने अपनी जमीन-जायदाद बेचकर भी इस स्कीम में पैसा लगाया था।
- जब कंपनी ने भुगतान करने से इनकार किया, तो कई निवेशक कर्ज में डूब गए और आर्थिक संकट का शिकार हो गए।
छह बार पेशी टाल चुका था आरोपी, अब क्या होगा?
राधेश्याम उर्फ परम गुरु के खिलाफ कई अन्य मामलों में भी जांच जारी है। कोर्ट ने इस बार सख्ती दिखाते हुए चेतावनी दी है कि भविष्य में पेशी से बचने की कोशिश भारी पड़ सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या आरोपी अपने वादे के अनुसार निवेशकों का पैसा लौटाएगा, या यह केवल एक बयान मात्र है? कोर्ट की अगली सुनवाई में इस पर बड़ा खुलासा हो सकता है।
निष्कर्ष: क्या मिलेगा निवेशकों को न्याय?
फ्यूचर मेकर चिटफंड घोटाले से हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या कोर्ट की सख्ती के बाद निवेशकों को उनका पैसा वापस मिलेगा?
अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
