बैंकों में जमा 78000 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड: जानिए कैसे कर सकते हैं क्लेम और आपके रिश्तेदार का हिस्सा तो नहीं?

बैंकों में जमा 78000 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड: जानिए कैसे कर सकते हैं क्लेम और आपके रिश्तेदार का हिस्सा तो नहीं?
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वित्त वर्ष 2022 में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट की राशि 32,934 करोड़ रुपये थी। लेकिन मार्च 2023 के अंत तक यह राशि बढ़कर 42,272 करोड़ रुपये हो गई। इस अवधि के दौरान अनक्लेम्ड डिपॉजिट में 28 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अनक्लेम्ड अमाउंट में 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह राशि 78,213 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। मार्च 2023 तक, डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में 62,225 करोड़ रुपये जमा थे।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट क्या होता है?

अनक्लेम्ड डिपॉजिट का मतलब ऐसे बैंक खाते से होता है जिसमें पिछले 10 सालों से कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है। बैंक सालाना आधार पर अपने अकाउंट्स की समीक्षा करते हैं और ऐसे खातों को पहचानते हैं जिनमें लंबे समय से कोई गतिविधि नहीं हुई है। जब किसी खाते में 10 साल तक न तो कोई पैसा जमा किया जाता है और न ही निकाला जाता है, तो उस खाते की राशि को अनक्लेम्ड डिपॉजिट माना जाता है। बैंकों द्वारा इन खातों के ग्राहकों से संपर्क करने का प्रयास भी किया जाता है।

RBI की भूमिका और DEAF

जिन खातों में कोई दावेदार नहीं होता, उनकी जानकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को देते हैं। इसके बाद यह राशि डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में ट्रांसफर कर दी जाती है। RBI इस तरह के डिपॉजिट्स को लेकर अवेयरनेस कैम्पेन भी चलाता है, जिससे इसके कानूनी हकदारों का पता लगाया जा सके।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट के कारण

अनक्लेम्ड डिपॉजिट बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से एक प्रमुख कारण है कि डिपॉजिटर की मृत्यु हो जाने पर और उसका नॉमिनी दस्तावेजों में दर्ज न होने के कारण उस खाते में जमा राशि का कोई दावेदार नहीं मिलता। इसके अलावा, कई बार लोग अपने पुराने खातों को भूल जाते हैं, जिससे वह खाते अनक्लेम्ड हो जाते हैं।

RBI के निर्देश और UDGAM पोर्टल

भारतीय रिजर्व बैंक चाहता है कि अनक्लेम्ड अमाउंट में कटौती हो। RBI ने निर्देश दिया है कि यह राशि उनके सही दावेदारों को वापस मिलनी चाहिए। ये निर्देश देश के सभी कमर्शियल बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित) और सभी सहकारी बैंकों पर 1 अप्रैल, 2024 से लागू होंगे। अनक्लेम्ड डिपॉजिट के क्लेम के लिए RBI ने UDGAM पोर्टल भी लॉन्च किया है।

अनक्लेम्ड अमाउंट कैसे क्लेम करें?

यदि आपके भी किसी रिश्तेदार या घर का अमाउंट लावारिस बैंक में पड़ा हुआ है, तो आप इसे RBI के UDGAM पोर्टल के जरिए क्लेम कर सकते हैं। इस पोर्टल पर जाकर आसानी से जमा राशि को क्लेम किया जा सकता है। UDGAM पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करने के बाद लॉगिन करके अनक्लेम्ड अमाउंट चेक कर सकते हैं और क्लेम कर सकते हैं या फिर संबंधित बैंक में जाकर भी संपर्क कर सकते हैं।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या और समाधान

भारत में अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या बढ़ती जा रही है। इसके समाधान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक लगातार प्रयास कर रहा है। अवेयरनेस कैम्पेन के माध्यम से लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसके साथ ही UDGAM पोर्टल जैसे डिजिटल उपायों से लोग अपने अनक्लेम्ड डिपॉजिट को आसानी से क्लेम कर सकते हैं।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट की बढ़ती समस्या

अनक्लेम्ड डिपॉजिट की बढ़ती समस्या का एक कारण यह भी है कि लोग अपने पुराने बैंक खातों को भूल जाते हैं। इसके अलावा, बहुत से लोगों को यह भी नहीं पता होता कि उनके परिवार के किसी सदस्य का बैंक खाता है जिसमें राशि जमा है। इस प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए बैंकों और RBI द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं।

RBI के प्रयास

RBI ने अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अवेयरनेस कैम्पेन के माध्यम से लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा, UDGAM पोर्टल जैसे डिजिटल उपायों से लोग अपने अनक्लेम्ड डिपॉजिट को आसानी से क्लेम कर सकते हैं। RBI का लक्ष्य है कि अनक्लेम्ड अमाउंट में कटौती हो और यह राशि सही दावेदारों को वापस मिले।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट के लिए सावधानी

लोगों को अपने बैंक खातों के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित रूप से अपने खातों की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा, अपने बैंक खातों के नॉमिनी को सही तरीके से दर्ज करवाना चाहिए ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में राशि का सही दावेदार मिल सके। इस प्रकार की सावधानियों से अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या भारत में बढ़ती जा रही है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकों के प्रयासों से इस समस्या का समाधान संभव है। लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और अपने बैंक खातों की नियमित जांच करनी चाहिए। इससे अनक्लेम्ड डिपॉजिट की समस्या को कम किया जा सकता है और राशि का सही दावेदार मिल सकता है।

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