हरियाणा के हिसार में 1-2% सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

हरियाणा के हिसार में 1-2% सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
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निर्माण से पहले ही सड़कों की बदहाली

हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में बनाए जा रहे सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। यहां पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा के हलके के राजली से सुलखनी गांव तक बन रही नई सड़क 15 दिन के भीतर ही उखड़ गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था और पहले ही गड्ढे बन गए हैं।

घटिया सामग्री और स्तरहीन निर्माण का आरोप

गांव सुलखनी के निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता सलीम सुलखनी ने बताया कि सड़क बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा, “सड़क का न तो सही लेवल रखा गया और न ही गुणवत्ता का ध्यान दिया गया। ऐसे निर्माण से सड़के बनते ही खराब हो रही हैं।”

सड़क निर्माण की स्थिति पर वीडियो से हुआ खुलासा

राजली गांव के निवासी संदीप ने सड़क निर्माण की स्थिति पर एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में नई बन रही सड़क की खराब हालत दिखाई गई, जिसमें जगह-जगह गड्ढे नजर आए। संदीप ने बताया कि यह स्थिति धांसू से धिकताना तक बनी सड़क जैसी ही है।

आधा किलोमीटर सड़क का काम अभी बाकी

सड़क निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। लगभग आधा किलोमीटर हिस्सा अभी भी बनना बाकी है। बावजूद इसके, जो हिस्सा बन चुका है, उसकी हालत पहले ही खराब हो चुकी है।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर उठे सवाल

सलीम सुलखनी ने आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल छोटे कर्मचारियों की लापरवाही नहीं है, बल्कि इसमें उच्च अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल है। उन्होंने कहा, “उच्च अधिकारियों की सहमति के बिना इस तरह का घटिया काम संभव नहीं है। भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

मंत्री के क्षेत्र में ही निर्माण कार्य की यह हालत!

लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब खुद मंत्री के क्षेत्र में सड़कों की यह स्थिति है, तो बाकी क्षेत्रों में क्या हो रहा होगा। पीडब्ल्यूडी विभाग की छवि पर भी यह मामला सवाल खड़े कर रहा है।

विभाग का पेचवर्क पर ध्यान

विभाग ने स्थिति को सुधारने के लिए पेचवर्क शुरू कर दिया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पेचवर्क केवल अस्थायी समाधान है और सड़कों की गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

जिम्मेदारी तय करने की जरूरत

यह मामला न केवल सड़कों की खराब स्थिति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निर्माण कार्यों की निगरानी में कमी है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो।

सड़कों की स्थिति पर व्यापक जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सलीम सुलखनी ने कहा, “भ्रष्टाचार के कारण हमारे क्षेत्र का विकास रुक रहा है। यह सड़कें हमारी उम्मीदों का प्रतीक थीं, लेकिन निर्माण से पहले ही उनकी हालत खस्ता हो गई।”

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखना दीर्घकालिक नुकसान का कारण बनता है। इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का मानना है कि सही सामग्री और तकनीकों का इस्तेमाल न करने से सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं।

जनता के सवाल

  1. निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं है?
  2. घटिया सामग्री के उपयोग पर कौन जवाबदेह है?
  3. क्या ऐसे निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाली कोई स्वतंत्र समिति है?

निष्कर्ष

यह मामला न केवल घटिया सड़क निर्माण कार्य की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। ग्रामीणों ने अपनी उम्मीदें मंत्री और सरकार से जोड़ी थीं, लेकिन इस घटना ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।

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