पुणे पोर्शे हिट एंड रन मामला: आरोपी से 3 लाख रुपये बरामद

नाबालिग आरोपी की मां भी अरेस्ट, ब्लड सैंपल बदलने पर बेटे के सामने बैठाकर होगी पूछताछ
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पुणे में हुए पोर्शे हिट एंड रन मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस ने ब्लड सैंपल बदलने के आरोपी से 3 लाख रुपये बरामद किए हैं।

19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में रियल एस्टेट डेवलपर विशाल अग्रवाल के 17 साल के बेटे ने अपनी पोर्शे कार से दो बाइक सवार इंजीनियरों को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। यह घटना एक हिट एंड रन केस के रूप में सामने आई थी, और आरोपी को 14 घंटे बाद ही कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था।

ब्लड सैंपल बदलने का आरोप:

पोर्शे कार दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में ससून अस्पताल के सीएमओ श्रीहरि हरनोल, फॉरेंसिक लैब के एचओडी डॉ. अजय तवाड़े और अतुल घाटकांबले को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि नाबालिग के पिता ने डॉक्टर को ब्लड सैंपल बदलने के लिए लालच दिया था।

क्राइम ब्रांच की कार्यवाही:

क्राइम ब्रांच की टीम ने ससून अस्पताल के सीएमओ श्रीहरि हरनोल से पैसे लेने वाले अतुल घाटकांबले से 3 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं। 2.5 लाख रुपये घाटकांबले से तुरंत बरामद किए गए थे और बाद में सर्च ऑपरेशन के दौरान 50 हजार रुपये कैश में मिले।

पुलिस की सख्ती:

पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बताया कि आरोपी डॉक्टरों और नाबालिग के पिता को लश्कर पुलिस स्टेशन लाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में पाया गया कि नाबालिग ने शराब पी रखी थी और कार को अत्यधिक गति से चला रहा था।

पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज:

इस घटना से जुड़े दो पुलिसकर्मियों, येरवडा पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक राहुल जगदाले और एपीआई विश्वनाथ टोडकरी को लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। ये दोनों अफसर वारदात के बाद सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने समय पर सीनियर्स और कंट्रोल रूम को सूचित नहीं किया था।

आगे की कार्यवाही:

नाबालिग आरोपी इस समय सुधार गृह में है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। ब्लड सैंपल बदलने के मामले में शामिल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस जल्द ही और खुलासे कर सकती है।

यह मामला बताता है कि कैसे एक हिट एंड रन दुर्घटना में न केवल कानूनी प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाई जा सकती हैं, बल्कि इसमें शामिल लोगों की नैतिकता पर भी सवाल उठते हैं। पुलिस की त्वरित कार्यवाही और सख्त कदम इस मामले में न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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