NH-44 पर कोहरे का कहर: करनाल में दो जगह भिड़े 6 वाहन, 150 यात्रियों में मची चीख-पुकार

NH-44 पर कोहरे का कहर: करनाल में दो जगह भिड़े 6 वाहन, 150 यात्रियों में मची चीख-पुकार
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सुबह का समय, घना कोहरा और NH-44 हाईवे पर अचानक ब्रेक… एक पल की चूक से 150 यात्रियों की सांसें थम गईं।

NH-44 कोहरा हादसा करनाल: हाईवे पर थमी रफ्तार, यात्रियों की सांसें अटकीं

करनाल में रविवार तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर घने कोहरे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुबह करीब 4:30 से 5:00 बजे के बीच महज आधे घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग स्थानों पर छह वाहनों की टक्कर हो गई। इन हादसों में तीन वोल्वो बसें, एक स्कॉर्पियो, एक कैंटर और एक कैमिकल से भरा ट्रक शामिल रहा।

सबसे राहत की बात यह रही कि करीब 150 यात्री इन हादसों में बाल-बाल बच गए और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। लेकिन जिस तरह हाईवे पर चीख-पुकार मची, वह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था।

पहला हादसा: कोहरे में अचानक ब्रेक और बसों की टक्कर

पहला हादसा कर्ण लेक से आगे झिलमिल ढाबा के पास हुआ।
यहां चंडीगढ़ से दिल्ली की ओर जा रही स्कॉर्पियो कार के चालक ने अचानक घना कोहरा देख ब्रेक लगा दिए। दृश्यता इतनी कम थी कि पीछे से आ रही वोल्वो बस समय पर प्रतिक्रिया नहीं कर पाई और स्कॉर्पियो से जा टकराई।

टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले चालक और यात्री कुछ समझ पाते, तभी चंडीगढ़ की ओर से आ रही हिमाचल रोडवेज की बस और एक अन्य वोल्वो बस भी टकरा गईं

कुछ ही सेकेंड में तीन बसें और एक कार आपस में फंस गईं

झटके से खुली नींद, बसों में मची अफरा-तफरी

बसों में सवार अधिकांश यात्री उस समय गहरी नींद में थे।
यात्री अमित, सुरेंद्र और जयकुंवार बताते हैं—

“अचानक ऐसा झटका लगा जैसे बस किसी दीवार से टकरा गई हो। नींद खुलते ही चारों ओर चीख-पुकार थी। बाहर देखा तो तीन-तीन बसें टकराई हुई थीं।”

महिलाएं और बच्चे सहमे हुए थे। कई यात्री घबराकर बस से बाहर निकल आए।
कोहरे के कारण आसपास कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे डर और बढ़ गया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, यातायात बहाल

घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
थाना प्रभारी तरसेम चंद ने पुलिस टीम के साथ मिलकर क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया

करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद NH-44 पर यातायात बहाल किया गया
दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को दूसरी बसों में शिफ्ट कर रवाना किया गया

थाना प्रभारी तरसेम चंद ने बताया—

“सभी वाहनों में मिलाकर लगभग 150 यात्री सवार थे। सौभाग्य से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। कोहरे में वाहन चलाते समय विशेष सावधानी जरूरी है।”

दूसरा हादसा: कैमिकल से भरा ट्रक डिवाइडर पर चढ़ा

पहले हादसे के कुछ ही देर बाद सुबह करीब 5 बजे, दूसरा हादसा कर्ण लेक पुल के पास हुआ।

यहां सामने चल रहे कंटेनर चालक द्वारा अचानक ब्रेक लगाने से पीछे चल रहे कैंटर ने भी ब्रेक लगाए।
इसी दौरान पीछे से आ रहा कैमिकल से भरा ट्रक संतुलन खो बैठा और कैंटर से टकराते हुए डिवाइडर पर चढ़ गया

कैमिकल लीक का खतरा, पुलिस सतर्क

हादसे के बाद कुछ देर के लिए कैमिकल लीक होने की आशंका से अफरा-तफरी मच गई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई रिसाव नहीं हुआ

कैंटर चालक सुखबीर ने बताया—

“मैं लुधियाना से टायर लेकर कोलकाता जा रहा था। अचानक ब्रेक लगने से पीछे से ट्रक आकर टकरा गया।”

पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को हटवाकर स्थिति सामान्य कराई।

कोहरा बना काल, सवालों के घेरे में हाईवे सुरक्षा

इन दोनों हादसों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि
कोहरे के मौसम में NH-44 जैसे व्यस्त हाईवे पर सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • हाईवे पर फॉग सेंसर और चेतावनी बोर्ड पर्याप्त नहीं
  • भारी वाहनों की रफ्तार पर सख्त निगरानी की कमी
  • चालकों में लेन अनुशासन और सुरक्षित दूरी की अनदेखी

पुलिस की अपील: कोहरे में ऐसे चलाएं वाहन

सदर थाना पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है—

✔ कोहरे में फॉग लाइट का प्रयोग करें
✔ वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें
✔ अचानक ब्रेक लगाने से बचें
✔ तेज रफ्तार में वाहन न चलाएं
✔ थकान या नींद में ड्राइविंग न करें

निष्कर्ष (Editorial View)

यह हादसा भले ही बिना जनहानि के टल गया हो, लेकिन यह एक चेतावनी है—अगर समय रहते हाईवे सुरक्षा व्यवस्था और ड्राइविंग अनुशासन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली बार नतीजे गंभीर हो सकते हैं।

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