विधायक देवेंद्र हंस की 21 शिकायत: कैथल एसपी पर लगा फोन न उठाने का गंभीर आरोप

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विधायक ने उठाए एसपी की कार्यशैली पर सवाल

कैथल में कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस और एसपी राजेश कालिया के बीच तनाव सामने आया है। गुहला के विधायक देवेंद्र हंस ने विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि एसपी ने उनके फोन कॉल्स को अनदेखा किया। विधायक के अनुसार, उन्होंने एसपी को 2 और 3 जनवरी को 21 बार फोन किया, लेकिन न तो एसपी ने फोन उठाया और न ही बैक-कॉल किया। यह मामला अब विधानसभा की प्रोटोकॉल उल्लंघन कमेटी तक पहुंच गया है।

जनता की समस्याओं पर चर्चा करना चाह रहे थे विधायक

विधायक देवेंद्र हंस ने बताया कि उनका एसपी से संपर्क करने का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते नशे के मामलों पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि नशे का जाल क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है, जिससे युवा पीढ़ी का भविष्य खतरे में है। इसके अलावा, उन्हें क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए एसपी से मुलाकात करनी थी। हालांकि, एसपी द्वारा फोन न उठाने और बाद में बैक-कॉल न करने पर उन्हें यह मामला विधानसभा तक ले जाना पड़ा।

रीडर ने भी नहीं किया सहयोग

विधायक ने एसपी के रीडर पर भी असहयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रीडर से संपर्क करने पर उन्हें बताया गया कि एसपी कार्यालय में मौजूद हैं। बावजूद इसके, एसपी ने फोन नहीं उठाया। बाद में जब उन्होंने लैंडलाइन नंबर पर फोन किया, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि एसपी मीटिंग में व्यस्त हैं।

विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को दी लिखित शिकायत

इस मामले को लेकर विधायक ने मजबूर होकर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण को लिखित शिकायत दी। उन्होंने एसपी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी अधिकारी न केवल जनप्रतिनिधियों बल्कि आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में एसपी को फोन उठाना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला हुआ कमेटी में दर्ज

विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने विधायक देवेंद्र हंस की शिकायत को गंभीरता से लिया और इस मामले को विधानसभा की प्रोटोकॉल मानदंड उल्लंघन कमेटी के पास भेज दिया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

सीएमओ के निर्देशों की अनदेखी?

सीएमओ कार्यालय के निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अधिकारी किसी जनप्रतिनिधि का फोन न उठा पाएं तो तुरंत बैक-कॉल करें। इस निर्देश का पालन न करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक ने अपनी शिकायत में इसे प्रमुख मुद्दा बताया है और कहा कि इस तरह की अनदेखी आम जनता की भावनाओं का अपमान है।

क्षेत्र में नशे का बढ़ता प्रभाव

गुहला क्षेत्र में नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर विधायक ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि नशा युवाओं का भविष्य खराब कर रहा है और समाज में इसकी वजह से अपराध भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए उन्होंने एसपी से चर्चा करना चाहा, लेकिन अधिकारी का रवैया निराशाजनक था।

एसपी राजेश कालिया ने आरोपों को किया खारिज

इस मामले में एसपी राजेश कालिया ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय विधायक ने फोन किया होगा, संभवतः वे किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त रहे होंगे। एसपी ने यह भी कहा कि वे सभी जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का फोन उठाते हैं और उनकी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करते हैं।

विधायक ने कहा, अधिकारियों की हो रही है निरंकुशता

विधायक देवेंद्र हंस ने कहा कि अधिकारियों का यह रवैया निरंकुशता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम जनता की आवाज को दबाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। विधायक ने यह भी कहा कि यह उनकी मजबूरी थी कि उन्हें विधानसभा की हाई पावर कमेटी का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

विधानसभा अध्यक्ष की गंभीर चेतावनी

इस विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनप्रतिनिधियों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के उल्लंघन के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विधायक-एसपी विवाद: राजनीतिक माहौल गर्माया

विधायक और एसपी के इस विवाद ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर एसपी की आलोचना की है। वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सत्ता और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी के रूप में देख रहे हैं।

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आगे क्या हो सकता है?

यह मामला अब विधानसभा की प्रोटोकॉल उल्लंघन कमेटी के पास है। अगर जांच में एसपी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। वहीं, अगर विधायक के आरोप झूठे साबित होते हैं, तो यह कांग्रेस पार्टी के लिए राजनीतिक झटका हो सकता है।

निष्कर्ष

यह घटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच विश्वास और संवाद की कमी को उजागर करती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और समय पर कार्रवाई आवश्यक है ताकि प्रशासनिक तंत्र और जनता के प्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

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