हरियाणा के पवित्र नगरी कुरुक्षेत्र में हुए महायज्ञ कार्यक्रम में गोली चलने की घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। घटना न केवल सनसनीखेज थी, बल्कि इसके पीछे छुपी वजह और शामिल आरोपियों की कहानी भी बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस ने तीन दिन के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और तीसरे की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि गोलीकांड के पीछे क्या थी असली वजह? कौन हैं इसके मुख्य किरदार? कैसे हुआ पुलिस का ऑपरेशन और अब तक इस केस में क्या-क्या खुलासा हुआ?
महायज्ञ में अचानक गूंज उठी गोलियों की आवाज़
18 मार्च को कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में महायज्ञ का आयोजन चल रहा था। इस आयोजन में देशभर से साधु-संत और पंडित जुटे थे। यज्ञ के दौरान ही अचानक स्वामी हरिओम की कुटिया के बाहर विवाद शुरू हो गया।
पंडितों का एक समूह भोजन को लेकर नाराज था। आरोप था कि सैनी धर्मशाला में परोसी गई खिचड़ी बासी और खराब थी। शिकायत करने जब पंडित स्वामी से मिलने पहुंचे, तभी वहां पहले से मौजूद तीन युवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं।
गोली लगने से घायल हुए लखनऊ के पंडित आशीष तिवारी
इस गोलीकांड में लखनऊ से आए पंडित आशीष तिवारी गोली लगने से घायल हो गए। गोली उनकी जांघ पर लगी और तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे यज्ञ स्थल पर भगदड़ मच गई। पुलिस को तुरंत सूचना दी गई और मामला दर्ज कर लिया गया।
फरार हो गए तीनों आरोपी, दिल्ली में छुपे
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी रोबिन, जयदीप और देवेंद्र तुरंत दिल्ली भाग गए। तीनों ने एक दिन दिल्ली में छिपने के बाद अलग-अलग रास्ता पकड़ लिया ताकि पुलिस से बच सकें।
पुलिस ने दिल्ली से लेकर सोनीपत, रोहतक और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दी। लगातार छापेमारी के बाद आखिरकार दो आरोपियों को पकड़ लिया गया है।
पहले गिरफ्त में आया देवेंद्र, 45 बोर की पिस्टल बरामद
पुलिस ने ऑपरेशन तेज करते हुए सबसे पहले रोहतक के हमायुपुर गांव से देवेंद्र को गिरफ्तार किया। देवेंद्र त्रिपुरा राइफल में सेवाएं दे चुका है और कुछ समय से रोबिन के साथ बतौर सहयोगी काम कर रहा था। देवेंद्र से पूछताछ में पुलिस को 45 बोर की पिस्टल भी बरामद हुई, जो वारदात में इस्तेमाल हुई थी।
दूसरे आरोपी जयदीप को भी दबोचा, 30 बोर की पिस्टल मिली
तीन दिन के भीतर ही पुलिस ने सोनीपत के गांव कासंडी से दूसरे आरोपी जयदीप को भी गिरफ्तार कर लिया। जयदीप के पास से 30 बोर की पिस्टल बरामद हुई, जिससे गोली चलाई गई थी।
जयदीप लंबे समय से रोबिन के साथ जुड़ा था और पिछले 5-6 महीने से अंगरक्षक की भूमिका निभा रहा था। पुलिस ने जयदीप को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
तीसरे आरोपी रोबिन की तलाश जारी, पूर्व में दिल्ली पुलिस में था कांस्टेबल
तीसरा और मुख्य आरोपी रोबिन सोनीपत के गांव सामड़ी का रहने वाला है। रोबिन पूर्व में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल था लेकिन पेपर लीक मामले में बर्खास्त कर दिया गया था। घटना के बाद से ही रोबिन फरार है और पुलिस की टीमें उसे पकड़ने के लिए कई जगह दबिश दे रही हैं।
आखिर क्यों चलाई गई थी गोली? सामने आई असली वजह
पूछताछ में देवेंद्र और जयदीप ने जो खुलासा किया वह हैरान करने वाला है। दोनों ने बताया कि उन्होंने रोबिन के आदेश पर ही गोली चलाई थी। दरअसल, महायज्ञ में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी रोबिन को दी गई थी।
पंडित स्वामी हरिओम से खराब भोजन की शिकायत करने जा रहे थे। रोबिन को डर था कि यदि शिकायत हो गई तो स्वामी हरिओम के सामने उसकी व्यवस्था की पोल खुल जाएगी। इसी डर से रोबिन ने अपने साथियों से पंडितों को रोकने को कहा।
जब पंडित नहीं माने और धक्का-मुक्की करने लगे तो रोबिन ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। पहले हवा में फायर किया गया लेकिन पंडितों के और भड़कने पर सीधा फायर किया गया। इसी दौरान पंडित आशीष तिवारी घायल हो गए।
आरोपियों का अपराध में पुराना अनुभव
जांच में सामने आया कि देवेंद्र और जयदीप दोनों ही रोबिन के भरोसेमंद सहयोगी थे।
- देवेंद्र पहले त्रिपुरा राइफल में रह चुका है।
- जयदीप पिछले कई वर्षों से रोबिन का साथ दे रहा था और हाल ही में अंगरक्षक के तौर पर कार्य कर रहा था।
इससे साफ है कि दोनों आरोपी हथियार चलाने में भी प्रशिक्षित थे और रोबिन के इशारों पर काम करते थे।
पुलिस का तेज एक्शन और आगे की रणनीति
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम गठित की जिसमें सीआईए-2 इंचार्ज मोहन लाल को लीड दी गई। टीम ने 72 घंटे के भीतर दो आरोपियों को काबू कर लिया।
पुलिस अब तीसरे आरोपी रोबिन की गिरफ्तारी पर पूरा फोकस कर रही है। सीआईए टीमें लगातार सोनीपत, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही हैं। पुलिस को विश्वास है कि जल्द ही रोबिन भी गिरफ्त में होगा।
धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुरुक्षेत्र जैसे धार्मिक स्थल पर महायज्ञ जैसे बड़े आयोजन में गोली चल जाना अपने आप में गंभीर मामला है।
सवाल यह भी है कि जिन आरोपियों ने पंडितों पर फायरिंग की, वे इतनी आसानी से कैसे आयोजन स्थल तक हथियार लेकर पहुंचे? क्या आयोजकों और सुरक्षा एजेंसियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया?
अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा
| आरोपी का नाम | संबंध | गिरफ्तारी | बरामदगी | भूमिका |
|---|---|---|---|---|
| देवेंद्र | हमायुपुर, रोहतक | गिरफ्तार | 45 बोर पिस्टल | फायरिंग में शामिल |
| जयदीप | कासंडी, सोनीपत | गिरफ्तार | 30 बोर पिस्टल | फायरिंग में शामिल |
| रोबिन | सामड़ी, सोनीपत | फरार | – | मास्टरमाइंड, पूर्व पुलिसकर्मी |
पीड़ित पक्ष और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पीड़ित पंडित आशीष तिवारी का कहना है कि यह हमला सोची-समझी साजिश के तहत हुआ है। महायज्ञ जैसे पुण्य कार्य में इस तरह का कृत्य क्षमा योग्य नहीं है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि तीसरे आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
कुरुक्षेत्र महायज्ञ गोलीकांड ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। पुलिस की सक्रियता से दो आरोपी पकड़ लिए गए हैं और तीसरे की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में आगे और क्या-क्या खुलासे होते हैं और रोबिन की गिरफ्तारी के बाद क्या इस साजिश की और भी परतें खुलती हैं?
