हरियाणा की मंडियों में किसानों की मेहनत पर फिरा पानी : लापरवाही, बारिश और तेज हवाओं ने फसल की उम्मीदों को किया धूमिल

हरियाणा की मंडियों में किसानों की मेहनत पर फिरा पानी : लापरवाही, बारिश और तेज हवाओं ने फसल की उम्मीदों को किया धूमिल
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लेखक : संजय शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार, 20 वर्षों का अनुभव

चंडीगढ़ – हरियाणा के किसान एक बार फिर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहे हैं। मौसम विभाग द्वारा पहले से चेतावनी दिए जाने के बावजूद राज्य की 11 मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी गेहूं की फसलें तेज बारिश और आंधी की भेंट चढ़ गईं। इससे न सिर्फ फसल को भारी नुकसान हुआ, बल्कि मंडी व्यवस्था की हकीकत भी उजागर हो गई।

11 जिलों में बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता

शुक्रवार की शाम को हरियाणा के रोहतक, जींद, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, यमुनानगर, फरीदाबाद, हिसार और पानीपत में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मंडियों में खुले में रखा गेहूं पूरी तरह से भीग गया, जिससे लाखों क्विंटल अनाज खराब होने की कगार पर पहुंच गया।

जहां एक ओर किसान मौसम विभाग की चेतावनी के बाद फसल को बचाने के प्रयास में जुटे थे, वहीं प्रशासन की ओर से तिरपाल और शेड की व्यवस्था न के बराबर थी। जींद, रोहतक और करनाल जैसी मंडियों में तिरपाल कम पड़ने से किसानों ने चादरों और प्लास्टिक की थैलियों से फसल को ढकने की कोशिश की।

तिरपालों की कमी, उठान में देरी और प्रशासन की सुस्ती

करनाल के मुनक मंडी में सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदी गई फसल भी उठान में देरी के चलते बारिश में भीग गई। अंबाला के सम्भालखा और मुलाना गांवों में तो ओलावृष्टि ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी। कैथल में खुले में रखे गए ढाई लाख से अधिक गेहूं के बोरे भीग गए, जिससे फसल की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ा है।

मंडी में पहले ही अटकी थी उठान प्रक्रिया

राज्य की 417 मंडियों में अब तक केवल 25.59 % गेहूं की उठान हो पाई है। सरकार द्वारा खरीदी गई 37.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं में से महज 11 लाख मीट्रिक टन ही मंडियों से उठाया जा सका है। शुक्रवार रात तक मंडियों में कुल 44.37 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका था।

मंत्री का बयान : उठान तेज करेंगे

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा है कि उठान प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फसल की उठान में कोई देरी न हो और किसानों को किसी प्रकार की समस्या न झेलनी पड़े।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

सिरसा से सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति केवल दिखावा कर रही है। मंडियों में न तो शेड की व्यवस्था है और न ही तिरपालों की। गेहूं की आधी आवक के बावजूद मंडियां फसलों से भरी पड़ी हैं, और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

हिसार में अंधड़ और आग ने मचाई तबाही

हिसार में शुक्रवार शाम तेज अंधड़ के कारण बिजली के खंभे टूटे, तार गिर गए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। जिले के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 100 एकड़ में गेहूं की फसल और फाने जलकर राख हो गए। बालसमंद में तापमान 43.7 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन शाम 7 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ली और तेज धूल भरी आंधी ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया।

दमकल विभाग की मुस्तैदी, ग्रामीणों की मदद से काबू पाई गई आग

जिले के मय्यड़, मिर्जापुर, खारिया, अग्रोहा और सरसौद गांवों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं। गांव सीसवाला में 30 एकड़ में गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई। ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों और टैंकरों से आग बुझाने का प्रयास किया। आदमपुर और माजरा प्याऊ गांवों में भी 5 से 6 एकड़ तक फसलें जल गईं।

बिजली सप्लाई ठप, टीमें जुटी सुधार कार्य में

तेज आंधी के कारण बिजली के पोल व तार टूटने से कई गांवों में बिजली सप्लाई बाधित हो गई। बिजली निगम की टीमें रातभर हालात सुधारने में लगी रहीं। निगम के एसई ओमबीर ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

सरसों की खरीद में गति, लेकिन गेहूं संकट में

सरकार के मुताबिक अब तक 2 लाख से अधिक किसानों से 37.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके अलावा सरसों की खरीद भी जारी है। 16 अप्रैल तक 4.93 लाख मीट्रिक टन सरसों की खरीद हो चुकी है, जिनमें से 3.40 लाख मिट्रिक टन का उठान हो गया है।

निष्कर्ष : किसान त्रस्त, सरकार पर सवाल

हरियाणा के किसानों को इस समय दोहरी मार झेलनी पड़ रही है — एक तरफ मौसम की मार, दूसरी ओर प्रशासन की लापरवाही। बार-बार चेतावनी के बावजूद मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था न किया जाना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है और उनकी कमाई खतरे में है।

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