कुंजपुरा: पोल्ट्री फीड कंपनी में 80 लाख रुपये का गबन, दो कर्मचारियों पर मामला दर्ज

कुंजपुरा: पोल्ट्री फीड कंपनी में 80 लाख रुपये का गबन, दो कर्मचारियों पर मामला दर्ज
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संजय शर्मा,करनाल। जिले के कुंजपुरा थाना क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। क्यू एसए इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नामक पोल्ट्री फीड बनाने वाली कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों ने कंपनी से 80.31 लाख रुपये का गबन किया है। इस मामले में पुलिस ने नितिन शर्मा और सचिन को मुख्य आरोपी बनाते हुए अन्य संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।Flash

कैसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा?

पोल्ट्री फीड कंपनी में कार्यरत जसविंद्र (बीर बड़ालवा) और जितेश (मारवा खुर्द) ने कुंजपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि नितिन शर्मा वर्ष 2018 से पोल्ट्री फीड कंपनी में कार्यरत था और पिछले दो वर्षों से परचेज एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रहा था।

अगस्त 2023 में नितिन पर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। जांच के दौरान नितिन ने अपनी गलती मान ली और कंपनी से यह वादा किया कि वह हर महीने अपनी तनख्वाह से 10 हजार रुपये लौटाकर 7 लाख रुपये की भरपाई करेगा। इसी वादे के आधार पर पोल्ट्री फीड कंपनी ने उसे दोबारा नौकरी पर रख लिया।

फर्जी गाड़ियों के जरिए लाखों का गबन

धोखाधड़ी की जांच आगे बढ़ी तो एक और बड़ा खुलासा हुआ। कंपनी के रिकॉर्ड में 10 गाड़ियां मक्के की सप्लाई के लिए दिखाई गई थीं, जिनमें से 9 गाड़ियां कभी कंपनी पहुंची ही नहीं।

  • इन गाड़ियों की फर्जी एंट्री कर 80 लाख 31 हजार 236 रुपये की पेमेंट भी कर दी गई थी।
  • जब नितिन से पूछताछ की गई, तो उसने सचिन सहित अन्य कर्मचारियों के नाम बताए, जिन्होंने मिलकर यह सारा गबन किया।

कुल गबन की राशि 95 लाख रुपये

जांच के बाद यह पता चला कि नितिन और अन्य कर्मचारियों ने मिलकर पोल्ट्री फीड कंपनी के लगभग 95 लाख रुपये का गबन किया है। मामले का खुलासा होने के बाद कंपनी ने नितिन और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी।

पंचायत में आरोपी ने कबूला गुनाह

इस वित्तीय घोटाले के खुलासे के बाद नितिन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। कंपनी के प्रबंधन के सामने हुई पंचायत में नितिन ने यह माना कि उसने कंपनी से चोरी की है और वह जल्द ही रुपये वापस कर देगा।

  • इस दौरान सचिन ने कंपनी को 5 लाख रुपये नकद और 5 लाख रुपये का चेक दिया।
  • इसके अलावा कुछ और राशि भी कंपनी को लौटा दी गई है।

फिर भी बाकी है 80 लाख रुपये

हालांकि, पोल्ट्री फीड कंपनी के खाते में अभी तक पूरी राशि वापस नहीं आई है। मुख्य आरोपी नितिन और उसके साथी 80.31 लाख रुपये की बड़ी राशि वापस करने में असफल रहे हैं। इसके चलते कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि वह कानूनी कार्रवाई को रोक दें।Flash

पुलिस ने दर्ज किया मामला

कुंजपुरा थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों नितिन और सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब अन्य संदिग्ध कर्मचारियों की तलाश में जुट गई है जो इस गबन में शामिल हो सकते हैं।

फर्जीवाड़े का तरीका: फर्जी एंट्री और पेमेंट

यह पूरा मामला पोल्ट्री फीड कंपनी के सप्लाई चेन में फर्जीवाड़े से जुड़ा है। नितिन शर्मा ने कंपनी के रिकॉर्ड में फर्जी गाड़ियों की एंट्री कराकर उन्हें मक्के की सप्लाई के लिए दिखाया। इसके बाद इन गाड़ियों की पेमेंट करवा ली गई, जबकि गाड़ियां कभी कंपनी पहुंची ही नहीं।

मैनेजिंग डायरेक्टर पर दबाव

इस गबन का खुलासा होने के बाद आरोपी लगातार कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पर दबाव डाल रहे हैं ताकि मामला सुलझाने के लिए कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए। हालांकि, कंपनी के प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पूरी कानूनी कार्रवाई करेंगे और गबन की गई पूरी राशि वसूल करेंगे।

धोखाधड़ी से कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान

यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि इससे कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। पोल्ट्री फीड जैसे व्यवसाय में मक्के की सप्लाई महत्वपूर्ण होती है। इस घोटाले के कारण कंपनी को सप्लाई चैन में भी बाधा आई है, जिससे उसका उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

पुलिस की अगली कार्रवाई

कुंजपुरा थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस अन्य संदिग्ध कर्मचारियों की तलाश कर रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
“हम मामले की गहन जांच कर रहे हैं। कंपनी से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और फर्जीवाड़ा तो नहीं हुआ है।”

निष्कर्ष

क्यू एसए इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में हुआ यह गबन करनाल के औद्योगिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना न केवल कंपनी की वित्तीय सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह से आंतरिक कर्मचारी मिलकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर सकते हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की कार्रवाई कितनी तेजी से होती है और क्या कंपनी अपनी गबन की गई राशि वापस पाने में सफल होती है या नहीं।

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