करनाल में बन रहा 128 करोड़ का टी-फ्लाईओवर अब अंतिम चरण में है, लेकिन सर्विस लेन बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण और पेड़ों-बिजली के खंभों को हटाने की तैयारी ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
करनाल में टी-फ्लाईओवर के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी, सर्विस लेन बनाने को स्कूल मैदान की जमीन ली जाएगी
करनाल शहर में बन रहे करनाल टी-फ्लाईओवर परियोजना का निर्माण तेजी से जारी है और इसे स्मार्ट सिटी की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य इसी वर्ष दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए। हालांकि निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ-साथ अब कुछ नई व्यवस्थाएं भी सामने आई हैं। पुल के आसपास यातायात को सुचारु बनाने और सर्विस लेन तैयार करने के लिए प्रशासन को कुछ जगहों पर जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा।
शहर के रेलवे रोड स्थित मछली मार्केट क्षेत्र में जगह कम होने के कारण पुल बनने के बाद सर्विस लेन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं रहेगा। इसी वजह से प्रशासन ने योजना बनाई है कि यहां आसपास की जमीन का अधिग्रहण कर रास्ते की चौड़ाई बढ़ाई जाए। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि पुल बनने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हो सके और वाहनों की आवाजाही में किसी तरह की परेशानी न आए।
प्रशासन ने किया निर्माण स्थल का निरीक्षण
मंगलवार को जिला प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया। इस दौरान उत्तम सिंह ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों के साथ निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां कहीं भी निर्माण कार्य में बाधाएं आ रही हैं, उन्हें तुरंत दूर किया जाए।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कहा कि पुल के निर्माण में यदि कहीं पेड़, बिजली के खंभे या अन्य ढांचागत बाधाएं सामने आ रही हैं तो संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर उन्हें जल्द से जल्द हटाया जाए। प्रशासन का उद्देश्य है कि परियोजना समय पर पूरी हो और शहर को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
स्कूल के मैदान की जमीन ली जाएगी
पुराना बस अड्डे के पीछे एलिवेटेड पुल के एक तरफ के रास्ते की चौड़ाई कम है। ऐसे में प्रशासन ने निर्णय लिया है कि रास्ते को चौड़ा करने के लिए पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान से कुछ जमीन ली जाएगी। इसके लिए जल्द ही सर्वे कराया जाएगा ताकि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
अधिकारियों के अनुसार सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का उद्देश्य यह है कि पुल से उतरने वाले वाहनों को पर्याप्त जगह मिल सके और किसी प्रकार का ट्रैफिक जाम न लगे। यदि सड़क संकरी रहती है तो फ्लाईओवर बनने के बाद भी यातायात की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
सेक्टर-14 में फुटपाथ की चौड़ाई होगी कम
टी-फ्लाईओवर के निर्माण से जुड़े बदलाव केवल रेलवे रोड तक सीमित नहीं हैं। सेक्टर-14 क्षेत्र में भी कुछ बदलाव किए जाएंगे। यहां राणा अकादमी के पास फुटपाथ की चौड़ाई कम की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि पुल के ढलान वाले हिस्से के कारण यहां सड़क के दोनों ओर पर्याप्त जगह बनाए रखना आवश्यक है। ऐसे में फुटपाथ को थोड़ा कम कर सड़क को चौड़ा किया जाएगा ताकि वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा न आए।
कई पेड़ और ट्रांसफार्मर भी होंगे शिफ्ट
निर्माण कार्य के दौरान सामने आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए कई पेड़ों को भी हटाया जाएगा। सेक्टर-14 के इलाके में जहां फुटपाथ की चौड़ाई कम की जाएगी, वहां कुछ पेड़ों को भी हटाने की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा रेलवे रोड पर पुल के पिलरों के पास लगे बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मरों को भी शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इस काम को प्राथमिकता से पूरा करें ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो।
पुराना बस अड्डे के पास सड़क चौड़ी होगी
पुल के ढलान यानी स्लोप का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पुराना बस अड्डे के पास साइड के रास्ते की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इस इलाके में पहले से ही ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक रहता है। इसलिए प्रशासन चाहता है कि फ्लाईओवर बनने के बाद यहां यातायात पूरी तरह व्यवस्थित रहे।
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का भी मानना है कि यदि सड़क चौड़ी की जाती है तो इससे जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
128 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लाईओवर
करनाल का यह टी-फ्लाईओवर शहर की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत इसका निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 128 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार इस फ्लाईओवर के निर्माण का मुख्य उद्देश्य शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना है। खासकर घंटाघर चौक, रेलवे रोड और पुराना बस अड्डा क्षेत्र में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा
प्रशासन के अनुसार इस परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब केवल करीब 30 प्रतिशत काम बाकी है, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण कार्य की शुरुआत 27 जनवरी 2025 को की गई थी। तब से लेकर अब तक लगातार काम जारी है और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
फ्लाईओवर की लंबाई और संरचना
टी-फ्लाईओवर की कुल लंबाई 3.280 किलोमीटर है। इसे शहर के दो प्रमुख हिस्सों को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है।
- घंटाघर चौक से पुराना बस अड्डा तक पुल की लंबाई करीब 900 मीटर है।
- राणा अकादमी से जिला पुस्तकालय तक इसका हिस्सा लगभग 2.380 किलोमीटर लंबा होगा।
पूरे पुल को मजबूती देने के लिए कुल 85 पिलर खड़े किए गए हैं। इंजीनियरों का कहना है कि यह संरचना शहर के ट्रैफिक दबाव को लंबे समय तक संभालने में सक्षम होगी।
शहर के ट्रैफिक को मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों के अनुसार टी-फ्लाईओवर के बनने के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। अभी घंटाघर चौक और रेलवे रोड पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
फ्लाईओवर बनने के बाद लंबी दूरी के वाहन सीधे ऊपर से गुजर सकेंगे, जबकि स्थानीय ट्रैफिक नीचे की सड़कों से चलेगा। इससे यातायात का संतुलन बेहतर होगा।
व्यापार और शहर के विकास को मिलेगा फायदा
फ्लाईओवर बनने से केवल ट्रैफिक व्यवस्था ही बेहतर नहीं होगी, बल्कि शहर के व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। रेलवे रोड, बस अड्डा और आसपास के बाजारों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
बेहतर सड़क व्यवस्था से लोगों की आवाजाही आसान होगी, जिससे बाजारों में ग्राहकों की संख्या भी बढ़ सकती है।
नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया इस परियोजना को लेकर मिश्रित है। कुछ लोग इसे शहर के विकास के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ लोगों को पेड़ों के हटने और जमीन अधिग्रहण को लेकर चिंता भी है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संतुलन को भी ध्यान में रखा जाएगा और जहां संभव होगा वहां नए पेड़ लगाए जाएंगे।
समय पर पूरा करना प्रशासन की प्राथमिकता
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य की गति को बनाए रखा जाए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। उनका कहना है कि यदि सभी विभाग मिलकर काम करेंगे तो परियोजना तय समय सीमा में पूरी हो सकेगी।
प्रशासन का लक्ष्य है कि दिसंबर तक टी-फ्लाईओवर पूरी तरह तैयार होकर जनता के लिए खोल दिया जाए।
भविष्य में बदल सकती है शहर की तस्वीर
विशेषज्ञ मानते हैं कि करनाल में बन रहा यह फ्लाईओवर आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। यह परियोजना केवल एक पुल नहीं बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रतीक भी है।
यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो आने वाले समय में करनाल को ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी राहत मिल सकती है।
