घरेलू गैस सिलेंडर खपत आधी: सख्ती से कम हुई डिलिवरी, एजेंसियों में स्टॉक फुल

घरेलू गैस सिलेंडर खपत आधी: सख्ती से कम हुई डिलिवरी, एजेंसियों में स्टॉक फुल
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क्या आने वाले दिनों में गैस की कमी होने वाली है? या सरकार की नई सख्ती ने हालात को संभाल लिया है? करनाल में घरेलू गैस सिलेंडर की खपत अचानक आधी क्यों हो गई — और उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?

सख्ती से आधी हुई घरेलू गैस सिलेंडरों की खपत, एजेंसियों में अभी स्टॉक फुल

करनाल। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और संभावित ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर खपत को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। इन कदमों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। करनाल जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों की खपत लगभग आधी रह गई है। पहले जहां एक गैस एजेंसी से रोजाना करीब 650 सिलेंडर की डिलिवरी होती थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 350 के आसपास रह गई है।

हालांकि राहत की बात यह है कि जिले की अधिकांश गैस एजेंसियों में फिलहाल सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। गैस एजेंसी संचालकों और अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि उपभोक्ता की बुकिंग ऑनलाइन स्वीकार हो रही है, तो उन्हें सिलेंडर की आपूर्ति भी तय समय पर मिल जाएगी।

सरकार की ओर से लागू किए गए नए नियम के तहत अब किसी भी उपभोक्ता को पिछले सिलेंडर की डिलिवरी के 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक करने की अनुमति दी जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा न करें और बाजार में कृत्रिम कमी न पैदा हो।

युद्ध का असर और सरकार की सतर्कता

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की सप्लाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एलपीजी वितरण व्यवस्था में कुछ नियंत्रणात्मक कदम लागू किए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे कदम नहीं उठाए जाते तो कई क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की कृत्रिम कमी पैदा हो सकती थी। कई बार लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर लेते हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।

सरकार की नई नीति इसी संभावना को रोकने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

करनाल में आधी रह गई खपत

करनाल शहर और आसपास के क्षेत्रों में इस नई व्यवस्था का असर साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में करनाल की इंडेन गैस एजेंसियों से रोजाना लगभग 2500 से 2800 घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति होती थी।

लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह संख्या घटकर 1500 से 1800 सिलेंडर प्रतिदिन तक रह गई है।

गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार यह गिरावट किसी गैस की कमी के कारण नहीं बल्कि नई बुकिंग प्रणाली की वजह से हुई है। चूंकि उपभोक्ता 25 दिन से पहले नया सिलेंडर बुक नहीं कर सकते, इसलिए बुकिंग की संख्या स्वतः कम हो गई है।

डीएसी कोड के बिना नहीं मिल रहा सिलेंडर

अब एलपीजी वितरण प्रणाली में डीएसी यानी डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड को अनिवार्य कर दिया गया है। यह कोड उपभोक्ता के मोबाइल फोन पर भेजा जाता है और उसी को दिखाने के बाद सिलेंडर की डिलीवरी होती है।

गैस एजेंसियों के मुताबिक:

  • उपभोक्ता जब ऑनलाइन बुकिंग करता है, तब उसे एक डीएसी कोड मिलता है।
  • डिलिवरी के समय यह कोड डिलीवरी बॉय या एजेंसी को बताना होता है।
  • कोड सही होने पर ही सिलेंडर जारी किया जाता है।

इस व्यवस्था से गैस वितरण में पारदर्शिता भी बढ़ी है और फर्जी डिलीवरी की संभावना भी कम हुई है।

एजेंसियों में पर्याप्त स्टॉक

गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि फिलहाल सिलेंडरों की सप्लाई में कोई कमी नहीं है। गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कंपनियों की ओर से नियमित आपूर्ति जारी है।

इसलिए उपभोक्ताओं को घबराने या जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा करने की जरूरत नहीं है। एजेंसियों के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में हर पात्र उपभोक्ता को समय पर सिलेंडर मिल रहा है।

25 दिन की शर्त से रुकी अतिरिक्त बुकिंग

एलपीजी फेडरेशन के सदस्य सुभाष गर्ग के अनुसार 25 दिन की नई शर्त लागू होने से बुकिंग की संख्या नियंत्रित हो गई है।

उनका कहना है कि यदि यह नियम लागू नहीं किया जाता तो वर्तमान स्थिति में लोग भविष्य की आशंका को देखते हुए ज्यादा सिलेंडर बुक करना शुरू कर देते। इससे कृत्रिम कमी पैदा हो सकती थी।

उन्होंने बताया कि कई बार देखा गया है कि कुछ लोग घर में दो-तीन अतिरिक्त सिलेंडर जमा कर लेते हैं, जिससे जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता।

जरूरतमंद को मिल रहा सिलेंडर

नीलोखेड़ी की एक गैस एजेंसी के संचालक कर्ण ने बताया कि उनके यहां रोजाना लगभग 550 सिलेंडरों की मांग रहती है और कंपनी की ओर से उतनी ही सप्लाई भी आ रही है।

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के बाद बुकिंग केवल उन्हीं उपभोक्ताओं की हो रही है जिनके पिछले सिलेंडर की डिलिवरी को 25 दिन पूरे हो चुके हैं। ऐसे में जिनकी बुकिंग स्वीकार हो रही है, उन्हें सिलेंडर देने से किसी को मना नहीं किया जा रहा।

केंद्र स्तर से जारी हो रहा कोड

इंद्री की जीत गैस एजेंसी के संचालक जसपाल बैरागी के अनुसार डीएसी कोड पूरी तरह से केंद्रीय प्रणाली से जारी होता है। इसमें स्थानीय एजेंसियों की कोई भूमिका नहीं होती।

उन्होंने बताया कि पहले उनकी एजेंसी से प्रतिदिन लगभग 650 सिलेंडर की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब कोड कम आने के कारण यह संख्या घटकर 350 सिलेंडर प्रतिदिन रह गई है।

जैसे ही उपभोक्ता को पोर्टल से कोड जारी होता है, एजेंसी तुरंत सिलेंडर उपलब्ध करवा देती है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश

गैस एजेंसी संचालकों और अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की अफवाहों से बचना चाहिए।

यदि उपभोक्ता की बुकिंग स्वीकार हो रही है तो उन्हें निश्चित रूप से सिलेंडर मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था केवल वितरण को संतुलित करने के लिए लागू की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भविष्य में संभावित ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है।

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