कोहंड ओवरब्रिज: पांच साल का इंतजार खत्म, अब दो महीने में मिलेगा सुगम सफर का तोहफा

पांच साल का इंतजार खत्म, अब दो महीने में मिलेगा सुगम सफर का तोहफा
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पांच साल तक धूल और अधूरे खंभों के बीच जीने वाले कोहंड के लोग अब आखिरकार राहत की सांस लेने वाले हैं।

कोहंड ओवरब्रिज: पांच साल का इंतजार, अब दो महीने में पूरा होने का दावा

घरौंडा क्षेत्र के लोगों के लिए कोहंड ओवरब्रिज अब केवल एक अधूरी संरचना नहीं, बल्कि उम्मीद और राहत का प्रतीक बनता जा रहा है। करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद इस महत्वपूर्ण रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य फिर से रफ्तार पकड़ चुका है और दावा किया जा रहा है कि अगले दो महीनों में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा

कोहंड ओवरब्रिज के बनते ही कोहंड से गांजबड़-बड़ौली की ओर जाने वाले हजारों वाहन चालकों को अब वैकल्पिक और लंबे रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह ओवरब्रिज न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका को भी काफी हद तक कम करेगा।

रेलवे प्रक्रिया और कोरोना ने बढ़ाया इंतजार

कोहंड ओवरब्रिज परियोजना की शुरुआत बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ हुई थी, लेकिन रेलवे से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं, स्वीकृतियों में देरी और फिर कोरोना महामारी ने इस काम को लगभग ठप कर दिया।
लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की कमी, सामग्री की आपूर्ति बाधित होना और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते यह परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।

ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक पुल नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सवाल था—स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल पहुंचने वाले मरीज, किसान और व्यापारी सभी इस देरी से प्रभावित होते रहे।

51 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना

कोहंड ओवरब्रिज परियोजना की कुल लागत करीब 51 करोड़ रुपये है।

  • पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) द्वारा अपने हिस्से में करीब 37 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
  • वहीं रेलवे विभाग द्वारा रेलवे लाइन के ऊपर बनने वाले हिस्से पर 14 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।

यह आंकड़े बताते हैं कि यह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना है।

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ने किया निरीक्षण

मंगलवार को हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण स्वयं गांव कोहंड पहुंचे और निर्माणाधीन ओवरब्रिज का मौके पर जाकर बारीकी से निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि—

“काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता ने बहुत इंतजार किया है, अब उन्हें जल्द राहत मिलनी चाहिए।”

अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि रेलवे की ओर से बचे हुए कार्य को अगले दो महीनों में पूरा कर लिया जाएगा

गांव के दोनों ओर बसासत, इसलिए जरूरी था अंडरपास

कोहंड गांव की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को और संवेदनशील बनाती है। रेलवे लाइन के दोनों ओर गांव की बसासत होने के कारण यदि केवल ओवरब्रिज बनाया जाता, तो गांव दो हिस्सों में बंट जाता

इसी समस्या को देखते हुए पुल की मंजूरी के समय ही अंडरपास का प्रावधान कराया गया, ताकि पैदल यात्री, दोपहिया वाहन और स्थानीय ग्रामीण सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकें।

यह निर्णय ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक अहम कदम माना जा रहा है।

डिजाइन बदलने में हुई देरी बनी बड़ा कारण

अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने खुद स्वीकार किया कि परियोजना में देरी का एक बड़ा कारण पुल के डिजाइन में बदलाव भी रहा।
पुराने डिजाइन में कोहंड से गांजबड़-बड़ौली की ओर मुड़ने वाले वाहनों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। तीखे मोड़ और सीमित जगह के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर पुल के डिजाइन को बदला गया, जिसके लिए सरकार से विशेष मंजूरी लेनी पड़ी।
हालांकि इस प्रक्रिया में समय लगा, लेकिन बदला हुआ डिजाइन अब लंबी अवधि में ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी साबित होगा।

स्थानीय लोगों में खुशी और उम्मीद

पिछले कई वर्षों से अधूरे पड़े इस ओवरब्रिज को देखकर लोगों में निराशा घर कर चुकी थी।
लेकिन अब जब निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, तो गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है।

स्थानीय दुकानदारों, किसानों और छात्रों का कहना है कि ओवरब्रिज के बन जाने से—

  • बाजार तक पहुंच आसान होगी
  • एम्बुलेंस और आपात सेवाएं तेजी से पहुंच सकेंगी
  • ईंधन और समय दोनों की बचत होगी

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

कोहंड ओवरब्रिज केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है। इसके पूरा होते ही—

  • जमीनों के दाम बढ़ने की संभावना
  • नए व्यवसायिक अवसर
  • औद्योगिक और कृषि परिवहन में तेजी

जैसे कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। यह ओवरब्रिज घरौंडा क्षेत्र के आर्थिक विकास का प्रवेश द्वार भी बन सकता है।

अब नजरें तय समयसीमा पर

हालांकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से दो महीने में काम पूरा होने का भरोसा दिया गया है, लेकिन जनता की नजरें अब समयसीमा के पालन पर टिकी हैं।
पिछले अनुभवों को देखते हुए लोग चाहते हैं कि इस बार घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे।

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