डेयरियों को शिफ्ट नहीं किया तो रद्द होगा प्लॉट: 22 साल से लटकी योजना पर अब नगर निगम की अंतिम चेतावनी
करनाल। डेयरियों को शिफ्ट करना अब डेयरी संचालकों के लिए सिर्फ विकल्प नहीं, मजबूरी बन चुका है। नगर निगम ने आखिरकार 22 साल से लंबित डेयरी शिफ्टिंग योजना पर सख्त रुख अपनाते हुए एक अंतिम नोटिस जारी किया है। निगम ने पिंगली क्षेत्र में प्लॉट लेने वाले सभी डेयरी संचालकों को स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि सात दिन के भीतर डेयरियों को शहरी क्षेत्र से हटाकर पिंगली में स्थानांतरित नहीं किया गया, तो उनकी मौजूदा डेयरियां सील कर दी जाएंगी और आवंटित प्लॉट भी जब्त कर लिए जाएंगे। साथ ही, जमा की गई राशि भी वापस नहीं की जाएगी।
यह सख्ती कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि उस लंबी और थकी योजना का नतीजा है जो वर्ष 2003 में शुरू हुई थी, लेकिन अब तक जमीन पर ठीक से उतर नहीं सकी।
22 साल पुरानी योजना जो सिर्फ फाइलों तक सीमित रही
वर्ष 2003 में करनाल नगर निगम ने शहर की डेयरियों को शहरी सीमा से बाहर शिफ्ट करने का निर्णय लिया था। इसके लिए पिंगली गांव में 131 बीघा जमीन खरीदी गई। योजना का उद्देश्य शहर को डेयरी वेस्ट से मुक्त करना, सीवर जाम की समस्या को कम करना और स्वच्छता में सुधार लाना था। लेकिन दुर्भाग्यवश यह महत्वाकांक्षी योजना 17 वर्षों तक सिर्फ फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रही।
वर्ष 2020 में पहली बार इस योजना पर कार्य शुरू हुआ और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया को गति दी गई। कुल 131 प्लॉट काटे गए जिनमें फरवरी 2020 में ड्रॉ के माध्यम से 79 का आवंटन किया गया। उसके बाद अलग-अलग चरणों में 33, 29 और 3 प्लॉट और आवंटित किए गए। इस तरह अब तक कुल 144 प्लॉट डेयरी संचालकों को आवंटित किए जा चुके हैं।
आंकड़े जो बयां करते हैं निष्क्रियता की कहानी
अब तक आवंटित 144 प्लॉटों में से केवल 35 ही ऐसे हैं जहाँ डेयरियों को वास्तव में शिफ्ट किया गया है। शेष 21 प्लॉटों पर डेयरी की इमारतें बन चुकी हैं, लेकिन वहां शहर से डेयरियां नहीं पहुंच पाईं। शेष 88 प्लॉट आज भी खाली पड़े हैं, न कोई निर्माण, न कोई गतिविधि। यह स्थिति न केवल नगर निगम की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि योजना की गंभीरता पर भी सवाल उठाती है।
सख्त चेतावनी के साथ जारी हुआ अंतिम नोटिस
ताजा घटनाक्रम में निगम अधिकारियों ने 109 प्लॉट धारकों को नोटिस जारी किया है, जिनकी डेयरियां अब भी शहर में स्थित हैं। इन नोटिसों में सात दिन की समय-सीमा दी गई है। अगर इस अवधि में डेयरियां शिफ्ट नहीं हुईं, तो निगम सख्त कार्रवाई करेगा – प्लॉट सील, डेयरी सील और जमा राशि जब्त।
नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस बार किसी प्रकार की ढील नहीं देंगे। उनका मानना है कि शहर की सफाई और सीवर व्यवस्था को सुचारू करने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है।
विधायक की चेतावनी के बाद तेज़ हुई प्रक्रिया
इस पूरे मामले में हलचल तब बढ़ी जब करनाल के विधायक जगमोहन आनंद ने नगर निगम अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से चेतावनी दी कि यदि डेयरियों को बाहर नहीं किया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी के बाद ही अधिकारियों ने लटकती योजना को गति दी और ग्राउंड वेरिफिकेशन शुरू किया।
अधिकारियों ने पिंगली में प्लॉटों का रिकॉर्ड खंगाला, मौके पर जाकर देखा कि किस प्लॉट पर निर्माण हुआ है, किस पर डेयरी चल रही है और कौन से अभी भी खाली पड़े हैं।
डेयरियों की वजह से शहर को हो रही परेशानी
शहर में चल रही डेयरियों की वजह से बड़ी समस्या वेस्ट और सीवर जाम की है। इनसे निकलने वाला गोबर, मूत्र और अन्य जैविक अपशिष्ट सीवर में बहाए जाते हैं, जिससे निकासी बाधित होती है। गर्मियों में यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जब बदबू और मच्छरों से जनता परेशान होती है।
नगर निगम के अनुसार अगर यह योजना पूरी तरह से सफल होती है और सभी डेयरियों को शहर से बाहर पिंगली में शिफ्ट किया जाता है, तो शहर की साफ-सफाई, ट्रैफिक और जल निकासी तीनों समस्याओं में भारी राहत मिलेगी।
प्लॉट जब्ती और राशि की वापसी पर स्पष्ट नीति
निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि प्लॉट जब्त होने की स्थिति में संचालकों द्वारा जमा की गई राशि भी फॉरफिट कर दी जाएगी। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि भविष्य में कोई संचालक निगम को जिम्मेदार न ठहरा सके।
पिंगली डेयरी जोन को लेकर निगम की योजना
निगम ने पिंगली डेयरी जोन को एक मॉडर्न डेयरी क्लस्टर में तब्दील करने की योजना बनाई है। यहाँ एकसमान निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था, गोबर प्रबंधन के लिए जैविक संयंत्र और डेयरी वेस्ट से बिजली बनाने की योजना है। इस दिशा में प्राइवेट निवेशकों को भी आमंत्रित किया जा सकता है।
अब जनता भी हुई जागरूक, कर रही सवाल
नगर निगम की इस सख्ती से शहरवासी संतुष्ट हैं। सोशल मीडिया पर भी इस कार्रवाई की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि वर्षों से ये डेयरियां सिर्फ गंदगी और परेशानी का कारण बनी हुई थीं। नगर निगम का अब सक्रिय होना शहर के लिए राहत की बात है।
संक्षिप्त में पूरी स्थिति
| वर्ष | घटनाक्रम |
|---|---|
| 2003 | पिंगली में जमीन खरीदी गई (131 बीघा) |
| 2003-2020 | कोई ठोस कार्य नहीं हुआ |
| फरवरी 2020 | 79 प्लॉटों का ड्रॉ से आवंटन |
| 2020-2024 | कुल 144 प्लॉट आवंटित |
| जून 2025 | 35 डेयरियां ही शिफ्ट की गईं |
| जून 2025 | 109 को नोटिस जारी, 7 दिन की डेडलाइन |
निष्कर्ष
करनाल नगर निगम की यह मुहिम वर्षों से लटके एक गंभीर मुद्दे को अब ठोस रूप देने की ओर बढ़ रही है। शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। नगर निगम की यह सख्ती एक मिसाल बन सकती है कि कैसे प्रशासनिक इच्छाशक्ति से पुरानी समस्याओं को हल किया जा सकता है।
अब देखना यह है कि प्लॉट धारक चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या नगर निगम को अपनी चेतावनी को अमलीजामा पहनाना पड़ेगा। दोनों ही परिस्थितियों में शहर के नागरिकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है।
