स्क्रैप ट्रक चोरी का बड़ा खुलासा: ट्रांसपोर्टर ने रची थी साजिश, CIA की 3 टीमों ने 4 आरोपी दबोचे

स्क्रैप ट्रक चोरी का बड़ा खुलासा: ट्रांसपोर्टर ने रची थी साजिश, CIA की 3 टीमों ने 4 आरोपी दबोचे
Spread the love

जिस ट्रक को पंजाब के लिए रवाना होना था… वो रास्ते में ही ‘गायब’ हो गया! और चौंकाने वाली बात—चोरी का मास्टरमाइंड कोई बाहरी गैंग नहीं, बल्कि खुद ट्रांसपोर्टर निकला…

करनाल। करनाल में स्क्रैप ट्रक चोरी का मामला अब सिर्फ एक साधारण चोरी नहीं रह गया है, बल्कि यह साजिश, धोखाधड़ी और लालच की परतों से भरा अपराध बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर बसताड़ा टोल प्लाजा के पास कबाड़/रेलवे स्क्रैप से भरा ट्रक चोरी होने की वारदात में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि चोरी की साजिश कथित तौर पर खुद ट्रांसपोर्टर ने रची थी, जिसने पैसों का लालच देकर अन्य लोगों को साथ मिलाया और पूरे घटनाक्रम को “चोरी” का रूप दिया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में ट्रक चालक मेनपाल (कोहंड निवासी), ट्रांसपोर्टर दीपक (गांव दुखेड़ी, अंबाला), रवि (शिव कॉलोनी, करनाल) और अमन (नरूखेड़ी निवासी) शामिल हैं। कार्रवाई सीआईए-3 (CIA-3) की तीन टीमों ने मिलकर की। पुलिस ने आरोपियों के पास से 30 हजार रुपये की राशि और चोरी किया गया ट्रक भी बरामद कर लिया है।

यह वारदात न केवल ट्रांसपोर्ट कारोबार की संवेदनशीलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे विश्वास पर आधारित ट्रांसपोर्ट चैन में एक छोटा सा “प्लान” बड़े आर्थिक नुकसान और कानूनी उलझन का कारण बन सकता है।

क्या है पूरा मामला? (घटना की टाइमलाइन)

मामले की शुरुआत 3 जनवरी को हुई। बिहार के जिला समस्तीपुर निवासी बद्री गोयनका ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वे रेलवे स्क्रैप का कारोबार करते हैं और उनका गोदाम करपुरीग्राम (बिहार) में स्थित है। उनके अनुसार आनंद ट्रांसपोर्टर द्वारा एक ट्रक स्क्रैप लोड कराने के लिए भेजा गया था, जिसे भरकर पंजाब भेजना था।

स्क्रैप लोड होने के बाद ट्रक को निर्धारित गंतव्य पर पहुंचना था, लेकिन ट्रक न तो पंजाब पहुंचा और न ही लोकेशन स्पष्ट हुई। शुरुआत में इसे सामान्य देरी समझा गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, संदेह गहराता गया।

ड्राइवर का “असंतोषजनक जवाब” और फिर मोबाइल बंद—यहीं से बढ़ा शक

शिकायतकर्ता ने जब ट्रक चालक मेनपाल से संपर्क किया तो पहले तो उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। फिर कुछ समय बाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ आने लगा। यही वह बिंदु था, जहां व्यवसायिक चिंता “आशंका” में बदल गई।

शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए 13 जनवरी को मधुबन थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने ट्रक चोरी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।

CIA-3 की 3 टीमों की जांच: ट्रक चोरी नहीं, अंदरूनी साजिश

मामला दर्ज होते ही करनाल पुलिस की CIA-3 टीम एक्टिव मोड में आ गई। जांच में यह बात सामने आने लगी कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं बल्कि पहले से रची गई साजिश है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, संदिग्धों से पूछताछ, रूट डिटेल्स और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर टीम बनाई और ऑपरेशन चलाया।

CIA-3 प्रभारी अजय ने बताया कि टीम ने मामले में शामिल तीन आरोपियों—मेनपाल, रवि और अमन को पहले गिरफ्तार किया। इन्हें अदालत में पेश कर एक दिन का रिमांड लिया गया।

रिमांड में खुलासा: असली मास्टरमाइंड ट्रांसपोर्टर दीपक

पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में जब आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो सामने आया कि इस वारदात की जड़ में ट्रांसपोर्टर दीपक था। पुलिस के अनुसार दीपक ने अन्य आरोपियों को रुपयों का लालच देकर वारदात को अंजाम दिलवाया।

इस खुलासे के बाद पुलिस ने ट्रांसपोर्टर दीपक को भी गिरफ्तार कर लिया। उसे अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने 6 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।

30 हजार कैश और ट्रक बरामद: पुलिस को बड़ी कामयाबी

पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पास से 30 हजार रुपये की नगदी बरामद हुई है, जो संभवतः स्क्रैप/ट्रांसपोर्ट डील से जुड़ी रकम हो सकती है। इसके साथ ही चोरी किया गया ट्रक भी रिकवर कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि:

  • स्क्रैप का सामान कहां उतारा गया?
  • क्या स्क्रैप को आगे बेच दिया गया?
  • इसमें कोई कबाड़ व्यापारी/खरीदार शामिल है या नहीं?
  • क्या यह पहली वारदात थी या पहले भी ऐसा हो चुका?

सवाल यह भी: ट्रांसपोर्ट सिस्टम में भरोसा टूट रहा है?

यह केस कई बड़े सवाल छोड़ता है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अक्सर बिना लिखित अनुबंध या सीमित डॉक्यूमेंटेशन के काम चलता है। लेकिन अब इसी तरह के मामलों से यह संदेश जा रहा है कि:

  • ट्रक/माल की ट्रैकिंग अनिवार्य है
  • ड्राइवर/ट्रांसपोर्टर की वेरिफिकेशन बेहद जरूरी है
  • GPS, e-way bill tracking, और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन सुरक्षा का आधार है

आज का समय ऐसा है कि रेलवे स्क्रैप, आयरन स्क्रैप और कबाड़ का बाजार करोड़ों का है और एक ट्रक की खेप भी लाखों में होती है। ऐसे में एक “इनसाइड जॉब” व्यवसाय को भारी नुकसान पहुँचा सकता है।

क्यों बढ़ रही हैं स्क्रैप/कबाड़ ट्रक चोरी की घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों के पीछे कुछ कारण होते हैं:

  1. स्क्रैप की हाई डिमांड (steel, iron industries में)
  2. कैश में खरीद-फरोख्त की संभावना
  3. ट्रैकिंग सिस्टम कमजोर होना
  4. फर्जी दस्तावेजों से ट्रांसपोर्ट चलाना
  5. ड्राइवर-ट्रांसपोर्टर नेटवर्क का गठजोड़

पुलिस अब किस एंगल से जांच कर रही है?

CIA-3 के अनुसार ट्रांसपोर्टर दीपक के रिमांड में पूछताछ के दौरान निम्न बिंदुओं पर फोकस रहेगा:

  • वारदात में शामिल अन्य लोग
  • स्क्रैप की बिक्री/खरीद का स्थान
  • ट्रक की मूवमेंट ट्रैकिंग
  • कॉल रिकॉर्ड, लेनदेन के सबूत
  • क्या कोई बड़ा कबाड़ नेटवर्क जुड़ा है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से अन्य बरामदगी की संभावना है और मामले में अधिक गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *