12 फरवरी को मनाई जाएगी माघ पूर्णिमा, 144 साल बाद बन रहा शुभ संयोग
करनाल: माघ मास की पूर्णिमा तिथि इस बार 12 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि माघ का महीना दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ होता है, जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से भाग्य और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का मौका होता है।
माघ पूर्णिमा का महत्व: स्नान और दान से मिलेगा पुण्य
पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से शुभ है, क्योंकि इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा, इस दिन दान करने से विशेष रूप से शुभ फल मिलते हैं। तिल, गुड़, अनाज, घी, फल और गर्म कपड़े का दान इस दिन अत्यधिक लाभकारी होता है। इन दानों से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
144 साल बाद बन रहा शुभ संयोग: महाकुंभ और माघ पूर्णिमा
इस साल माघ पूर्णिमा पर एक विशेष संयोग बन रहा है, जो 144 साल बाद हो रहा है। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि माघ पूर्णिमा के दिन महाकुंभ का चौथा शाही स्नान भी होगा, जो इस दिन को और भी खास बनाता है। महाकुंभ के शाही स्नान में लाखों श्रद्धालु गंगा के पवित्र जल में स्नान करने के लिए एकत्र होते हैं। इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन स्नान और दान करने से व्यक्ति के जीवन में अपार सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
माघ पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक कृत्य: सत्य नारायण की कथा
माघ पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से सत्य नारायण की कथा सुनने और करवाने का भी महत्व है। यह कथा व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाती है। पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरे माघ महीने में गंगा स्नान नहीं कर सका है, तो उसे माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए। इससे उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे और उसकी समृद्धि में वृद्धि होगी।
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माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त: धार्मिक कृत्यों के लिए उपयुक्त समय
माघ पूर्णिमा के दिन धार्मिक कृत्यों को लेकर भी विशेष मुहूर्त की जानकारी दी गई है। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस दिन स्नान और दान के लिए कुछ खास मुहूर्त हैं, जो पुण्य प्राप्ति के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इन मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त, गोधूलि मुहूर्त और अमृत काल का विशेष महत्व है।
माघ पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: यह मुहूर्त सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस समय में धार्मिक कार्यों की शुरुआत करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- गोधूलि मुहूर्त: यह मुहूर्त शाम 06 बजकर 07 मिनट से 06 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यह समय विशेष रूप से पूजा और अर्चना के लिए सर्वोत्तम है।
- अमृत काल: शाम 05 बजकर 55 मिनट से रात 07 बजकर 35 मिनट तक अमृत काल रहेगा। इस समय में किए गए धार्मिक कार्य विशेष रूप से लाभकारी होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
- गंगा स्नान का महत्व: अगर कोई व्यक्ति पूरे माघ महीने गंगा स्नान नहीं कर सका हो, तो माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
- दान का महत्व: माघ पूर्णिमा के दिन तिल, गुड़, अनाज, घी, फल, और गर्म कपड़े का दान करना चाहिए। ये दान पुण्य की प्राप्ति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
- सत्य नारायण की कथा: इस दिन सत्य नारायण की कथा करवानी या सुनने का भी विधान है। इससे जीवन में शांति और समृद्धि का वास होता है और व्यक्ति के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।
श्री गुरु रविदास जयंती का उत्सव
माघ पूर्णिमा के दिन श्री गुरु रविदास जयंती भी मनाई जाती है। गुरु रविदास जी के योगदान और शिक्षाओं को याद करने का यह दिन है। इस दिन विशेष रूप से उनके भजन-कीर्तन और उनकी शिक्षाओं का पालन किया जाता है। यह दिन समाज में समानता और भाईचारे का संदेश फैलाने का अवसर भी होता है।
निष्कर्ष:
माघ पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस साल यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि 144 साल बाद महाकुंभ का चौथा शाही स्नान भी माघ पूर्णिमा के दिन होगा। इस दिन गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, सत्य नारायण की कथा और गुरु रविदास जयंती की उपासना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
इस दिन के विशेष मुहूर्त और धार्मिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए, सभी श्रद्धालुओं को माघ पूर्णिमा का पर्व हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए।
