✍️ संजय शर्मा, वरिष्ठ संपादक (20 वर्षों का अनुभव)
करनाल: भीषण गर्मी और लू की थपेड़ों के बीच करनाल शहर के नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब पीने और घरेलू उपयोग के पानी की हो गई है। करनाल जल संकट इस समय पांच प्रमुख कॉलोनियों — शिव कॉलोनी, जनकपुरी, अशोक नगर, शास्त्री नगर और रामनगर — में विकराल रूप ले चुका है। इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवार हर सुबह और शाम बाल्टियाँ लेकर पानी का इंतजार करते देखे जा सकते हैं, लेकिन पाइपलाइन में पानी का दबाव इतना कम है कि टंकियों तक पहुंचते-पहुंचते पानी की धार मात्र एक बूँद सी रह जाती है।
समस्या की जड़: लंबी पाइपलाइन और जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर
नगर निगम की ओर से जिन पाइपलाइनों से इन क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है, वे वर्षों पुरानी हो चुकी हैं। अधिकतर पाइपें जगह-जगह से जर्जर हैं और कहीं-कहीं पर लीकेज की समस्या भी है। शिव कॉलोनी के जलघर की मोटर भी वर्षों पुरानी बताई जा रही है, जिसकी क्षमता अब इतनी कम हो चुकी है कि एक बार मोटर चालू करने के बाद मुश्किल से 15 से 20 मिनट तक ही पानी की आपूर्ति हो पाती है।
जनकपुरी निवासी विमला देवी कहती हैं, “सुबह 5 से 7 बजे तक और फिर शाम को 7 से 8:30 बजे तक पानी आता है, लेकिन इतना कम दबाव होता है कि टंकी क्या, बाल्टी भी आधी ही भर पाती है। हमने कई बार निगम में शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
लोग टैंकरों पर निर्भर
स्थानीय निवासी निजी टैंकर मंगवाकर अपनी आवश्यकता पूरी करने को मजबूर हो चुके हैं। टैंकर माफिया भी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। सामान्य दिनों में जो टैंकर 400-500 रुपये में मिल जाता था, वही अब 800 से 1000 रुपये तक में उपलब्ध हो रहा है। गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उठाना लगभग असंभव होता जा रहा है।
शास्त्री नगर के निवासी सुरेश कुमार कहते हैं, “पानी अब हमारी दिनचर्या की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ गर्मी इतनी है कि दिन में तीन बार नहाने की जरूरत पड़ रही है, दूसरी तरफ पीने तक को पानी नहीं है। दो टंकियां लगवा रखी हैं, लेकिन खाली पड़ी रहती हैं। मजबूरी में टैंकर मंगाना पड़ता है।”
नगर निगम की भूमिका पर उठे सवाल
कॉलोनीवासियों ने बताया कि नगर निगम कार्यालय में इस बारे में दर्जनों बार शिकायत की गई है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। न तो मोटर बदली गई और न ही पाइपलाइन की मरम्मत हुई। शिकायत दर्ज कराने के बाद कुछ कर्मचारी क्षेत्र में आकर पाइपलाइन का निरीक्षण करते हैं, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती।
रामनगर की गृहिणी नीलम रानी कहती हैं, “हर बार चुनावों से पहले नेता हाथ जोड़कर कहते हैं कि जल संकट दूर कर देंगे। लेकिन जैसे ही वोट मिलते हैं, वे गायब हो जाते हैं। हमने कई बार पार्षद और विधायक से बात की, लेकिन सब व्यस्त बताकर टाल देते हैं।”
ग्राउंड रिपोर्ट: हमारी टीम पहुंची शिव कॉलोनी
हमारी टीम ने वार्ड 17 की शिव कॉलोनी में ग्राउंड रिपोर्टिंग की। सुबह 6:30 बजे अधिकांश घरों की छत पर रखी टंकियां खाली पड़ी थीं। लोग पानी के लिए पाइप लाइन से बाल्टी जोड़कर खड़े थे। एक घर की महिला – सरिता देवी ने बताया, “हम रोज सुबह 4:30 बजे उठ जाते हैं ताकि जो भी थोड़ी देर के लिए पानी आता है, उसे भर लें। छोटे बच्चों को स्कूल भेजना भी मुश्किल हो गया है। बर्तन, कपड़े, नहाना सब पीछे छूट गया है।”
कॉलोनी के जलघर की मोटर करीब 15 साल पुरानी बताई जा रही है। पाइपलाइन भी 2005 में डाली गई थी, जिसे आज तक बदला नहीं गया। कुछ पाइपों में जंग लग चुका है जिससे पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या समाधान है?
जल संकट का समाधान केवल पानी की सप्लाई बढ़ाने से नहीं, बल्कि संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण से होगा। नगर निगम को चाहिए कि जलघरों की मोटरें बदले, पुरानी पाइपलाइनों को नया करे और लीकेज की समस्या को प्राथमिकता पर सुलझाए। साथ ही, क्षेत्रीय पार्षदों और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करना चाहिए।
जल संकट का गर्मी से संबंध
इस बार करनाल में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी अधिक गर्मी, उतनी अधिक पानी की खपत। ऐसे में नगर निगम को पहले से योजना बनाकर आपूर्ति बढ़ानी चाहिए थी। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी ‘भीषण गर्मी’ के बाद ही अधिकारी नींद से जागते दिख रहे हैं।
जल संरक्षण की अपील
सरकारी लापरवाही के बीच अब नागरिकों को खुद भी जल संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी। जैसे कि रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, कम पानी खर्च करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल, लीक रोकना आदि छोटे लेकिन प्रभावशाली कदम इस संकट को कम कर सकते हैं।
लोगों की मांग
- कॉलोनियों में नई मोटरें लगाई जाएं
- पाइपलाइन बदली जाए
- वाटर टैंक की व्यवस्था हो
- टैंकरों की कीमत तय की जाए
- मोबाइल एप के माध्यम से शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हमने इस मुद्दे पर करनाल नगर निगम के अधिशासी अभियंता अनिल कटारिया से बात की। उन्होंने बताया, “कुछ पाइपलाइनों में दिक्कत आई है और कुछ मोटरों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। दो सप्ताह के अंदर कुछ क्षेत्रों में सुधार नजर आएगा।”
निष्कर्ष
करनाल का जल संकट प्रशासनिक उदासीनता, जर्जर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मांग का मिश्रण बन गया है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस समाधान पर काम करें। वरना हर गर्मी में यही संकट लौटेगा और नागरिक पानी की हर बूँद के लिए लड़ते रहेंगे।
संपादकीय टिप्पणी (संजय शर्मा द्वारा):
“एक विकसित शहर की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं होती, बल्कि उसकी आधारभूत सुविधाओं से होती है — पानी उनमें सबसे पहली आवश्यकता है। करनाल जैसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल शहर के लिए जल संकट एक शर्मनाक स्थिति है। नगर निगम को अब ‘आश्वासन’ की जगह ‘कार्रवाई’ की राह पर चलना होगा।”
