अब प्लॉट बेचकर भागना आसान नहीं होगा… करनाल में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन ने कसा शिकंजा, 16 कॉलोनाइजरों पर FIR तय।
करनाल अवैध कॉलोनियां एक बार फिर प्रशासन के निशाने पर आ गई हैं। जिले में बिना अनुमति विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अब केवल नोटिस या चेतावनी नहीं, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है। शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की अहम बैठक में यह साफ कर दिया गया कि अब नियमों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता एडीसी योगेश कुमार मेहता ने की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिले में अवैध कॉलोनियों का फैलाव न केवल शहरी नियोजन के लिए खतरा है, बल्कि आम नागरिकों की जीवनभर की कमाई को भी जोखिम में डालता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि समय रहते इस पर रोक लगाई जाए।
16 कॉलोनाइजरों पर FIR दर्ज करने के निर्देश
बैठक में एडीसी ने 16 ऐसे कॉलोनाइजरों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए, जो बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद अवैध कॉलोनियों का निर्माण और प्लॉटिंग जारी रखे हुए थे। उन्होंने कहा कि अब केवल समझाने से काम नहीं चलेगा। जो लोग नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी।
डीटीपी (जिला नगर योजनाकार) गुंजन वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग द्वारा अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। नवंबर और दिसंबर माह में डिमोलिशन प्रोग्राम के तहत जिले के कंट्रोल्ड एरिया और अर्बन एरिया में स्थित 13 अवैध कॉलोनियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा चुकी है।
35 अवैध निर्माण ध्वस्त, 35 को रिकवरी नोटिस
डीटीपी गुंजन वर्मा ने बताया कि इन अभियानों के दौरान कुल 35 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया है। इसके साथ ही 35 मामलों में रिकवरी नोटिस भी जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई में जो भी सरकारी खर्च हुआ है, उसकी वसूली संबंधित तहसीलदारों के माध्यम से जल्द सुनिश्चित की जाएगी।
एडीसी ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों से की गई कार्रवाई का खर्च दोषियों से ही वसूला जाए। इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों खतरनाक हैं अवैध कॉलोनियां?
बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर भी चर्चा की कि अवैध कॉलोनियां आम लोगों के लिए किस तरह बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। बिना अनुमति विकसित की गई कॉलोनियों में न तो सीवर की व्यवस्था होती है, न ही ड्रेनेज, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं। बाद में इन्हीं कॉलोनियों के निवासी सुविधाओं की मांग लेकर प्रशासन के चक्कर काटते हैं।
एडीसी ने कहा कि ऐसे कॉलोनाइजर भोले-भाले लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर उनकी जीवनभर की जमा पूंजी फंसा देते हैं। बाद में न रजिस्ट्री होती है, न ही कॉलोनी को वैधता मिलती है। इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता है कि अवैध कॉलोनियों को पनपने से पहले ही रोका जाए।
पुलिस और प्रशासन का संयुक्त एक्शन
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने पुलिस, नगर पालिका, बिजली विभाग और इंफोर्समेंट थाना को भी साथ जोड़ा है। बैठक में एसडीएम प्रदीप कुमार, डीएसपी राजीव कुमार, बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता, नगर पालिका सचिव और इंफोर्समेंट थाना के इंचार्ज भी मौजूद रहे।
डीएसपी राजीव कुमार ने आश्वासन दिया कि जिन मामलों में FIR दर्ज होगी, उनमें पुलिस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करेगी। किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रखा जाएगा।
लगातार मॉनिटरिंग, ड्रोन और फील्ड सर्वे पर जोर
एडीसी योगेश कुमार मेहता ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध कॉलोनियों की पहचान के लिए नियमित फील्ड सर्वे किए जाएं। जहां जरूरत हो, वहां ड्रोन सर्वे का भी सहारा लिया जाए ताकि कोई भी अवैध गतिविधि प्रशासन की नजर से बच न सके।
उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में दोबारा अवैध निर्माण शुरू होता है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
आम जनता से अपील
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि प्लॉट या मकान खरीदने से पहले उसकी वैधता जरूर जांचें। केवल कॉलोनाइजर की बातों में न आएं। जिला नगर योजनाकार कार्यालय या संबंधित तहसील से यह सुनिश्चित करें कि कॉलोनी लाइसेंस प्राप्त है या नहीं।
एडीसी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अवैध कॉलोनी में निवेश करता है और बाद में नुकसान उठाता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलोनाइजर की होगी, लेकिन सावधानी बरतना नागरिकों का भी दायित्व है।
साफ संदेश: अब जीरो टॉलरेंस
इस बैठक से एक बात साफ हो गई है कि करनाल में अवैध कॉलोनियों के लिए अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में कार्रवाई और तेज होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
शहर के सुनियोजित विकास और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह सख्ती जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
