हरियाणा में नशे के खिलाफ चल रही कानूनी जंग में अदालत ने एक बार फिर साफ कर दिया है—नशे के कारोबार के लिए अब कोई नरमी नहीं।
करनाल।
हरियाणा में नशे के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बीच नशा तस्कर को 10 साल की सजा सुनाए जाने का एक अहम फैसला सामने आया है। करनाल की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितु की एनडीपीएस अधिनियम की फास्ट ट्रैक अदालत ने नशा तस्करी के मामले में आरोपी बबलू को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला न केवल कानून व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि नशे के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अब ऐसे अपराधों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले की प्रभावी पैरवी सहायक जिला न्यायवादी ऋषि शर्मा द्वारा की गई। मामला 19 अक्तूबर 2020 का है, जब नारकोटिक्स सेल की टीम असंध थाना क्षेत्र के अंतर्गत जलमाना इलाके में गश्त पर थी।
टीम को विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई थी कि जलमाना गांव निवासी बबलू नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गोलियां और कैप्सूल बेचने का काम करता है और वह कुडलन की ओर से जलमाना गांव की तरफ आने वाला है।
पुलिस की रणनीति और गिरफ्तारी
सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने कुडलन रोड पर वाल्मीकि मंदिर के पास नाका लगाया। कुछ समय बाद जब संदिग्ध बबलू वहां से गुजरता दिखाई दिया तो पुलिस ने उसे रोका और नियमानुसार तलाशी से पहले नोटिस दिया।
तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 1400 ट्रामाडोल की गोलियां बरामद की गईं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित नशीला पदार्थ है। इसके बाद आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
कानूनी कार्रवाई और ट्रायल
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ असंध थाना में एनडीपीएस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, दस्तावेजों और बरामदगी के आधार पर अदालत के समक्ष मजबूत पक्ष रखा। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया।
अदालत का सख्त रुख
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितु की एनडीपीएस फास्ट ट्रैक अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नशा तस्करी समाज, युवाओं और भविष्य के लिए घातक अपराध है। ऐसे मामलों में कठोर सजा देना समय की मांग है ताकि समाज में डर पैदा हो और अपराधियों को स्पष्ट संदेश जाए।
अदालत ने दोषी को दस वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
समाज के लिए संदेश
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है जो नशे के अवैध कारोबार से त्वरित मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं। कानून की पकड़ देर से सही, लेकिन मजबूत होती है।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि एनडीपीएस मामलों में फास्ट ट्रैक अदालतों के ऐसे फैसले नशे के नेटवर्क को तोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे पुलिस और अभियोजन पक्ष का मनोबल भी बढ़ेगा।
9PM News Desk Angle
सवाल: नशा तस्कर को कितनी सजा हुई?
जवाब: करनाल की एनडीपीएस फास्ट ट्रैक अदालत ने नशा तस्कर को 10 साल की कठोर कारावास की सजा और 1 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
सवाल: आरोपी के पास से क्या बरामद हुआ?
जवाब: आरोपी के कब्जे से 1400 ट्रामाडोल की गोलियां बरामद की गई थीं।
सवाल: यह मामला कब का है?
जवाब: यह मामला 19 अक्तूबर 2020 का है
