करनाल। बंद स्ट्रीट लाइट करनाल शहर की स्मार्ट सिटी परियोजना की वास्तविकता को उजागर कर रही है। करनाल शहर की प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाली मुगल कैनाल मार्केट बीते तीन महीने से घोर अंधेरे में डूबी है। यहां की स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और प्रशासनिक तंत्र से लेकर स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारी इस मुद्दे पर अब तक मौन हैं। यह न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता का मामला है, बल्कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से सीधा जुड़ा सवाल भी है।
मुगल कैनाल मार्केट: करनाल की धड़कन, लेकिन तीन महीने से अंधेरे में
मुगल कैनाल मार्केट करनाल के उन इलाकों में गिनी जाती है, जो व्यापारिक, सामाजिक और नागरिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है। यहां प्राइवेट ऑफिस, ऑटो मोबाइल वर्कशॉप, दुकानें, और हाउसिंग सोसाइटियाँ मौजूद हैं। दिनभर यहां लोगों का तांता लगा रहता है और रात में भी आवाजाही बनी रहती है, खासकर सेक्टर 12, सेक्टर 14 पार्ट-2, एक्सटेंशन, कुंजपुरा रोड, निर्मल कुटिया रोड, मीरा घाटी, और कर्ण गेट जाने वालों के लिए यह मुख्य मार्ग है।
लेकिन पिछले तीन महीनों से मुगल कैनाल मार्केट की स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। रात होते ही पूरा इलाका अंधकारमय हो जाता है। दुकानदारों से लेकर राहगीरों तक, सभी लोग डर और असुरक्षा के बीच अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं।
स्मार्ट सिटी के 32 करोड़, लेकिन ज़मीन पर जीरो रोशनी!
करनाल को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चुना गया था। इस परियोजना के अंतर्गत करीब ₹32 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइट्स की इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस पर खर्च किए गए। टेंडर की प्रक्रिया से लेकर निजी एजेंसियों को ठेका दिए जाने तक सब कुछ शहरी विकास के दायरे में किया गया। लेकिन जब तीन महीने तक मुगल कैनाल मार्केट में लाइटें बंद पड़ी रहें और कोई कार्रवाई न हो, तो यह योजना की नाकामी का साफ उदाहरण बन जाता है।
नगर निगम की बैठकों में भी यह मुद्दा कई बार उठ चुका है। जनप्रतिनिधियों ने इस पर अपनी नाराज़गी जाहिर की, लेकिन फील्ड लेवल पर कोई समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों की नाराज़गी
हमने जब स्थानीय दुकानदारों से बात की, तो उनका आक्रोश खुलकर सामने आया।
अमित गुप्ता, जोकि ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाते हैं, कहते हैं,
“हमारी दुकानें रात 9 बजे तक खुली रहती हैं। लेकिन जैसे ही अंधेरा होता है, ग्राहक कम होने लगते हैं। लोग डर के मारे रुकते नहीं।”
शुभम वर्मा, एक निजी ऑफिस में कार्यरत कर्मचारी ने कहा,
“रोज़ ऑफिस से रात 8 बजे निकलता हूं। जब बाहर आता हूं तो पूरा इलाका अंधेरे में डूबा होता है। न जाने कब कोई छीना-झपटी हो जाए।”
निगम अधिकारियों की प्रतिक्रिया: शिकायत करो, एजेंसी सुधारेगी
जब नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था:
“शहर में खराब या बंद पड़ी लाइटों की शिकायत के लिए नागरिक 0184-2200600 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। वहां से शिकायतें स्मार्ट सिटी टीम को भेज दी जाती हैं, और रिपेयर एजेंसी उन्हें ठीक करती है।”
यह उत्तर सुनने में तो औपचारिक और सही लगता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। तीन महीने तक यदि लाइटें बंद पड़ी हैं और शिकायतों के बावजूद कोई सुधार नहीं होता, तो यह प्रक्रिया मात्र दिखावा बनकर रह जाती है।
स्मार्ट सिटी: केवल कागज़ों पर ही स्मार्ट?
करनाल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एक विज़न डॉक्युमेंट जारी किया गया था, जिसमें शहर को डिजिटल, सुरक्षित और हरित बनाने के दावे किए गए थे। लेकिन इस स्ट्रीट लाइट प्रकरण ने इन दावों की हवा निकाल दी है।
क्या स्मार्ट सिटी सिर्फ दिखावे का नाम है? क्या इसमें केवल करोड़ों का बजट और ठेकेदारों को फायदा पहुँचाना ही लक्ष्य है?
सुरक्षा और अपराध की चिंता
रात के अंधेरे में जब स्ट्रीट लाइटें काम न करें, तो अपराधियों के लिए यह एक वरदान जैसा बन जाता है। चोरी, लूटपाट, छेड़छाड़ जैसे अपराधों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। खासकर महिलाएं और बुज़ुर्ग इस स्थिति में सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
पिछले दो महीनों में मुगल कैनाल से सटे क्षेत्रों में चेन स्नैचिंग और मोबाइल चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें से अधिकांश रात के समय घटित हुई हैं।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका और निष्क्रियता
नगर निगम की सदन बैठक में कई पार्षदों ने इस मुद्दे को उठाया। लेकिन केवल चर्चा और प्रस्तावों से समस्या का हल नहीं होता। ज़मीनी कार्रवाई के अभाव में जनता का भरोसा तंत्र से उठ रहा है।
जवाबदेही तय क्यों नहीं होती?
सवाल ये है कि:
- जब 32 करोड़ की परियोजना है तो मेंटेनेंस के लिए क्या SLA (Service Level Agreement) तय हुआ है?
- खराबी आने पर अधिकतम कितने समय में उसे ठीक करने का प्रावधान है?
- तीन महीने से बंद लाइटों का ज़िम्मेदार कौन है?
- क्या एजेंसी पर जुर्माना लगाया गया?
इन सवालों के जवाब जनता चाहती है और यह पारदर्शिता की मांग है, कोई उपकार नहीं।
समाधान की दिशा: क्या किया जा सकता है?
- जनता को जागरूक करें: 0184-2200600 नंबर पर शिकायत करें और उसका ट्रैकिंग नंबर लें।
- RTI डालें: नागरिक RTI के ज़रिए स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस की पूरी जानकारी मांग सकते हैं।
- निगम सदन में सीधे प्रश्न उठाएं: क्षेत्रीय पार्षद के ज़रिए शिकायत को सदन में उठवाएं।
- सोशल मीडिया जन आंदोलन: तस्वीरों और वीडियो के साथ प्रशासन को टैग कर दबाव बनाएं।
निष्कर्ष: अंधेरा सिर्फ सड़कों पर नहीं, सिस्टम में भी
करनाल के मुगल कैनाल मार्केट में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और स्मार्ट सिटी के खोखले वादों का प्रतीक हैं। करनाल की जनता अब सिर्फ सुनवाई नहीं, कार्यवाही चाहती है। नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान अब नीतिगत प्राथमिकता बननी चाहिए।
