रिपोर्टर: संजय शर्मा, 9PN न्यूज, निसिंग
हरियाणा के निसिंग क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक संगतपुरा गुरुद्वारा में रविवार को समाज सुधार लहर कमेटी की विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समाज में फैली एक अत्यंत संवेदनशील और लंबे समय से चली आ रही परंपरा—मृत्यु भोज—को लेकर विचार-विमर्श किया गया। कमेटी ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया कि इस परंपरा को समाप्त कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जाना चाहिए।
इस बैठक में हरियाणा सिख संगतपुरा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य गुरनाम सिंह लाडी डबरी, भूपेंद्र सिंह लाडी सौकड़ा और मेजर सिंह चीका विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्थानीय समाजसेवियों और गुरुद्वारा कमेटी के अन्य सदस्यों ने इन अतिथियों का पारंपरिक सरोपा पहनाकर भव्य स्वागत किया।
मृत्यु भोज: परंपरा या बोझ?
गुरनाम सिंह लाडी डबरी ने इस अवसर पर कहा कि शोक की घड़ी में मृत्यु भोज जैसे आयोजन न केवल अनुचित हैं, बल्कि यह समाज में आर्थिक और मानसिक तनाव का कारण भी बनते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मृत्यु भोज एक सामाजिक कुप्रथा बन चुकी है। जब किसी परिवार में कोई सदस्य निधन हो जाता है, तो परिवार शोक में डूबा होता है। उस समय रिश्तेदारों और समाज के लोगों द्वारा भोज की अपेक्षा करना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि अत्यंत दुखद भी है।”
गुरनाम सिंह ने आगे कहा कि समाज में यह धारणा बन चुकी है कि बिना मृत्यु भोज के अंतिम संस्कार अधूरे माने जाते हैं। लेकिन यह धारणा पूरी तरह से निराधार है और समय आ गया है कि हम इस सोच को बदलें।
गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि मृत्यु भोज की यह परंपरा गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालती है। कई बार यह देखा गया है कि सामाजिक दबाव के कारण लोग कर्ज लेकर भी मृत्यु भोज का आयोजन करते हैं, जो आगे चलकर उनके लिए आर्थिक विपत्ति का कारण बनता है।
लाडी डबरी ने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि किसी भी प्रकार के भोज या भव्य आयोजन से दिवंगत आत्मा की शांति नहीं मिलती। सच्ची श्रद्धांजलि तभी है जब हम मृतक की स्मृति में नेक कार्य करें, जैसे कि गरीबों को भोजन कराना, शिक्षा में सहयोग देना या सामाजिक सेवा करना।
हरियाणा सिख संगतपुरा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की भूमिका
गुरनाम सिंह लाडी ने इस बात की घोषणा की कि वे इस मुद्दे को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अगली बैठक में आधिकारिक रूप से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कमेटी समाज में धार्मिक और सामाजिक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
भूपेंद्र सिंह लाडी सौकड़ा और मेजर सिंह चीका ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया और समाज को कुरीतियों से मुक्त करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समाज का समर्थन
इस बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग उपस्थित थे, जिनमें अमरजीत लाडी, गुरवंत सिंह, कुलवंत सिंह, डिंपल, गोल्डी, सर्वजीत सिंह बरियार सहित अनेक गणमान्य नागरिक शामिल थे। इन सभी ने समाज सुधार लहर कमेटी के प्रयासों की सराहना की और इस अभियान में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
जनजागरण और शिक्षा की आवश्यकता
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में इस विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए ग्राम स्तर पर विशेष शिविर और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि मृत्यु भोज केवल एक सामाजिक दबाव है, जिसका कोई धार्मिक या आध्यात्मिक आधार नहीं है।
समाज सुधार लहर कमेटी के सदस्यों ने यह भी कहा कि स्कूली और कॉलेज स्तर पर युवाओं को इस विषय पर शिक्षित किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी कुरीतियों के खिलाफ मुखर होकर खड़ी हो सके।
निष्कर्ष
संगतपुरा गुरुद्वारा में हुई यह बैठक समाज के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ाने की शुरुआत है। मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। जब तक हम अपने रीति-रिवाजों की पुनर्समीक्षा नहीं करेंगे, तब तक सामाजिक विकास अधूरा रहेगा।
हरियाणा के निसिंग क्षेत्र से यह पहल पूरे राज्य और देश में एक सकारात्मक संदेश देती है कि हम अपनी परंपराओं को समयानुकूल रूप से सुधार सकते हैं और समाज को बेहतर बना सकते हैं। अब यह समय है कि हम सभी मिलकर इस सामाजिक परिवर्तन में भागीदार बनें।
