किसी भी बच्चे को दाखिले से वंचित नहीं किया जाएगा: दस्तावेजों की कमी पर शिक्षा निदेशालय का बड़ा फैसला

किसी भी बच्चे को दाखिले से वंचित नहीं किया जाएगा: दस्तावेजों की कमी पर शिक्षा निदेशालय का बड़ा फैसला
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रिपोर्टर: संजय शर्मा, 9PN न्यूज़ चैनल, करनाल ब्यूरो

करनाल, हरियाणा – राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर एक बेहद अहम निर्देश जारी किया गया है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण किसी भी बच्चे को स्कूल में दाखिले से वंचित नहीं किया जाएगा। यह निर्देश राज्यभर के उन सरकारी स्कूलों के लिए है, जहां कई बच्चों को केवल इसलिए प्रवेश नहीं मिल पा रहा था क्योंकि उनके पास आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र (PPP) या अन्य दस्तावेज नहीं थे।

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी इस आदेश को संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के अधिकार के अनुरूप एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। निदेशालय ने अपने पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस सूचना को तत्काल प्रभाव से अपने जिले के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूल प्रमुखों तक पहुंचाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

पृष्ठभूमि: दस्तावेजों के अभाव में हो रही थी दाखिले में दिक्कत

हाल ही में शिक्षा निदेशालय के संज्ञान में आया कि कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है क्योंकि वे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे। यह समस्या विशेष रूप से उन प्रवासी परिवारों के बच्चों के साथ देखी गई है, जिनके पास हरियाणा राज्य का परिवार पहचान पत्र नहीं है या जिन्होंने हाल ही में स्थानांतरित होकर नया निवास स्थान चुना है।

शिक्षा निदेशालय के मुताबिक, यह स्थिति न केवल आरटीई अधिनियम 2009 का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि दाखिले के लिए दस्तावेजों की कमी को किसी भी स्थिति में बाधा नहीं माना जाएगा।

आरटीई अधिनियम 2009 का पालन अनिवार्य

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, जिसे Right to Education Act (RTE) 2009 के नाम से जाना जाता है, यह सुनिश्चित करता है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इस अधिनियम के तहत कोई भी स्कूल बच्चे को केवल दस्तावेजों की अनुपस्थिति के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं कर सकता।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने बताया कि सरकार और विभाग दोनों ही बच्चों की शिक्षा को सर्वोपरि मानते हैं। उन्होंने कहा, “यदि किसी बच्चे के पास अभी आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र या अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, तो भी स्कूल उसे मना नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में बच्चे का ऑफलाइन प्रवेश किया जाएगा, और जब दस्तावेज प्राप्त हो जाएंगे, तब ऑनलाइन प्रोसेस पूरी की जाएगी।”

स्कूल रजिस्टर में दर्ज होगा ऑफलाइन विवरण

शिक्षा विभाग ने स्कूलों को यह निर्देश भी दिया है कि दस्तावेजों के अभाव में भी बच्चों का नाम स्कूल रजिस्टर में दर्ज किया जाए और ऑफलाइन प्रवेश की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। इसके साथ ही स्कूल को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे के माता-पिता या अभिभावकों को दस्तावेज जमा करने के लिए उचित समय प्रदान किया जाए।

स्कूलों को यह भी कहा गया है कि जब दस्तावेज उपलब्ध हो जाएं, तो पिछले वर्ष की तरह ही ऑनलाइन पोर्टल पर छात्र का विवरण दर्ज किया जाए और प्रवेश की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा किया जाए।

जिला अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश

शिक्षा निदेशालय के पत्र में कहा गया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) यह सुनिश्चित करें कि यह आदेश समय पर और पूरी सख्ती के साथ सभी सरकारी स्कूलों तक पहुंचे। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रवेश उत्सव के दौरान किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण प्रवेश से वंचित न किया जाए।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि बच्चों को दस्तावेजों की कमी के चलते स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल रहा है। इन शिकायतों की गंभीरता को समझते हुए शिक्षा निदेशालय ने यह कदम उठाया है।

प्रवासी बच्चों के लिए राहत

यह फैसला विशेष रूप से उन बच्चों के लिए राहत लेकर आया है जो दूसरे राज्यों या जिलों से अपने परिवार के साथ स्थानांतरित होकर आए हैं। कई बार ऐसे परिवार आवश्यक दस्तावेज साथ नहीं ला पाते हैं या उनके पास डिजिटल सुविधा नहीं होती कि वे दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत कर सकें।

यह निर्देश न केवल शिक्षा की पहुंच को आसान बनाएगा, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस कदम भी माना जाएगा।

निष्कर्ष

शिक्षा निदेशालय का यह फैसला साफ दर्शाता है कि सरकार बच्चों की शिक्षा को लेकर संवेदनशील है और किसी भी प्रकार की बाधा को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह आदेश सभी सरकारी स्कूलों के लिए स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा का अधिकार सार्वभौमिक है और दस्तावेजों की अनुपलब्धता कभी भी इस अधिकार के रास्ते में नहीं आ सकती।

बच्चों को स्कूल में प्रवेश से वंचित करना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक गैरकानूनी कदम माना जाएगा। शिक्षा विभाग का यह आदेश न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि यह भविष्य में एक सशक्त, शिक्षित समाज की नींव भी रखेगा।

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