लेखक: संजय शर्मा
स्थान: करनाल, हरियाणा
प्रकाशन तिथि: 24 अप्रैल 2025
करनाल, हरियाणा।
22 अप्रैल की सुबह जब देश के वीर सपूत लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों की कायराना हरकत का मुकाबला करते हुए शहादत दी, तब शायद किसी को भी यह अंदेशा नहीं था कि यह बहादुर बेटा, पति, भाई और पोता अब कभी घर नहीं लौटेगा। करनाल का वातावरण उस दिन से ही शोक में डूबा हुआ है।
भाई विनय नरवाल को मुखाग्नि देती बहन की चीत्कार
करनाल के एक सामान्य से घर में, जहां सात दिन पहले ही बहन सृष्टि ने अपने भाई की शादी में उसकी बारात सजते देखी थी, अब वही बहन अपने वीर भाई को मुखाग्नि दे रही थी। जैसे ही सृष्टि ने विनय के पार्थिव शरीर की अंतिम परिक्रमा की और मटकी फोड़ी, पूरा वातावरण गमगीन हो गया। उसकी चीखें गूंज उठीं — “मेरी राखी भी चली गई… भाई ने हर राखी पर मुझसे लाड़ किया, अब कौन करेगा?”
पत्नी की वेदना: “अब किसके सहारे जिंदगी काटूंगी?”
अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा के समय विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी स्वामी बिलख-बिलख कर यही कह रही थी — “मेरा सब कुछ खत्म हो गया। अब मैं किसके सहारे रहूंगी?” वह बार-बार अपने पति के ताबूत से लिपटती रही, मानो वह समय को पीछे खींचना चाह रही हो।
मां-बाप और दादा-दादी का टूटा हौसला
अंतिम संस्कार के समय विनय की मां बेसुध होकर गिर पड़ीं। वहीं, दादा हवा सिंह अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे थे। उन्हें परिजन सहारा देकर वहां तक लाए। विनय के पिता राजेश नरवाल, जो खुद एक दृढ़ इंसान माने जाते हैं, इस बार आंखों में आंसू लिए हाथ जोड़कर खड़े थे। वे कभी बेटे के चेहरे को देखते, कभी आसमान की ओर।
शहीद विनय नरवाल को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
जब विनय का पार्थिव शरीर करनाल लाया गया, तब हजारों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे। हर आंख नम थी, हर दिल गर्व और ग़म से भरा हुआ था। सैनिक सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई। करनाल में ऐसा दृश्य बहुत वर्षों बाद देखा गया।
दादी की अंतिम विदाई: लाड़ से विदा किया पोता
घर के गेट पर खड़ी विनय की दादी ने पोते को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। वह दादी जो अब तक विनय को लाड़ लड़ाती थीं, आज उसी पोते को सदा के लिए विदा कर रही थीं।
पहलगाम हमले की कहानी
22 अप्रैल को विनय जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की गोली का शिकार बने। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान वे शहीद हो गए। उनके साथियों ने बताया कि विनय ने अंत तक लड़ाई लड़ी और दो आतंकियों को ढेर भी किया।
परिवार ने खुद उठाया बेटे का शव
घटना की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य — पिता राजेश नरवाल, बहन सृष्टि, पत्नी हिमांशी, सास पूनम स्वामी और ससुर सुनील दत्त — कश्मीर के लिए रवाना हुए। अस्पताल में जब उन्होंने अपने बेटे, भाई और दामाद का शव देखा, तब हर आंख नम हो गई।
दिल्ली से करनाल तक अंतिम यात्रा
वायुसेना के विशेष विमान से पार्थिव शरीर को दिल्ली लाया गया और फिर वहां से एंबुलेंस के माध्यम से करनाल लाया गया। रास्ते भर भारत माता की जय और विनय अमर रहें के नारे गूंजते रहे।
