लेखक: संजय शर्मा (20 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव)
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने न केवल देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया, बल्कि कश्मीर की तरक्की की पटरी को भी डगमगाने पर मजबूर कर दिया है।
हमले की विभीषिका और मानव क्षति
यह हमला उस वक्त हुआ जब कश्मीर में ट्यूलिप सीज़न अपने चरम पर था और लाखों पर्यटक घाटी की खूबसूरती का लुत्फ उठाने आए हुए थे। आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को पहचान पूछकर मार डाला, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। किसी की नई-नई शादी हुई थी, तो कोई वर्षों की बचत से परिवार को सैर कराने लाया था। इस घटना ने पूरे देश को आक्रोशित कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, पाकिस्तान की भूमिका पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।
सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक बुलाई गई, जिसमें ऐतिहासिक फैसले लिए गए।
- सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
- पाकिस्तान में भारतीय दूतावास को बंद करने का आदेश।
- अटारी बॉर्डर सील कर दिया गया।
- पाकिस्तानी राजनयिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का निर्देश।
विकास की राह पर था कश्मीर
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में हालात बेहतर हुए थे। आँकड़े इसकी पुष्टि करते हैं:
- 2024-25 में रीयल GSDP 7.06% रहने का अनुमान।
- नॉमिनल GSDP ₹2.65 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान।
- 2019-2025 के बीच CAGR 4.89%।
- प्रति व्यक्ति आय (PCI) ₹1,54,703, जो 10.6% की वार्षिक वृद्धि है।
- आतंकी घटनाओं में 99% की गिरावट: 2018 में 228 से घटकर 2023 में 46।
21,000 करोड़ की पर्यटन अर्थव्यवस्था पर खतरा
पर्यटन कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार है।
- GSDP में 7-8% योगदान पर्यटन से आता है।
- ₹2.65 लाख करोड़ GSDP का 7% मतलब लगभग ₹18,500–₹21,200 करोड़ का सालाना टूरिज्म वैल्यू।
- सरकार की योजना थी इस हिस्सेदारी को 15% तक ले जाने की।
परंतु इस हमले के बाद:
- पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है।
- खासतौर पर पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले घरेलू पर्यटक प्रभावित हुए हैं।
- 2024 में 2.36 करोड़ पर्यटक आए थे, जिनमें 65,000 विदेशी भी शामिल थे। 2025 की शुरुआत में ही श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में 8.14 लाख लोग आए थे।
किन 10 सेक्टर्स पर होगा प्रभाव
- पर्यटन: होटल, टैक्सी, गाइड, लोकल दुकानें – सब पर सीधा असर।
- निवेश: 1.63 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर संकट।
- राष्ट्रीय GDP में योगदान: J&K का 0.8% योगदान और घट सकता है।
- प्रति व्यक्ति आय में गिरावट का खतरा।
- सेवाओं का GSVA (61.7%) प्रभावित होगा।
- निर्माण क्षेत्र (18.3% GSVA) रुक सकता है।
- 971 इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स (₹28,400 करोड़ की योजना) अटक सकते हैं।
- बैंकिंग और कर्ज वसूली पर असर, डिफॉल्ट बढ़ने की आशंका।
- कृषि और बागवानी की मौसमी बिक्री प्रभावित होगी।
- बेरोजगारी फिर से बढ़ने का खतरा। स्टार्टअप ईकोसिस्टम पर भी असर।
निवेशकों का भरोसा डगमगाया
शांति के चलते जिन निवेशकों ने कश्मीर का रुख किया था, अब उनके मन में डर बैठ गया है।
- विदेशी निवेश के प्रस्ताव अटक सकते हैं।
- हैंडलूम, हस्तशिल्प, एपल प्रोसेसिंग यूनिट जैसे सेक्टरों पर खास असर।
क्या होगा आगे?
भारत सरकार की नीति स्पष्ट है: आतंकियों को सख्त जवाब देना और कश्मीर को दोबारा प्रगति की ओर लौटाना। परंतु इसमें स्थानीय लोगों की सहभागिता, सुरक्षा बलों की जवाबदेही और निवेशकों का भरोसा तीनों जरूरी हैं।
निष्कर्ष:
पहलगाम हमला सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि आर्थिक हमले के रूप में भी देखा जाना चाहिए। यह हमला केवल 26 जानें नहीं ले गया, बल्कि कश्मीर की उभरती तस्वीर को धुंधला कर गया। देश और दुनिया को अब मिलकर यह तय करना होगा कि घाटी में विकास की गूंज हो – ना कि गोलियों की आवाज़।
