फिरोजपुर झिरका जलसे में बीजेपी नेता सुरेंद्र सिंह पिंटू की मौजूदगी ने बढ़ाया आपसी सौहार्द — बोले, “धर्मों का सम्मान ही असली इंसानियत”

फिरोजपुर झिरका जलसे में बीजेपी नेता सुरेंद्र सिंह पिंटू की मौजूदगी ने बढ़ाया आपसी सौहार्द — बोले, “धर्मों का सम्मान ही असली इंसानियत”
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लेखक: संजय शर्मा (पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव)

फिरोजपुर झिरका (हरियाणा), 21. April 2025:

हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका कस्बे में आयोजित तीन दिवसीय तबलीगी इज्तिमा (धार्मिक जलसा) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह पिंटू की उपस्थिति ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि धर्म और राजनीति को जोड़ने की बजाय सामूहिक सौहार्द की मिसाल बनानी चाहिए। इस धार्मिक सम्मेलन में उनकी मौजूदगी ने मुस्लिम समुदाय के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है।

इस आयोजन में उनके साथ जिला महामंत्री जतिन बुसरी और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्पीकर आज़ाद मोहम्मद भी मौजूद थे। सुरेंद्र सिंह पिंटू ने मीडिया से बातचीत करते हुए न केवल आयोजन की सराहना की, बल्कि यह भी कहा कि “हमें एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए.“

धर्मों का सम्मान – समय की आवश्यकता

पिंटू ने कहा, “यहाँ अच्छाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी जा रही है। ऐसे आयोजनों की ज़रूरत आज के समाज को है। जब हम एक-दूसरे के पूजा स्थलों का उतना ही सम्मान करेंगे, जितना अपने धर्म के प्रति रखते हैं, तभी सच्चे अर्थों में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना पूरा होगा।”

उन्होंने कहा, “एक हिंदू को मस्जिद का उतना ही सम्मान करना चाहिए, जितना वह मंदिर का करता है, और एक मुसलमान को मंदिर का उतना ही आदर देना चाहिए, जितना वह मस्जिद का करता है। सेवा और सहिष्णुता ही असली धर्म है।”

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आमंत्रण को सौभाग्य बताया

जब पिंटू से पूछा गया कि क्या वे आयोजन के अंतिम दिन हजरत मौलाना साद की दुआ में शरीक होंगे, तो उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस आयोजन में आने का आमंत्रण मिला। मैं प्रयास करूंगा कि आखिरी दिन भी यहां हाज़िर रहूं। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।”

भाईचारे की अद्भुत मिसाल

जलसे के पहले ही दिन उपस्थित होकर पिंटू और उनके साथियों ने जो सौहार्द्रपूर्ण संदेश दिया है, वह न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। जब राजनीतिक और धार्मिक मंच एक साथ मिलकर सद्भाव की बात करें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आते हैं।

सुरेंद्र सिंह पिंटू ने मंच से कहा, “धर्म कभी बांटने की बात नहीं करता। धर्म जोड़ता है, सिखाता है कि हम इंसान पहले हैं। यदि हम एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करें, तो समाज में नफरत की कोई जगह नहीं रहेगी।”

धार्मिक कार्यक्रम में राजनीति नहीं, सेवाभाव

पिंटू की उपस्थिति को लेकर कुछ वर्गों ने सवाल भी उठाए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी उपस्थिति राजनैतिक नहीं बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से थी। “मैं यहां राजनीति करने नहीं आया, बल्कि यह दिखाने आया हूँ कि एक सच्चा नेता वही होता है, जो सबके सुख-दुख में साथ खड़ा हो,” उन्होंने कहा।

तबलीगी जलसे की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

फिरोजपुर झिरका का तबलीगी इज्तिमा हर वर्ष बड़े स्तर पर आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से धर्मगुरु और अनुयायी पहुंचते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को आत्मनिरीक्षण, शांति, सेवा और ईमानदारी की राह पर चलने का संदेश देना होता है।

इस वर्ष का जलसा और भी खास इसलिए रहा क्योंकि इसमें मुस्लिम और हिंदू समाज के नेताओं ने साथ मिलकर शिरकत की, जिससे समाज में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ।

आयोजन समिति से हुई चर्चा

पिंटू और जतिन बुसरी ने आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों से भी विस्तृत बातचीत की और उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “चाहे प्रशासनिक सहयोग हो या सामाजिक समर्थन, हम साथ हैं। इस तरह के आयोजनों से समाज को जोड़ने की दिशा में सार्थक कदम उठते हैं।”

मुस्लिम समुदाय में सकारात्मक प्रतिक्रिया

सुरेंद्र सिंह पिंटू की मौजूदगी को मुस्लिम समुदाय ने खुले दिल से सराहा। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि इससे एक अच्छा संदेश गया है और राजनीतिक नेताओं को इसी तरह समाज की विविधता का सम्मान करना चाहिए।

नफरत नहीं, मोहब्बत की राजनीति होनी चाहिए

पिंटू ने अंत में मीडिया से कहा, “यह समय है जब हमें नफरत नहीं, मोहब्बत की राजनीति करनी चाहिए। अगर हम बच्चों को भविष्य देना चाहते हैं, तो उन्हें एक ऐसा समाज देना होगा, जहां धर्म, जाति या भाषा के नाम पर भेदभाव न हो।”

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