व‍िशाखापत्तनम वनडे से पहले टीम इंडिया में बेचैनी, ओस बनेगी सबसे बड़ा दुश्मन? कोच का दर्द छलका

“व‍िशाखापत्तनम वनडे से पहले टीम इंडिया में बेचैनी, ओस बनेगी सबसे बड़ा दुश्मन? कोच का दर्द छलका”
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व‍िशाखापत्तनम वनडे से पहले टीम इंडिया जीत के दबाव में, ओस और हालिया हारें सिरदर्द।

व‍िशाखापत्तनम वनडे के ठीक पहले टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम शांत तो है, लेकिन उसके भीतर एक ऐसी बेचैनी तैर रही है, जिसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं। भारत साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 0-2 से हार चुका है और अब तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। ऐसे में शनिवार को वाइजैग में होने वाला तीसरा वनडे दोनों टीमों के लिए फ़ाइनल जैसा हो चुका है— जहां सिर्फ मैच नहीं, बल्कि मानसिकता की परीक्षा होगी।

टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में साफ स्वीकार किया— “हाँ, टेस्ट मैचों की हार ने टीम के भीतर बेचैनी पैदा की है। खिलाड़ी समझते हैं कि वह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि जवाब देना चाहते हैं।”

दबाव नहीं, बल्कि जवाब की तलाश

डोशेट की आवाज़ में अनुभव था, लेकिन शब्दों में दर्द। उन्होंने कहा:

“भारत में या भारत के लिए खेलते हुए दबाव कभी खत्म नहीं होता। यहां हर मैच से उम्मीद जुड़ी होती है और अगर लगातार कुछ हारें हो जाएं तो स्वाभाविक है कि टीम के अंदर एक नर्वस एनर्जी बनती है। अभी टीम उसी को प्रोसेस में बदल रही है।”

केएल राहुल की कप्तानी में टीम इंडिया ने रांची में पहला वनडे 17 रन से जीता था। मगर रायपुर में अफ्रीका ने वापसी करते हुए 4 विकेट से मैच छीन लिया। अब वाइजैग वह जगह है जहां या तो टीम इंडिया हार की लकीर मिटाएगी या बेचैनी और लंबी हो जाएगी।

ओस—इकलौती चीज़ जिसने रणनीति हिला दी

डोशेट ने साफ कहा कि ओस (Dew Factor) इस सीरीज का सबसे निर्णायक पहलू है।

“ओस हमारी गलती नहीं, लेकिन इसे मैनेज करना हमारी जिम्मेदारी है। अगर दूसरी पारी में गेंदबाज़ी करनी पड़ी तो चुनौती काफी बड़ी हो जाती है। गेंद फिसलती है, ग्रिप नहीं मिलती और मैदान छोटे होने के कारण रन रोकना मुश्किल होता है।”

उन्होंने आगे जोड़ा:

“हम जानते हैं कि यह हाई-स्कोरिंग ग्राउंड है। यहां बाउंड्री छोटी हैं और बल्लेबाज अगर सेट हो जाए तो गेंदबाजों का दिन मुश्किल होता है। इसलिए लक्ष्य ही रणनीति तय करेगा।”

क्या शुरुआती समय बदलने से फर्क पड़ेगा?

जब उनसे पूछा गया कि क्या मैच 1.30 बजे की बजाय पहले शुरू कराया जाए ताकि ओस का असर कम हो, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:

“यह सुझाव शानदार है, लेकिन ब्रॉडकास्टिंग इस पर निर्णय लेती है। ओस दूसरी पारी के शुरू होते ही गिरती है और अंत तक रहती है।”

डोशेट ने यह भी बताया कि टीम batting के दौरान इस फैक्टर को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है।

“350 नया नॉर्मल स्कोर है” — कोच

पहले मैच में भारत ने सोचा कि 320 सुरक्षित स्कोर होगा, फिर लक्ष्य बढ़ाकर 350 तक सोचा गया।

“हम हमेशा अपनी बैटिंग यूनिट से कहते हैं कि स्कोर मैक्सिमम करो। टी20 की मानसिकता अब वनडे में घुस चुकी है। अगर हालात मुश्किल हों, तो भी रास्ता निकालो— यही इंटरनेशनल क्रिकेट है।”

वाइजैग का इतिहास कहता है— यहां मैच बदलते हैं

विजाग सिर्फ एक मैदान नहीं, भारत की भावनाओं का हिस्सा है। यहीं विराट कोहली ने डबल सेंचुरी बनाई थी। यहीं युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव ने विरोधियों को स्पिन-जाल में उलझाया था।

यह वही फील्ड है जहां हार और जीत कभी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि कहानी बन जाती है।

मैदान छोटा है, विकेट फ्लैट है और हवा में नमी बल्ले को फायदा देती है— इसलिए डोशेट इसे “High Risk–High Reward” वेन्यू बताते हैं।

टीम कॉम्बिनेशन— क्या बदलाव होंगे?

हालांकि डोशेट ने प्लेइंग XI का चेहरा खोलने से इनकार किया, लेकिन संकेत मिले कि गेंदबाजी यूनिट में बदलाव हो सकता है, खासकर डेथ ओवर्स में। उन्होंने कहा:

“हमारी सोच सरल है— जो खिलाड़ी परिस्थितियों से तेजी से एडजस्ट करेगा, वही खेलेगा।”

मतलब साफ है— वाइजैग में अनुभव से ज्यादा execution मायने रखेगा।

वनडे, लेकिन दांव वर्ल्ड कप जैसा

जो लोग सोच रहे हैं कि यह सिर्फ द्विपक्षीय सीरीज है, उन्हें समझना होगा — भारत यह सीरीज हारता है तो आलोचनाओं का तूफान तय है।

IPL की दुनिया में खिलाड़ी स्टार बनते हैं, लेकिन भारतीय जर्सी में प्रदर्शन ही असली पहचान बनता है।

इसलिए यह मैच सिर्फ scoreboard नहीं बदलेगा… यह narrative बदलेगा।

क्या भारत जीत की राह पर लौटेगा?

ड्रेसिंग रूम में एक पंक्ति सुनी गई —
“Not just a match… It’s a statement game.”

यानी यह मुकाबला टीम इंडिया के जज्बे, धैर्य और रणनीति की परीक्षा है।

ओस से निपटना, दबाव संभालना और सही फैसले लेना— यही तय करेगा कि भारत सीरीज जीतेगा या अफ्रीका फिर वापसी करके भारत की planning तोड़ देगा।

निष्कर्ष — वाइजैग सिर्फ मैच नहीं, मोड़ है

भारतीय टीम चाहे कुछ भी कहे, सच यही है — मन में हार की चुभन अभी भी बाकी है और इस मैच को जीतना टीम इंडिया के लिए सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि सम्मान, मनोस्थिति और भविष्य की दिशा तय करने जैसा है।

शनिवार को दुनिया सिर्फ एक मैच नहीं देखेगी—
वह यह भी देखेगी कि भारत हार से टूटता है या उससे लड़ना सीखता है।

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