लोकसभा चुनाव 2024 के सातवें और अंतिम चरण की वोटिंग के बाद, इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए हैं। एग्जिट पोल के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का दबदबा कायम है।
एग्जिट पोल के अनुमान
एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 67 से 72 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को 8 से 12 सीटें मिल सकती हैं। बसपा को केवल 0 से 1 सीट मिलने का अनुमान है। वोट शेयर के मामले में, एनडीए को 49% वोट, इंडिया गठबंधन को 39%, और बसपा को 8% वोट मिलने की संभावना है।
पिछला चुनाव परिणाम और वोट शेयर
2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 64 सीटें जीती थीं, जिसमें बीजेपी को 62 और अपना दल (एस) को 2 सीटें मिली थीं। सपा और बसपा गठबंधन को 15 सीटें मिली थीं, जिसमें बसपा ने 10 और सपा ने 5 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को केवल रायबरेली सीट पर जीत मिली थी।
एग्जिट पोल के आंकड़े
इस बार के एग्जिट पोल में एनडीए की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जबकि बसपा को बड़ा नुकसान हो रहा है। 2019 में बसपा ने 10 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार वह एक सीट भी जीतती नजर नहीं आ रही है। वहीं, कांग्रेस को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे वास्तविक परिणामों से बेहतर होंगे और तीसरी बार मोदी सरकार बनेगी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि एग्जिट पोल में शामिल होकर भाजपा और उसके तंत्र को बेनकाब करेंगे।
महत्वपूर्ण सीटें
उत्तर प्रदेश की वीआईपी सीटों में वाराणसी (पीएम मोदी), रायबरेली (राहुल गांधी), अमेठी (स्मृति ईरानी), कन्नौज (अखिलेश यादव), लखनऊ (राजनाथ सिंह), गोरखपुर (रवि किशन), आजमगढ़ (धर्मेंद्र यादव) और मेरठ (अरुण गोविल) शामिल हैं।
अन्य राज्यों का हाल
मध्य प्रदेश में बीजेपी को सभी 29 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि बिहार में भी एनडीए की बढ़त बनी हुई है।
एग्जिट पोल के नतीजे उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं। अगर एग्जिट पोल के नतीजे वास्तविक नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह बीजेपी के लिए एक बड़ी जीत साबित होगी और विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा झटका होगा।
