विशेष मुख्य की चुरीया कहानी
हरियाणा के यमुनानगर जिले के खंड रादौर के हाफिजपुर गांव के मधुमक्खी पालक और प्रगतिशील किसान सुभाष कांबोज को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर एक विशेष गौरव प्राप्त होगा। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में वे वीआईपी गैलरी में बैठकर इस ऐतिहासिक परेड के साक्षी बनेंगे। केंद्र सरकार ने उन्हें इस विशिष्ट आयोजन में आमंत्रित किया है, जिसमें वे 25 से 28 जनवरी तक भारत सरकार के विशेष अतिथि रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही मन की बात कार्यक्रम में उनकी सराहना की थी। उनके मेहनत और लगन ने उन्हें न सिर्फ किसानों का प्रेरणास्त्रोत बनाया है, बल्कि पूरे देश में उनके मधुमक्खी पालन कार्य को सराहा गया है।
गणतंत्र दिवस परेड के गौरवशाली मेहमान
सुभाष कांबोज को केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण पत्र भेजकर गणतंत्र दिवस समारोह में आमंत्रित किया है। दिल्ली में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम उनके जीवन का एक सुनहरा अध्याय बनने जा रहा है। इस विशेष यात्रा के दौरान उन्हें दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत: 25 जनवरी को होगा दिल्ली में स्वागत
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुभाष कांबोज 25 जनवरी को दिल्ली पहुंचेंगे। 25 से 28 जनवरी तक वे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जिनमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र भी शामिल है।
मन की बात में दूसरा उल्लेख: प्रगतिशीलता की पहचान
सुभाष कांबोज का नाम पहली बार 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में लिया था। इसके बाद, 31 जुलाई 2022 को एक बार फिर उन्होंने कांबोज के मधुमक्खी पालन में योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा। प्रधानमन्दिता की बात, कांबोज का काम देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिक तरीकों से आत्मनिर्भर बनने की उनकी मेहनत को सभी किसानों के लिए उदाहरण बताया।
कीसान चौकानीक का विकास
सुभाष कांबोज का मधुमक्खी पालन का सफर प्रेरणादायक है। एक समय निजी स्कूल में शिक्षक रहे कांबोज ने 1996 में इस पेशे को छोड़ा और केवल छह बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की। आज उनके पास दो हजार से अधिक मधुमक्खी पालन बॉक्स हैं। उनका शहद सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका तक पहुंचता है।
आधुनिक जीवनोमें
- व्यापार की चुनौती: कांबोज ने वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग करते हुए मधुमक्खी पालन को एक नई दिशा दी है। उन्होंने अब तक एक हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान: कांबोज के शहद की मांग अमेरिका, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे विभिन्न राज्यों और देशों में है। विशेष रूप से सरसों के फूलों से तैयार उनका शहद अमेरिका में काफी लोकप्रिय है।
सम्मान और उपलब्धियां
कांबोज को चौधरी चरण सिंह एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार, कृषि विज्ञान केंद्र दामला, और आईबीडीसी रामनगर जैसे प्रतिष्ठित संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, उन्हें राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा भी कई अवसरों पर सम्मानित किया गया है।
कैसे हुआ मधुमक्खी पालन को एक प्रोफेशनल के रूप में ढालने का प्रयास
- सुभाष कांबोज का संदेश साफ है: कड़ी मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
- वे यह मानते हैं कि सरकार की नीतियां, अगर सही तरीके से लागू की जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए चमत्कार कर सकती हैं।
गणतंत्र दिवस की उम्मीदें और खुशी
सुभाष कांबोज गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनके लिए यह अवसर एक विशेष उपलब्धि है, जहां वे न केवल इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनेंगे, बल्कि अपने योगदान और मेहनत का भी जश्न मनाएंगे।
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निष्कर्ष
सुभाष कांबोज की कहानी साबित करती है कि नई सोच और मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है। उनका गणतंत्र दिवस परेड में वीआईपी गैलरी का हिस्सा बनना हर किसान के लिए एक प्रेरणा है। यह मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
