जनसंपर्क के माध्यम से किरण चौधरी ने किए 5 बड़े सवाल, प्रशासन को सौंपी नई चुनौती

जनसंपर्क के माध्यम से किरण चौधरी ने किए 5 बड़े सवाल, प्रशासन को सौंपी नई चुनौती
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जनप्रतिनिधि की खरी-खरी: फोन न उठाने पर एसडीएम कार्यालय पहुंची राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी

गांव की समस्याओं के समाधान में उदासीनता पर फूटा गुस्सा

राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी ने बुधवार को बाढड़ा क्षेत्र में प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। एक साधारण सी स्थिति—फोन कॉल न उठाने की बात—ने बड़ा रूप ले लिया, जब किरण चौधरी स्वयं बाढड़ा एसडीएम कार्यालय पहुंच गईं और अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों से जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने और अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार बने रहने की सख्त हिदायत दी।

कहानी की शुरुआत: फोन न उठाने पर हुआ असंतोष

किरण चौधरी गांव जगरामबास के दौरे पर थीं, जहां उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। गांव की कच्ची गलियों में जलभराव और फिरनी निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने तत्काल एसडीएम से संपर्क करने का प्रयास किया। परंतु एसडीएम ने न तो उनका फोन उठाया और न ही कोई उपयुक्त जवाब दिया। बताया गया कि एसडीएम ने मैसेज के माध्यम से खुद को व्यस्त बताया, जिससे किरण चौधरी का असंतोष बढ़ गया।

सीधा संवाद: एसडीएम कार्यालय में पहुंची किरण चौधरी

एसडीएम की इस उदासीनता के बाद किरण चौधरी जनता के बीच से उठकर सीधे उनके कार्यालय पहुंच गईं। कार्यालय में पहुंचते ही उन्होंने एसडीएम को कड़ी फटकार लगाई और समझाया कि फोन उठाना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “हम सब जनता के नौकर हैं और हमें उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।” उनकी इस तल्ख टिप्पणी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

अधिकारियों को दी नसीहत: हर माह खुले दरबार लगाने की सलाह

इस मौके पर किरण चौधरी ने अधिकारियों को जनहित के कामों में सक्रियता दिखाने और हर माह एक खुला दरबार आयोजित करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यह एक अच्छा संकेत नहीं है कि अधिकारी न तो जनता की समस्याओं को सुनते हैं और न ही उनके समाधान की कोशिश करते हैं।” उन्होंने एसडीएम को जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने और हर फरियादी का फोन तुरंत रिसीव करने का निर्देश दिया।

जनसमस्याओं की लंबी फेहरिस्त

किरण चौधरी के दौरे के दौरान बाढड़ा व झोझूकलां पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने कई शिकायतें उठाईं। इनमें विकास योजनाओं के भुगतान में लापरवाही, जलभराव, टूटी सड़कों और स्वच्छता संबंधित समस्याएं शामिल थीं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन विकास कार्यों में देरी कर रहा है और उनकी शिकायतों को अनसुना कर रहा है।

एसडीएम का पक्ष: सुनवाई कार्य में व्यस्तता का दिया तर्क

विवाद पर एसडीएम ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह एक सुनवाई प्रक्रिया में व्यस्त थे, जिसके कारण फोन नहीं उठा सके। हालांकि, किरण चौधरी ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा, “ड्यूटी के समय में लापरवाही करना या आवश्यक कॉल्स को नजरअंदाज करना अस्वीकार्य है।” उनकी इस बात ने अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली पर आत्मचिंतन करने के लिए मजबूर कर दिया।

मुख्य सचिव को अवगत कराने की चेतावनी

बाढ़ड़ा और आसपास के इलाकों में अधिकारियों द्वारा विकास योजनाओं में लापरवाही और ग्रामीणों की शिकायतों के समाधान में कोताही को लेकर किरण चौधरी ने इस मामले को हरियाणा के मुख्य सचिव के समक्ष उठाने का वादा किया। उन्होंने कहा, “जनता की सेवा में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैं इस मामले को राज्य के शीर्ष अधिकारियों तक ले जाऊंगी।”

ग्रामीणों का समर्थन: “हमारी आवाज बनें”

जगरामबास गांव के लोगों ने किरण चौधरी की इस पहल की सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि उनके जैसे जनप्रतिनिधि ही उनकी समस्याओं को समझ सकते हैं और समाधान के लिए प्रयास कर सकते हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में चौधरी का समर्थन किया।

समस्या की जड़: प्रशासन और जनता के बीच संवादहीनता

इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और जनता के बीच बढ़ती दूरी को उजागर किया है। अधिकारियों का जनता की समस्याओं से कटाव और संवेदनहीनता प्रशासनिक विफलता का एक बड़ा कारण बन रही है।

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अगले कदम: क्या होगा प्रशासन का उत्तरदायित्व?

किरण चौधरी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए उनकी कार्यशैली में सुधार करने और जनता की सेवा में तत्परता दिखाने की नसीहत दी। उन्होंने सभी को यह स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले को गंभीरता से लेंगी और जनता के हित में कोई समझौता नहीं होगा।

समापन: एक सबक और नई उम्मीद

यह घटना उन सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक सबक है, जो अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते हैं। किरण चौधरी के इस साहसिक कदम से जनता को नई उम्मीद मिली है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उनकी समस्याओं का समाधान होगा। उम्मीद है कि यह प्रयास प्रशासन और जनता के बीच संवाद को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

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