राज्यसभा उपचुनाव 2024: निर्विरोध चुनकर BJP ने मारी बाज़ी, रवनीत बिट्टू, उपेंद्र कुशवाहा और मनन मिश्रा का जीत का सफर

राज्यसभा उपचुनाव 2024: निर्विरोध चुनकर BJP ने मारी बाज़ी, रवनीत बिट्टू, उपेंद्र कुशवाहा और मनन मिश्रा का जीत का सफर
Spread the love

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में राज्यसभा उपचुनाव से पहले ही तीन सीटें आ चुकी हैं। असम, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, त्रिपुरा, तेलंगाना और ओडिशा की 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले ही बीजेपी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें राजस्थान से रवनीत सिंह बिट्टू, बिहार से उपेंद्र कुशवाहा और मनन कुमार मिश्रा का नाम शामिल है। यह उपचुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद जो सदस्य चुने जाएंगे, वे निवर्तमान सदस्यों के बाकी बचे कार्यकाल के लिए राज्यसभा में जाएंगे।

निर्विरोध जीत की कहानी: कैसे हुआ BJP का कब्जा?

राज्यसभा उपचुनाव में कुल 12 सीटों के लिए वोटिंग होनी थी, लेकिन बीजेपी ने पहले ही तीन सीटों पर कब्जा जमा लिया है। इस तरह से चुनाव से पहले ही बीजेपी का खाता खुल गया है। बिहार से उपेंद्र कुशवाहा और मनन कुमार मिश्रा और राजस्थान से रवनीत सिंह बिट्टू को निर्विरोध चुन लिया गया है। बिहार में जीतने के बाद दोनों उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिष्टाचार मुलाकात की।

इस जीत को लेकर बीजेपी के भीतर खुशी की लहर है, क्योंकि विपक्ष के बीच आपसी सहमति के अभाव ने बीजेपी के उम्मीदवारों की राह आसान कर दी। यह जीत न सिर्फ बीजेपी के राजनीतिक रणनीतिकारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संदेश है।

राज्यसभा उपचुनाव: कौन-कौन सी सीटें और कौन से राज्य?

इस बार के उपचुनाव में 9 राज्यों की 12 सीटों पर चुनाव होने थे। इनमें असम, बिहार और महाराष्ट्र की दो-दो सीट, जबकि हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, त्रिपुरा, तेलंगाना और ओडिशा की एक-एक सीट शामिल हैं। ये सीटें तब खाली हुईं जब निवर्तमान सदस्य लोकसभा के लिए चुने गए या फिर उन्होंने इस्तीफा दिया। इनमें असम से कामाख्या प्रसाद ताशा और सर्वानंद सोनोवाल, बिहार से मीसा भारती और विवेक ठाकुर, हरियाणा से दीपेंद्र हुड्डा, मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र से छत्रपति उदयन राजे भोसले और पीयूष गोयल, राजस्थान से केसी वेणुगोपाल, त्रिपुरा से बिप्लब देब, तेलंगाना से केशव राव, और ओडिशा से ममता मोहंता शामिल हैं।

इस उपचुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी थी, जिसमें 21 अगस्त को नामांकन की अंतिम तिथि और 27 अगस्त को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तय की गई थी। मतदान 3 सितंबर को होना है और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।

रवनीत सिंह बिट्टू: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर

रवनीत सिंह बिट्टू, जो पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता थे, अब बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा में जा रहे हैं। लुधियाना से लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें मोदी कैबिनेट 3.0 में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। बिट्टू का राजनीतिक सफर तब शुरू हुआ जब उन्होंने 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात की। उससे पहले बिट्टू एक सीमेंट प्रोडक्शन यूनिट चलाते थे। 2009 में वे पहली बार आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे और फिर 2014 व 2019 में लुधियाना से जीते। उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी में कठिनाइयाँ भी रहीं, जब उनके पिता की मौत हुई और उनके दादा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों द्वारा हत्या कर दी गई थी।

उपेंद्र कुशवाहा: बिहार की राजनीति का दमदार चेहरा

बिहार के उपेंद्र कुशवाहा, जिन्होंने हाल ही में लोकसभा चुनावों में काराकाट सीट से हार का सामना किया था, अब राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। कुशवाहा की राजनीतिक यात्रा 1985 में शुरू हुई थी, जब वे युवा लोकदल के राज्य महासचिव बने थे। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया, जैसे कि बिहार विधान परिषद और विधानसभा के सदस्य, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य और केंद्र में मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं। कुशवाहा को बिहार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है और उनकी राजनीतिक यात्रा हमेशा से ही विवादों और चुनौतियों से भरी रही है।

मनन कुमार मिश्रा: कानून के क्षेत्र से राज्यसभा तक

मनन कुमार मिश्रा, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सात बार के अध्यक्ष रहे हैं, अब राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। मिश्रा का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के तिवारी खरेया गांव में हुआ था। अप्रैल 2012 से वे लगातार बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनके चुनाव से बीजेपी ने यह संदेश दिया है कि पार्टी कानून के क्षेत्र में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

राज्यसभा उपचुनाव 2024: क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?

राज्यसभा उपचुनाव 2024 का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि ये चुनाव 2025 से 2028 के बीच के कार्यकाल के लिए हैं। इससे यह साफ है कि जो सदस्य अब चुने जाएंगे, वे अगले कुछ सालों तक नीतिगत निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बीजेपी का यह जीतना यह भी संकेत देता है कि पार्टी राज्यसभा में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रही है, जिससे उसे संसद के दोनों सदनों में प्रभावी जनादेश मिलता है।

राज्यसभा उपचुनाव का परिणाम: बीजेपी का बढ़ता प्रभाव

इस चुनाव के पहले ही तीन उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना बीजेपी के लिए एक बड़ी सफलता है। यह न सिर्फ पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि आने वाले समय में इसे बड़ी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी का यह जीतना यह भी संकेत देता है कि पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत करने में जुटी है, चाहे वह किसी भी राज्य में हो।

राज्यसभा के इस उपचुनाव का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यह आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी एक तरह का संकेत हो सकता है। विपक्ष के बिखराव के चलते बीजेपी ने यह बढ़त हासिल की है, और यह बढ़त आने वाले समय में और भी निर्णायक साबित हो सकती है।

इस जीत के साथ, बीजेपी ने राज्यसभा में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है और यह साफ हो गया है कि पार्टी आने वाले समय में और भी बड़ी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *