पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल एक बार फिर चरम पर है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर से हुए कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आमने-सामने ला खड़ा किया है। एक तरफ, BJP ने इस घटना के विरोध में बंगाल बंद का ऐलान किया, तो दूसरी तरफ, TMC ने हर ब्लॉक में धरना प्रदर्शन की तैयारी की है। राजनीतिक संघर्ष की यह जंग अब बंगाल की हर गली-मुहल्ले में दिखाई दे रही है।
TMC का बड़ा ऐलान: BJP के बंद के खिलाफ हर ब्लॉक में धरना
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 8-9 अगस्त की रात को एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या की वारदात ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। इसके बाद, BJP ने इस घटना के विरोध में बंगाल बंद का ऐलान किया, जिसे लेकर सियासी पारा चरम पर है। इसके जवाब में, TMC ने 31 अगस्त को राज्य के हर ब्लॉक में धरना देने का ऐलान किया है। TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बुधवार को अपनी पार्टी की छात्र शाखा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि “BJP ने जानबूझकर बंद बुलाया। वो बंगाल की सड़कों पर लाशें देखना चाहते हैं। इसके विरोध में, हम 31 अगस्त को धरना और रैलियां करेंगे।”
महिलाओं और छात्राओं की अगुवाई में होगा प्रदर्शन
ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि एक सितंबर को राज्य भर की छात्राएं और महिलाएं आरोपी के लिए फांसी की सजा और मौजूदा कानूनों में संशोधन की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगी। इसी के तहत, TMC के छात्र संघ ने 30 अगस्त को बलात्कार के आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए कॉलेजों के बाहर प्रदर्शन भी किया।
विधानसभा में होगा कानून संशोधन पर विचार
विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने जानकारी दी कि TMC की योजना 2 सितंबर को एक विशेष कमेटी की बैठक बुलाने की है, जिसमें रेप के लिए सख्त सजा से संबंधित बिल को पेश करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। बिमान बनर्जी ने कहा, “2 सितंबर की बैठक में तय होगा कि विशेष सत्र में इस बिल को कब पेश किया जाए।”
TMC सांसद सायानी घोष ने भी BJP के बंद पर पलटवार करते हुए कहा, “BJP बंद बुलाती है तो अब TMC भी सड़क पर उतरकर ही जवाब देगी।” इससे साफ है कि दोनों दलों के बीच सियासी टकराव बढ़ता ही जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने किया ममता पर पलटवार
इस सियासी घमासान के बीच, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ममता बनर्जी की चिट्ठियों पर पलटवार किया है। उन्होंने एक पत्र के जरिए ममता बनर्जी को याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में 11 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) अभी तक चालू नहीं हैं, जो गंभीर बलात्कार और POCSO मामलों में न्याय देने के लिए हैं।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “पश्चिम बंगाल में 88 फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTSC) स्थापित किए गए हैं, लेकिन ये संख्या केंद्र सरकार की योजना के तहत कवर किए गए FTSC के बराबर नहीं है।” उन्होंने कहा कि राज्य ने FTSC को चालू करने में देरी को छिपाने के लिए इस तरह के कदम उठाए हैं।
FAIMA का जंतर-मंतर पर धरना: डॉक्टरों का गुस्सा फूटा
इस सियासी विवाद के बीच, शनिवार को फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के उपाध्यक्ष और एम्स नई दिल्ली के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. सुवर्णकर दत्ता ने जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “हम आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के खिलाफ और अपने सहयोगी के लिए न्याय की मांग के लिए 31 अगस्त को जंतर-मंतर पर एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे।”
FAIMA ने केंद्र सरकार से स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक केंद्रीकृत सुरक्षा अधिनियम की भी मांग की है। डॉ. दत्ता ने डॉक्टरों से अपील की कि वे 5 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उनका कहना है, “हम अपनी बहन के लिए न्याय की मांग करते हुए एकजुट हैं और देश भर के अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हैं।”
NHRC ने कोलकाता पुलिस को जारी किया नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्याकांड में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के कथित अत्यधिक और क्रूर बल प्रयोग को लेकर कोलकाता पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। NHRC ने यह नोटिस एक आपी व्यास की शिकायत के बाद जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि 27 अगस्त को कोलकाता में “नबन्ना अभिजन” विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने अत्यधिक और क्रूर बल का प्रयोग किया और 200 से ज्यादा छात्रों को गिरफ्तार कर लिया।
8-9 अगस्त की रात: क्या हुआ था उस रात?
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के आरोपी संजय रॉय ने 8-9 अगस्त की रात को चार बार अलग-अलग बहानों से अस्पताल में प्रवेश किया। पहली तीन बार वह अस्पताल में घूमकर बाहर निकल आया, लेकिन चौथी बार जब वह बाहर निकला, तो उसके खिलाफ रेप और हत्या के आरोप लग चुके थे। जांच में यह भी पाया गया कि संजय रॉय वारदात वाली रात अस्पताल के पास के एक रेड लाइट एरिया में भी गया था और वहां से लौटते समय उसने एक लड़की से छेड़छाड़ की थी।
क्या यह सियासी खेल का हिस्सा?
इस घटना के बाद से बंगाल की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। TMC और BJP, दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रही हैं। जहाँ BJP ने ममता सरकार को घेरने के लिए बंगाल बंद का आह्वान किया, वहीं TMC ने हर ब्लॉक में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है।
BJP के बंगाल बंद का असर: सड़कें बनीं सियासी रणभूमि
BJP के बंगाल बंद के दौरान कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में सड़कें सियासी रणभूमि बन गईं। BJP कार्यकर्ताओं ने सरकारी दफ्तरों, बाजारों और सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर, आंसू गैस के गोले छोड़े और कई BJP नेताओं को हिरासत में लिया। BJP के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार और सांसद लॉकेट चटर्जी को भी गिरफ्तार किया गया।
क्या होगा आगे?
इस सियासी संग्राम का नतीजा क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। बंगाल की सड़कों पर यह सियासी लड़ाई किस ओर मोड़ेगी, यह भी एक बड़ा सवाल है। एक तरफ, जहां TMC ने कानून में संशोधन और कड़े कदम उठाने की बात कही है, वहीं BJP ममता सरकार को घेरने की कोशिश में जुटी है।
महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर उठे इस मामले ने न सिर्फ बंगाल की सियासत को गरमाया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे लेकर बहस छिड़ गई है। अब यह देखना होगा कि इस राजनीतिक संघर्ष का अंत किस रूप में होता है और क्या बंगाल की सड़कों पर सियासी महायुद्ध खत्म होगा या यह संघर्ष और भी गहरा जाएगा।
क्या सिर्फ प्रदर्शन ही होगा समाधान?
बंगाल की सड़कों पर यह सवाल अब भी खड़ा है कि क्या सिर्फ प्रदर्शन ही समाधान है? क्या राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए? क्या बंगाल की सड़कों पर इसी तरह की तस्वीरें देखते रहेंगे? या फिर जनता को अपने सवालों के जवाब का इंतजार करना होगा?
राजनीति की इस लड़ाई के बीच, असली मुद्दा अभी भी वहीं खड़ा है – महिला सुरक्षा और न्याय। क्या बंगाल की राजनीति इस बार कुछ नया सबक सीखेगी, या यह भी एक और राजनीतिक खेल का हिस्सा बनकर रह जाएगी?
