संजय शर्मा, असंध।
हरियाणा के करनाल जिले में स्कूलों की छुट्टियां रद्द करने को लेकर प्राइवेट स्कूल संचालकों की एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। स्कूल संचालकों की एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर एक बैठक आयोजित की और इसके बाद असंध के विधायक योगेंद्र राणा को सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्कूल बंद करने के सरकार के फैसले को छात्रों और अभिभावकों के हितों के खिलाफ बताया गया।
एयर क्वालिटी के आधार पर लिया गया निर्णय, पर स्कूल संचालक असहमत
सरकार ने हाल ही में खराब वायु गुणवत्ता (Air Quality) के चलते स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया था। हालांकि, प्राइवेट स्कूल संचालकों की एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से छात्रों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
‘मौसम साफ है, फिर भी स्कूल बंद क्यों?’
स्कूल संचालकों की एसोसिएशन के प्रधान रिछपाल राणा ने कहा,
“अगर मौसम और वायु गुणवत्ता वाकई खराब होती, तो स्कूल बंद करने का फैसला जायज समझा जा सकता था। लेकिन जब मौसम साफ है और एयर क्वालिटी भी संतोषजनक है, तो इस तरह का निर्णय बच्चों की शिक्षा के लिए नुकसानदायक है।”
छुट्टियों से पढ़ाई और रूटीन पर पड़ रहा है असर
बैठक में शामिल अन्य स्कूल संचालकों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
- मोहिंदर श्योकंद, मास्टर पवन राणा, मास्टर नरेश राणा, और मास्टर सियाराम शर्मा ने कहा कि बार-बार छुट्टियों के कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि उनके दैनिक रूटीन पर भी असर पड़ रहा है।
- अभिभावकों की नाराजगी:
- अभिभावक शिकायत कर रहे हैं कि स्कूल बंद होने के कारण बच्चे घर पर पढ़ाई में ध्यान नहीं देते।
- बच्चों का रूटीन खराब हो जाता है और उनकी पढ़ाई में निरंतरता नहीं रहती।
- शिक्षकों और संचालकों की चिंता:
- छुट्टियों के चलते कक्षाएं नियमित रूप से नहीं चल पा रही हैं, जिससे छात्रों का सिलेबस अधूरा रह सकता है।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं का हवाला
स्कूल संचालकों ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट जारी हो चुकी है।
- उन्होंने सरकार से अपील की कि इन परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद न किया जाए।
- बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को नियमित कक्षाओं की जरूरत है, ताकि वे अपने पाठ्यक्रम को समय पर पूरा कर सकें।
बोर्ड परीक्षा से पहले छुट्टियां नुकसानदायक
स्कूल संचालकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा का समय नजदीक है, और बार-बार स्कूल बंद होने से छात्रों की तैयारी प्रभावित होगी।
“छात्रों को अंतिम समय पर सिलेबस पूरा करने का दबाव बढ़ सकता है। यह मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।”
छुट्टियां रद्द करने की मांग पर अभिभावकों का समर्थन
स्कूल संचालकों का कहना है कि अभिभावकों का भी यही मानना है कि छुट्टियां करने से बच्चों का शैक्षणिक विकास प्रभावित हो रहा है।
- अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल नियमित रूप से खुले रहें, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
- एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि स्कूल बंद होने के बाद बच्चे घर पर अनुशासनहीन हो जाते हैं, जिससे उनका ध्यान पढ़ाई से हट जाता है।
सरकार पर थोपा जा रहा है फैसला: एसोसिएशन
स्कूल संचालकों का आरोप है कि सरकार का यह निर्णय उचित नहीं है।
- उनका कहना है कि यह फैसला स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना लिया गया है।
- ‘स्थानीय मौसम ठीक है’:
- करनाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में मौसम और वायु गुणवत्ता सामान्य है।
- स्कूल बंद करने की जरूरत नहीं है।
सरकार को देना चाहिए पुनर्विचार का निर्देश
एसोसिएशन ने ज्ञापन में सरकार से अपील की है कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे।
“स्थानीय स्तर पर हालात की समीक्षा कर स्कूल बंद करने का निर्णय लेना चाहिए। सभी क्षेत्रों में एक जैसा फैसला लागू करना तर्कसंगत नहीं है।”
छात्रों के भविष्य के लिए स्थायी समाधान की मांग
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर एक स्थायी समाधान की मांग की है।
- उन्होंने कहा कि छात्रों की शिक्षा का नुकसान लंबे समय तक उनके भविष्य पर असर डाल सकता है।
- एसोसिएशन का सुझाव है कि सरकार ऑनलाइन कक्षाओं या वैकल्पिक शैक्षणिक योजनाओं पर विचार कर सकती है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
निष्कर्ष: सरकार से उम्मीद
एसोसिएशन ने विधायक योगेंद्र राणा के माध्यम से सरकार को यह संदेश दिया है कि स्कूल बंद करने जैसे फैसलों को लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
“छात्रों के शैक्षणिक हित और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार से हमारी यही अपील है कि छुट्टियों के इस निर्णय को तुरंत रद्द किया जाए।”
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस ज्ञापन पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या स्कूलों की छुट्टियों को लेकर कोई नई नीति बनाई जाएगी।
