करनाल: सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 25 लाख की साइबर ठगी, जानें कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम

करनाल: सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 25 लाख की साइबर ठगी, जानें कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम
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करनाल: हरियाणा के करनाल में साइबर ठगों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर एक व्यक्ति से 25 लाख रुपये की ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने पार्सल रद्द होने और आपराधिक केस में फंसाने की धमकी देकर यह धोखाधड़ी की।

सेक्टर-7 निवासी से साइबर ठगों ने रची साजिश

यह घटना करनाल के सेक्टर-7 निवासी गर्वित चुग के साथ हुई, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। गर्वित चुग ने बताया कि उन्हें 15 नवंबर को एक अनजान नंबर से फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उनका पार्सल रद्द कर दिया गया है और इस मामले में उन्हें एफआईआर दर्ज करने या मुंबई पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने को कहा गया।

स्काइप कॉल के जरिए “पुलिस अधिकारी” से संपर्क

घबराए हुए गर्वित चुग ने दिए गए निर्देशों का पालन किया और स्काइप पर एक वीडियो कॉल के माध्यम से उस कथित पुलिस अधिकारी से संपर्क किया। कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि चुग का नाम मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में फंसा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज दिखाकर बनाया दबाव

ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान गर्वित चुग को सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज दिखाए, जिन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर थे। इन दस्तावेजों को दिखाकर ठगों ने यह यकीन दिलाया कि यह मामला पूरी तरह से गंभीर और कानूनी है।

उन्होंने गर्वित को बताया कि अगर वह इस मामले को सार्वजनिक करते हैं या किसी को इसकी जानकारी देते हैं, तो उन्हें तीन से सात साल की सजा हो सकती है। साथ ही यह एक गैर-जमानती अपराध होगा, जिससे उन्हें तुरंत गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

गोपनीयता बनाए रखने की धमकी

ठगों ने गर्वित चुग को धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी से यह बात साझा की तो उन्हें और भी बड़े कानूनी मामलों में फंसा दिया जाएगा। ठगों ने उन्हें मामले को गोपनीय रखने के लिए मजबूर कर दिया और इसी दबाव में गर्वित ने उन्हें पैसे देने का निर्णय लिया।

अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 25 लाख रुपये की ठगी

डर और भ्रमित स्थिति में गर्वित चुग ने ठगों को चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। यह भुगतान आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से किया गया, जिससे ठगों ने आसानी से बड़ी राशि अपने खातों में ट्रांसफर कर ली।

ठगी का पता लगने पर पुलिस में शिकायत

जब गर्वित को इस ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत करनाल पुलिस से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर शुरू की जांच

करनाल पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगों ने बेहद चालाकी और तकनीकी तरीके से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।

करनाल साइबर क्राइम ब्रांच के प्रमुख ने बताया,

“यह मामला हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का है। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और पुलिस का नाम लेकर पीड़ित को भ्रमित किया। हम उन बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रहे हैं, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।”

कैसे बच सकते हैं ऐसी साइबर ठगी से?

यह घटना न केवल करनाल बल्कि पूरे देश में साइबर सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। आजकल सुप्रीम कोर्ट, पुलिस, बैंक, और अन्य संस्थानों के नाम पर लोगों को ठगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। यहां कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं ताकि आप इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकें:

  1. अज्ञात कॉल से सतर्क रहें: अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर सावधानी बरतें।
  2. कानूनी दस्तावेजों की जांच करें: अगर कोई आपको किसी कानूनी मामले में फंसाने की बात कहे तो पहले उन दस्तावेजों की सत्यता की जांच करें।
  3. किसी को जानकारी साझा करें: ऐसी स्थिति में अपने परिवार या मित्रों को तुरंत जानकारी दें।
  4. पुलिस से संपर्क करें: अगर कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।
  5. अपने बैंक खाते की सुरक्षा करें: किसी भी परिस्थिति में अपने बैंक डिटेल्स साझा न करें और बैंक से तुरंत संपर्क करें।

करनाल में बढ़ रहे साइबर अपराध

यह घटना करनाल में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करती है। साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में तेजी आई है। लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन बैंकिंग के प्रति अधिक निर्भर हो गए हैं, जिससे साइबर अपराधियों को ठगी के और अधिक अवसर मिल रहे हैं।

निष्कर्ष

गर्वित चुग के साथ हुई इस 25 लाख रुपये की साइबर ठगी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधियों की पहुंच कितनी खतरनाक हो सकती है। इस मामले की जांच कर रही पुलिस जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रही है। यह घटना लोगों के लिए एक चेतावनी है कि वे ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या ट्रांजेक्शन के प्रति जागरूक रहें।

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