हिसार में सियासी घमासान – जिंदल परिवार की मजबूत दावेदारी
हिसार की राजनीति में हाल ही में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब जिंदल परिवार ने अपने राजनीतिक वर्चस्व को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। भाजपा के अंदरूनी समीकरणों के बीच, जिंदल परिवार हिसार में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उन्होंने विधानसभा चुनावों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देकर जनता से समर्थन मांगा, लेकिन साथ ही, कई राजनीतिक विरोध भी सामने आए।
अमित शाह का हिसार दौरा – राजनीति और रणनीति का खेल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हिसार दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। जिंदल परिवार ने इस मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के एक कार्यक्रम में बुलाकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान महाराजा अग्रसेन की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिससे अग्रवाल समाज को साधने की रणनीति स्पष्ट हो गई। हालांकि, इस पूरे आयोजन के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि अमित शाह और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कैंसर अस्पताल प्रोजेक्ट को लेकर कोई ठोस बयान क्यों नहीं दिया।
कैंसर अस्पताल प्रोजेक्ट – तीन साल से अटका, सरकार की चुप्पी क्यों?
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कैंसर अस्पताल खोलने की योजना पिछले तीन वर्षों से अधर में लटकी हुई है। इस परियोजना को लेकर नवीन जिंदल ने अपने भाषण में सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा, लेकिन अमित शाह और मुख्यमंत्री ने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह चुप्पी कहीं न कहीं यह संकेत देती है कि भाजपा नेतृत्व इस प्रोजेक्ट पर स्पष्ट निर्णय लेने से बच रहा है। यह भी सवाल उठता है कि क्या जिंदल परिवार को इस मुद्दे पर जनता के सामने अकेले ही लड़ाई लड़नी होगी?
हिसार में जिंदल परिवार की बढ़ती राजनीतिक ताकत
जिंदल परिवार का राजनीति में प्रवेश नया नहीं है। नवीन जिंदल पहले ही कुरुक्षेत्र से सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां सावित्री जिंदल हिसार से विधायक हैं। सावित्री जिंदल ने निर्दलीय होते हुए भी भाजपा सरकार को समर्थन देकर अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति बनाई। हालांकि, नगर निगम चुनावों के दौरान मेयर की टिकट को लेकर भाजपा और जिंदल परिवार के बीच खींचतान देखने को मिली थी। यह स्पष्ट करता है कि भाजपा के अंदर भी जिंदल परिवार को लेकर राय बंटी हुई है।
अमित शाह का स्पष्ट संदेश – मुख्यमंत्री की अनदेखी नहीं होगी
अमित शाह के इस कार्यक्रम में दिए गए बयान से यह साफ हो गया कि प्रदेश की राजनीति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नीतियों की भी सराहना की, लेकिन जिंदल परिवार को विशेष महत्व नहीं दिया। हालांकि, स्वर्गीय ओपी जिंदल की दूरदर्शिता की तारीफ कर उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि जिंदल परिवार का योगदान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।
कमल गुप्ता बनाम जिंदल परिवार – सियासी टकराव जारी
हिसार की राजनीति में जिंदल परिवार और भाजपा नेता डॉ. कमल गुप्ता के बीच खींचतान लंबे समय से जारी है। विधानसभा चुनावों के दौरान सावित्री जिंदल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिससे दोनों के बीच विवाद और गहरा गया। कमल गुप्ता ने सावित्री जिंदल को “महारानी” कहकर उन पर तंज कसा, जिससे यह टकराव और बढ़ गया। इसके बाद से दोनों नेताओं ने कभी एक मंच साझा नहीं किया।
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हिसार में भाजपा का चेहरा कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जिंदल परिवार हिसार में भाजपा का प्रमुख चेहरा बन सकेगा? भाजपा के अंदर ही कई नेता इसका विरोध कर रहे हैं। डॉ. कमल गुप्ता नहीं चाहते कि निर्दलीय विधायक भाजपा के चेहरे के रूप में उभरें। वहीं, जिंदल परिवार को भी यह एहसास हो गया है कि अगर उन्हें राजनीतिक ताकत नहीं मिली, तो उनके समर्थकों के काम रुक सकते हैं और इससे जनता में असंतोष बढ़ सकता है।
आगे की राह – क्या भाजपा नेतृत्व जिंदल परिवार को स्वीकार करेगा?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व हिसार की राजनीति में जिंदल परिवार को कितना महत्व देता है। क्या वे भाजपा के भीतर एक प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे, या फिर पार्टी के अन्य नेता उनके प्रभाव को सीमित करने की कोशिश करेंगे? साथ ही, कैंसर अस्पताल प्रोजेक्ट पर सरकार का क्या रुख रहेगा, यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
