विशेष रिपोर्ट — संजय शर्मा, 9 PM न्यूज चैनल
समालखा की सरजमीं पर इन दिनों बदलाव की लहर चल रही है। जिस प्रशासन को कभी केवल दफ्तर की फाइलों में सिमटा हुआ समझा जाता था, वह अब गांव की गलियों में उतरकर आमजन से सीधे संवाद कर रहा है। इसी क्रम में समालखा के बिहोली गांव में एक ऐतिहासिक रात दर्ज की गई, जब एडीसी डॉ. पंकज यादव ने ‘रात्रि ठहराव कार्यक्रम’ के अंतर्गत ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
यह कोई साधारण मुलाकात नहीं थी, बल्कि सुशासन की उस सोच की सजीव मिसाल थी, जिसमें ‘सबका साथ, सबका विकास’ को जमीन पर उतारने की सच्ची कोशिश की गई। कार्यक्रम के दौरान गांव के सरपंच से लेकर आम ग्रामीण तक खुलकर बोले, अपनी समस्याएं सामने रखीं और खास बात यह रही कि कई समस्याओं का समाधान मौके पर ही कर दिया गया।
📌 127 समस्याएं, समाधान भी साथ लाया रात्रि ठहराव
जब प्रशासन खुद चलकर गांव पहुंचे तो लोग भी अपने मन की गांठें खोलने लगे। ग्रामीणों ने बिजली, पानी, सफाई, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, और राजस्व विभाग से जुड़ी कुल 127 समस्याएं एडीसी के समक्ष रखीं। यह संख्या अपने आप में दर्शाती है कि लोगों के मन में कितनी उम्मीदें जुड़ी थीं इस रात्रि ठहराव से।
डॉ. पंकज यादव ने मौके पर ही कई अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए और कहा,
“अब प्रशासन फाइलों में नहीं, गांव की गलियों में दिखेगा। अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य है।“
🏡 सरपंच ने रखीं गांव की प्राथमिकताएं, मिला आश्वासन
गांव के सरपंच संदीप कुमार ने भी गांव की प्रमुख मांगों की सूची प्रस्तुत की। इनमें मुख्यतः जल निकासी की व्यवस्था, आंतरिक सड़कें, सामुदायिक भवन की मरम्मत, और गांव में सार्वजनिक शौचालय की कमी शामिल थी। एडीसी ने इन सभी मांगों को प्राथमिकता देने और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
“हमारी कोशिश है कि हर गांव मॉडल गांव बने। लोगों को शहर जैसी सुविधाएं मिलें।” – एडीसी डॉ. पंकज यादव
🛡️ एसपी ने दी साइबर सुरक्षा और नशामुक्ति की सीख
कार्यक्रम में पानीपत एसपी भूपेंद्र सिंह ने भी शिरकत की और ग्रामीणों से संवाद करते हुए दो महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिलाया:
- नशामुक्त जीवनशैली – युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए विशेष संदेश दिया गया।
- साइबर अपराध से बचाव – एसपी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होता है, तो उसे तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करना चाहिए।
“डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा है। अपने बैंकिंग और ओटीपी जैसी जानकारियों को कभी साझा न करें।” – एसपी भूपेंद्र सिंह
🛠️ तुरंत समाधान, त्वरित निर्णय
कुछ समस्याएं जैसे गांव में स्ट्रीट लाइट का काम, नाले की सफाई, स्कूल में पानी की व्यवस्था, और आंगनवाड़ी केंद्र की मरम्मत जैसे मुद्दों का समाधान वहीं मौके पर किया गया। संबंधित विभागों के अधिकारी भी साथ थे, जिनमें शामिल थे:
- डॉ. किरण सिंह (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद)
- मनदीप कुमार (एसडीएम पानीपत)
- नरेंद्र सिंह (डीएसपी समालखा)
- नीरज जिंदल (सचिव आरटीए)
- विक्रम कंबोज (जीएम रोडवेज)
- राजेश शर्मा (डीडीपीओ)
- राकेश बूरा (जिला शिक्षा अधिकारी)
इन सभी अधिकारियों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को लेकर गांववासियों के सवालों का जवाब दिया और कार्यवाही के लिए संकल्प लिया।
🏞️ बाढ़ प्रबंधन की दिशा में अहम कार्य
गांव के नजदीक बहने वाली यमुना नदी भी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय रही है। बरसात के मौसम में नदी का रौद्र रूप बाढ़ का कारण बनता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग द्वारा तामशाबाद और पत्थरगढ़ गांव में कुल तीन करोड़ रुपये की लागत से लाइनिंग और ठोकरों की मरम्मत करवाई गई है।
सुरेश सैनी, एक्सईएन सिंचाई विभाग ने बताया कि यमुना के तटबंधों की नियमित निगरानी की जा रही है और जहां भी जरूरत महसूस होती है, वहां तुरन्त मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाता है।
“हमारा लक्ष्य है कि बाढ़ आने से पहले ही हर आवश्यक तैयारी पूरी कर ली जाए। किसी को नुकसान न हो, यही संकल्प है।” – सुरेश सैनी, एक्सईएन
🧼 स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य—तीन प्रमुख प्राथमिकताएं
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, स्कूल में शिक्षकों की कमी, और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई को लेकर भी चिंता जताई। एडीसी ने आश्वस्त किया कि इन सभी मुद्दों को रिकॉर्ड कर संबंधित विभागों को भेजा जाएगा और फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा।
“एक मजबूत गांव, एक मजबूत भारत की नींव है। जब गांव में साफ पानी, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी, तब ही हम विकसित राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।” – डॉ. पंकज यादव
🔚 निष्कर्ष: रात्रि ठहराव—एक नई सोच, एक नई शुरुआत
यह कार्यक्रम एक बार फिर साबित करता है कि जब प्रशासन और जनता आमने-सामने संवाद करते हैं, तो समाधान निकलते हैं। यह केवल समस्याएं सुनने का मंच नहीं था, बल्कि विश्वास और बदलाव की शुरुआत थी।
डॉ. पंकज यादव का ‘रात्रि ठहराव कार्यक्रम’ एक ऐसी पहल है, जिसमें सरकारी योजनाएं सिर्फ दस्तावेजों में नहीं बल्कि व्यवहार में उतरती हैं। जब अधिकारी गांव में रात बिताते हैं, तो उन्हें न केवल समस्याएं समझ में आती हैं बल्कि ग्रामीण जीवन की सच्चाई भी सामने आती है।
यह कार्यक्रम हर जिले, हर गांव में होना चाहिए। तब जाकर हम कह सकेंगे कि हां, सुशासन अब केवल नारा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है।
