जो लोहे के गार्ड सुरक्षा के लिए लगे थे, वही बन गए थे पेड़ों की बेड़ियां… करनाल में एक मुहिम ने 2800 पेड़ों को दिलाई नई ज़िंदगी।
करनाल। आंगनबाड़ी, सड़क, पार्क या सरकारी इमारतों के बाहर लगे लोहे के ट्री गार्ड आम तौर पर लोगों को सुरक्षा का प्रतीक लगते हैं, लेकिन यही ट्री गार्ड जब समय पर हटाए न जाएं तो पेड़ों के लिए ‘लोहे की बेड़ियां’ बन जाते हैं। करनाल में आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल जैसे सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाली संस्थाओं की कड़ी में एक नाम और मजबूती से उभरा है—लक्ष्य जनहित सोसायटी। इस संस्था ने उन पेड़ों की पीड़ा को समझा, जो वर्षों से लोहे के ट्री गार्ड में जकड़े हुए चुपचाप जख्म सहते रहे। परिणामस्वरूप बीते करीब पांच वर्षों में 2800 से अधिक पेड़ों को ट्री गार्ड से मुक्त कराया जा चुका है।
यह मुहिम केवल पेड़ बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने प्रशासन, समाज और आम नागरिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या हम विकास और सुरक्षा के नाम पर प्रकृति को अनजाने में नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे।
पेड़ों के जख्म देख पिघल गया मन
लक्ष्य जनहित सोसायटी के फाउंडर चेयरमैन दिनेश बख्शी बताते हैं कि कई स्थानों पर जब उन्होंने ट्री गार्ड से छलनी होते पेड़ों को देखा तो मन व्यथित हो गया। कहीं लोहे के गार्ड तने में धंस चुके थे, तो कहीं लोगों द्वारा लगाए गए कील और तार पेड़ों के शरीर को घायल कर रहे थे। वर्षों तक यही स्थिति रहने से पेड़ धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं और कई बार असमय सूख भी जाते हैं।
दिनेश बख्शी कहते हैं, “पेड़ भी जीवित प्राणी हैं। वे बोल नहीं सकते, लेकिन उनका दर्द साफ दिखाई देता है। अगर समय रहते ट्री गार्ड नहीं हटाए जाएं तो सुरक्षा का यह साधन ही पेड़ की मौत का कारण बन सकता है।”
1 जुलाई 2021 से शुरू हुई ‘ट्री गार्ड फ्री ट्री’ मुहिम
इसी पीड़ा से जन्म हुआ ‘ट्री गार्ड फ्री ट्री’ अभियान का। 1 जुलाई 2021 को करनाल से शुरू हुई यह मुहिम धीरे-धीरे एक जनआंदोलन में बदल गई। पहले चरण में करनाल शहर के विभिन्न इलाकों में सर्वे किया गया। उन पेड़ों की पहचान की गई, जिनके तने ट्री गार्ड में फंस चुके थे या जिन पर कील, तार और बोर्ड लगे हुए थे।
इसके बाद नगर निगम, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर ट्री गार्ड हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कई जगहों पर लोगों को समझाया गया कि पेड़ अब बड़ा हो चुका है और उसे गार्ड की जरूरत नहीं है।
करनाल से निकलकर पांच जिलों तक पहुंची मुहिम
लक्ष्य जनहित सोसायटी की यह पहल केवल करनाल तक सीमित नहीं रही। नीलोखेड़ी, तरावड़ी, कुरुक्षेत्र और भिवानी तक इस अभियान का विस्तार हुआ। अलग-अलग जिलों में स्वयंसेवकों की टीम बनाई गई, जिन्होंने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पेड़ों को आज़ादी दिलाई।
इन पांच वर्षों में 2800 से अधिक पेड़ों से ट्री गार्ड हटाए जा चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों पेड़ों की नई जिंदगी का प्रतीक है, जो अब खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं।
क्यों खतरनाक होते हैं ट्री गार्ड?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्री गार्ड पौधे के शुरुआती वर्षों में आवश्यक होते हैं ताकि जानवरों और वाहनों से सुरक्षा मिल सके। लेकिन जैसे ही पौधा पेड़ का रूप लेने लगता है, ट्री गार्ड को हटा देना चाहिए।
समय पर न हटाने पर:
- पेड़ का तना लोहे से रगड़ खाकर घायल होता है।
- तने की मोटाई बढ़ने पर गार्ड भीतर धंस जाता है।
- कील और तार संक्रमण का कारण बनते हैं।
- पेड़ की प्राकृतिक वृद्धि रुक जाती है।
लक्ष्य जनहित सोसायटी ने इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर लोगों को जागरूक किया।
समाजसेवा का व्यापक दायरा
लक्ष्य जनहित सोसायटी केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। संस्था ने समाजसेवा के कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
अब तक:
- 18 जरूरतमंद कन्याओं के विवाह कराए गए।
- 15 दिव्यांगजनों को हाथ रिक्शा उपलब्ध कराए गए।
- कोरोना काल में सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों तक राशन और दवाइयां पहुंचाई गईं।
इन कार्यों के लिए संस्था को समय-समय पर कई सामाजिक पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
रक्तदान में भी मिसाल हैं दिनेश बख्शी
दिनेश बख्शी का नाम केवल पर्यावरण या समाजसेवा तक सीमित नहीं है। वे 137 बार रक्तदान और 103 बार प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं। उनका मानना है कि समाज तभी मजबूत होगा, जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे।
वे कहते हैं, “पेड़ बचाना हो या इंसान की जान, दोनों के लिए संवेदनशीलता जरूरी है।”
प्रशासन और समाज की भूमिका
इस मुहिम की सफलता में प्रशासन और आम नागरिकों की भूमिका भी अहम रही। कई जगह नगर निगम ने पुराने ट्री गार्ड हटाने में सहयोग किया, तो कहीं स्थानीय लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर गार्ड निकलवाए।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मॉडल को पूरे हरियाणा में लागू किया जाए तो हजारों पेड़ों की जान बचाई जा सकती है।
भविष्य की योजना
लक्ष्य जनहित सोसायटी आने वाले समय में:
- स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाएगी।
- नए पौधरोपण के साथ ट्री गार्ड हटाने की समयसीमा तय करने पर जोर देगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जोड़ेगी, ताकि कोई भी नागरिक घायल पेड़ की सूचना दे सके।
संदेश साफ है
पेड़ों की सुरक्षा केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनकी निरंतर देखभाल और समय पर ट्री गार्ड हटाना भी उतना ही जरूरी है। करनाल की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो समाज मिलकर प्रकृति को नई जिंदगी दे सकता है।
यह मुहिम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है—पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ और उन्हें आज़ादी भी दिलाओ।
