अब एक घर में दो गैस सिस्टम नहीं! सरकार का सख्त आदेश—या तो PNG अपनाओ या LPG कनेक्शन खो दो।
चंडीगढ़/करनाल। PNG वाले घरों में LPG बैन को लेकर हरियाणा सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है, जिससे लाखों उपभोक्ताओं की रसोई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन घरों तक पाइप नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा पहुंच चुकी है, वहां अब LPG सिलिंडर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इस फैसले के तहत ऐसे सभी उपभोक्ताओं को तुरंत प्रभाव से अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राज्य में LPG और PNG दोनों व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह निर्णय लिया गया कि जहां PNG उपलब्ध है, वहां एलपीजी की समानांतर व्यवस्था को खत्म करना जरूरी है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा मिलेगी।
क्या बदल जाएगा आम लोगों के लिए?
इस फैसले के लागू होते ही सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जिनके घरों में पहले से पीएनजी कनेक्शन मौजूद है, लेकिन वे एलपीजी सिलिंडर का भी उपयोग कर रहे हैं। अब ऐसे घरों में दोहरी गैस व्यवस्था नहीं चलेगी।
सरकार के आदेश के अनुसार:
- जिन घरों में PNG कनेक्शन है, वहां एलपीजी सिलिंडर तुरंत बंद करना होगा।
- उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य होगा।
- इसके बाद कोई भी उपभोक्ता एलपीजी सिलिंडर की रिफिल नहीं ले सकेगा।
इसका सीधा मतलब है कि अब उपभोक्ताओं के पास विकल्प लगभग खत्म हो गया है।
गैरकानूनी होगा दोहरी गैस रखना
बैठक में यह भी साफ कर दिया गया कि PNG कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा। यानी अगर किसी उपभोक्ता के पास दोनों कनेक्शन पाए जाते हैं, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।
सरकार का कहना है कि यह कदम व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे फर्जी कनेक्शन और गैस की ब्लैक मार्केटिंग पर भी रोक लगेगी।
पीएनजी लेने से मना किया तो क्या होगा?
सरकार ने इस मामले में सबसे सख्त प्रावधान भी लागू किया है। यदि किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और कोई उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो उसका एलपीजी कनेक्शन सस्पेंड कर दिया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि अब उपभोक्ताओं के पास पीएनजी अपनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रहेगा। यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे राज्य में एक समान गैस वितरण प्रणाली लागू की जा रही है।
जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू होंगे आदेश
राज्य सरकार ने सभी उपायुक्तों, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों (DFSC) और सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को सख्ती से लागू किया जाए।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि:
- जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां एलपीजी का उपयोग पूरी तरह बंद हो।
- सभी उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी दी जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
पाइपलाइन विस्तार में आने वाली दिक्कतें भी होंगी दूर
सरकार ने यह भी माना है कि कई जगहों पर पीएनजी पाइपलाइन बिछाने में रोड कटिंग और राइट ऑफ वे जैसी समस्याएं आ रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए नगर निगम और HSVP को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में पीएनजी की सुविधा पहुंच सकेगी।
सरकार का दावा: पीएनजी है ज्यादा बेहतर
सरकार का कहना है कि पीएनजी एलपीजी के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक है। इसके कई फायदे हैं:
- सिलिंडर खत्म होने की चिंता नहीं
- घर बैठे लगातार गैस सप्लाई
- ब्लास्ट का खतरा कम
- ब्लैक मार्केटिंग खत्म
यही कारण है कि सरकार अब पूरी तरह पीएनजी प्रणाली को बढ़ावा देना चाहती है।
क्या बोले अधिकारी?
करनाल के डीएफएससी मुकेश कुमार ने बताया:
“सरकार के आदेश मिल चुके हैं और इन्हें जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाएगा। जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को उसी पर शिफ्ट होना होगा। जिनके पास एलपीजी कनेक्शन है, उन्हें उसे सरेंडर करना होगा।”
क्या होगा असर?
इस फैसले का असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां पहले से पीएनजी नेटवर्क मौजूद है। हालांकि, कुछ लोग इसे लेकर असंतोष भी जता सकते हैं, खासकर वे जो एलपीजी को ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
- सभी क्षेत्रों में अभी पीएनजी उपलब्ध नहीं
- पाइपलाइन बिछाने में समय लग सकता है
- उपभोक्ताओं की मानसिकता बदलना चुनौती
इसके बावजूद सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रही है।
