करनाल में नशे के खिलाफ सबसे बड़ा कदम—अब सिर्फ सरकारी नहीं, निजी स्कूलों में भी लागू होगा प्रहरी क्लब अभियान… बच्चों से लेकर समाज तक जागरूकता का नया मॉडल तैयार!
करनाल। प्रहरी क्लब अभियान को जिले में और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब तक केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित यह अभियान आने वाले सत्र से निजी स्कूलों में भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नशे के खिलाफ बच्चों और समाज में जागरूकता फैलाना है, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर समस्या से बचाया जा सके।
जिले के 178 राजकीय हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पहले से मौजूद प्रहरी क्लबों को दोबारा सक्रिय करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही नए क्लबों का गठन भी किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक छात्रों को इस मुहिम से जोड़ा जा सके।
अब निजी स्कूल भी होंगे शामिल
शिक्षा विभाग के अनुसार, पिछले सत्र में यह व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे और व्यापक और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस बार निजी स्कूलों को भी इसमें शामिल करना एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक समाज के सभी वर्ग इस अभियान से नहीं जुड़ेंगे, तब तक नशे के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी। इसी सोच के साथ निजी स्कूलों में भी प्रहरी क्लबों को अनिवार्य बनाने की तैयारी की गई है।
समाज की भागीदारी पर जोर
इस अभियान की खास बात यह है कि इसे केवल स्कूल तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें स्कूल प्राचार्य, शिक्षक, कक्षा इंचार्ज, मॉनिटर, अभिभावक और समाज के अन्य जिम्मेदार लोगों को भी जोड़ा जाएगा।
इससे बच्चों के साथ-साथ उनके परिवार और समाज में भी जागरूकता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब परिवार और समाज एक साथ मिलकर किसी समस्या के खिलाफ खड़े होते हैं, तो उसका असर ज्यादा प्रभावी होता है।
खेलों के जरिए जागरूकता
इस बार प्रहरी क्लब अभियान में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले जहां यह केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित था, अब इसमें खेल गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
खेलों के माध्यम से बच्चों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। इसके अलावा टीम वर्क, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्कूल से बाहर भी पहुंचेगा अभियान
प्रहरी क्लबों का दायरा अब केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। इन क्लबों के माध्यम से आसपास की कॉलोनियों और गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
छात्र रैलियां निकालेंगे, नुक्कड़ नाटक करेंगे और लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताएंगे। इससे समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचेगा।
हर महीने पहले शनिवार को गतिविधियां अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने यह भी तय किया है कि हर महीने के पहले शनिवार को सभी स्कूलों में विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इन गतिविधियों में शामिल होंगे:
- रैली
- नुक्कड़ नाटक
- भाषण प्रतियोगिता
- पोस्टर और नारा लेखन
इन सभी कार्यक्रमों की रिपोर्ट नोडल अधिकारी के माध्यम से विभाग को भेजनी होगी।
सख्त निगरानी और मूल्यांकन
नए सत्र से इस अभियान को सख्ती से लागू किया जाएगा। हर स्कूल से मासिक रिपोर्ट ली जाएगी और उसी के आधार पर स्कूलों की सक्रियता का मूल्यांकन किया जाएगा।
जो स्कूल इस अभियान में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्या बोले अधिकारी?
डीएसएस व नोडल अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा ने कहा,
“नए सत्र से अभियान को सख्ती से लागू किया जाएगा और नियमित निगरानी की जाएगी। प्रत्येक स्कूल से मासिक रिपोर्ट ली जाएगी और उसी के आधार पर स्कूलों की सक्रियता का मूल्यांकन कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”
क्यों जरूरी है यह अभियान?
आज के समय में नशा एक बड़ी सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। खासकर युवाओं और छात्रों में इसकी बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है।
ऐसे में प्रहरी क्लब अभियान जैसे प्रयास बेहद जरूरी हैं, जो बच्चों को शुरुआत से ही जागरूक बनाते हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
भविष्य की दिशा
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक आंदोलन खड़ा होगा। जब बच्चे, शिक्षक, अभिभावक और समाज एक साथ मिलकर काम करेंगे, तो इसका असर निश्चित रूप से सकारात्मक होगा।
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